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गुजरात: बोटाद फॉरेस्ट से ऑल-वीमेन एटीएस टीम ने खूंखार गैंगस्टर को गिरफ्तार कर लिया, जो 23 केस में वांटेड था

तर्कसंगत

Image Credits: The Indian Express

May 14, 2019

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5 मई को ऑल-वीमेन गुजरात एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) टीम ने एक वांटेड अपराधी को गिरफ्तार कर लिया, जिस पर हत्या, जबरन वसूली और लूट के विभिन्न मामलों का आरोप है. उन्होंने उसे गुजरात के बोटाद जिले के एक जंगल में गिरफ्तार किया था.

एक अधिकारी के अनुसार, 50 वर्षीय आरोपी जुसाब अल्लारखा संध, जो जूनागढ़, राजकोट, और अहमदाबाद में व अन्य जिलों में 23 मामलों में वांटेड था और उसने पिछले साल ही जून में पैरोल लेकर फ़रार हो गया था. जुसाब पिछले कई महीनों से बोटाड के जंगल में अंदर घने क्षेत्र में छिपा हुआ था.

 

ऑल-वीमेन टीम ने खूंखार गैंगस्टर को गिरफ्तार किया

टीम में पांच एटीएस अधिकारी शामिल थे, जिनमें चार महिलाएं शामिल थीं – संतोक ओ ओदेद्र, नितमिका गोहिल, अरुणा गमेती और शकुंतला मल, जिन्हें अपराधी को गिरफ़्तार करने का काम दिया गया था, जबकि पीएसआई जिग्नेश अरावत जुसाब का पता लगाने में शामिल थे. पूरी टीम को पहाड़ियों और जंगलों को पार करना पड़ा और आरोपियों को पकड़ने के लिए छिपना पड़ा.

एटीएस ने प्रेस को दिए बयान में कहा, “आरोपी जुसाब बोटाद जिले के एक जंगल में छिपा हुआ था और स्थानीय पुलिस के लिए उसे गिरफ्तार करना मुश्किल हो रहा था. इसलिये उसका मामला एटीएस को सौंप दिया गया. पुलिस सब-इंस्पेक्टर संतोकबेन ओदेद्र, अरुणाबेन गमेती, नितमिका गोहेल, शकुंतला मल और जिग्नेश अरावत की एक टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया और उसे ढेर कर दिया.

जुसाब ने पूर्व में चार हत्याओं सहित कई अपराध किए हैं. पिछले साल जब वह अपनी पत्नी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल पर आए थे, उसके बाद वह फ़रार हो गया. कुछ सप्ताह बाद, उन्होंने अपने सहयोगी की हत्या का बदला लेने के लिए एक व्यक्ति, जीवनभाई संघानी का हथियार से क़त्ल कर दिया. जुसाब ने मारपीट की कई घटनाओं को भी अंजाम दिया है. एटीएस की अधिकारी संतोक ओदेद्र के अनुसार, जुसाब को न्यूनतम आवश्यकताओं के साथ रहने के लिए प्रशिक्षित है. वह अपने अस्थायी आवास में फोन या बिजली कनेक्शन के बिना रहता था, जिससे पुलिस के लिए उसे गिरफ्तार करना मुश्किल हो जाता था.

एटीएस टीम को बोटाद जिले के देवगढ़ में एक सूनसान वन क्षेत्र के बीच में जुसाब की उपस्थिति के बारे में एक मुखबिर से सूचना मिली थी. नतीजतन, तुरंत गिरफ्तारी के लिए एक क्विक रिस्पांस टीम गठित की गई. लेकिन जुसाब एक अस्थायी आवास जो जंगल के घने क्षेत्र में रह रहा था, जहां कोई वाहन नहीं पहुंच सकता था, इसलिए अधिकारियों को शनिवार रात को जंगल में प्रवेश करना पड़ा. जुसाब पूर्व में पुलिस दलों पर गोलीबारी के लिए बदनाम था, इसलिए एटीएस टीम ने कोई मौका नहीं दिया, सुबह का इंतजार किया और उसे उसकी झोपड़ी से गिरफ्तार कर लिया.

डीएनए इंडिया से बात करते हुए, एटीएस के डीआईजी हिमांशु शुक्ला ने कहा कि कई महिला अधिकारी हैं जिन्हें ऑपरेशन के लिए मैदान में भेजा जाता है, हालांकि, यह पहली बार था जब महिला अधिकारियों की एक टीम का नेतृत्व भी महिला कर रही थी. हम भेदभाव नहीं करते, इन सभी बहादुर अधिकारियों ने कई मामलों में सहायता की थी और उनमें से बहुत ने केस की गुत्थी सुलझाने में भी कई बार मदद की थी. चाहे वह महिला अधिकारी या पुरुष अधिकारी.

संतोक ओदेद्र ने यह भी कहा कि उन्होंने अब तक किसी भी भेदभाव का सामना नहीं किया है, लेकिन कुछ लोग हैं जो यह मानते हैं कि महिला अधिकारी केवल डेस्क जॉब के लिए होती हैं. उन्होंने कहा, उन लोगों को महिलाओं को कम नहीं आंकना चाहिए.

 

तर्कसंगत का प्रयास

यह वास्तव में गर्व की बात है कि इस तरह के खूंखार अपराधी को एक बहादुर आल वीमेन टीम ने बेअसर कर दिया. यह एक बार फिर साबित करता है कि महिलाएं किसी भी पेशे में कामयाब हो सकती हैं, यहां तक ​​कि जिन्हें आमतौर पर पुरुषो का काम ही माना जाता है. जबकि तर्कसंगत इस तरह की उपलब्धि हासिल करने के लिए टीम को बधाई देता है, हम आशा करते हैं कि ऐसी और भी कहानियां सामने आएंगी. हम यह भी उम्मीद करते हैं कि लोग इस उदाहरण से प्रेरणा लेंगे.

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