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ओडिशा में फानी के दौरान 25 दलित परिवार को आश्रय गृहों से बाहर रखा गया

तर्कसंगत

Image Credits: India Today

May 15, 2019

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओडिशा में साइक्लोन फानी के दिन 3 मई को लगभग 25 दलित परिवारों को तीन आश्रय घरों से निकाल दिया गया था. बहुजन छात्र और युवा मोर्चा के सदस्य अनिल कुमार मल्लिक का एक वीडियो, जो अब काफी तेज़्ज़ी से वायरल हो रहा है, पाटली पंचायत के बारीपदा गांव के लोगों का दावा है कि 25 दलित परिवारों, लगभग 85 लोगों को आश्रय से वंचित रखा गया था.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3 मई को ओडिशा में चक्रवात फनी ने पुरी और भुवनेश्वर में कहर बरपाया, जहां मरने वालों की संख्या 64 हो गई है. राज्य के बुनियादी ढांचे को चक्रवात के कारण हुए विनाश के अलावा, 12 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.

2 मई को, चक्रवात की खबर सुनकर, बारीपदा गाँव में दलित समुदाय के सदस्य आश्रय के लिए पास के स्कूल में पहुँचे, लेकिन उनकी जाति के कारण उन्हें प्रवेश करने से इनकार कर दिया गया, बीबीसी ने बताया. हालांकि, लगातार अनुरोध के बाद, एस्बेस्टस सीमेंट शीट के एक अलग कमरे में उन्हें जगह दी गयी जबकि दूसरे उच्च जाती के लोग पक्का आश्रय स्थल में रह रहे थे.

स्क्रॉल.इन को अनिल कुमार मल्लिक ने बताया  कि, अन्य दलित परिवार उतने भाग्यशाली नहीं थे. एक छोटा से दो कमरों वाला स्कूल को बारीपदा में आश्रय स्थल के रूप में बनाया गया था, मगर वह दलित परिवारों को अंदर आने नहीं दिया गया. आश्रय पहले से ही उच्च जाति के लोगों द्वारा कब्जा कर लिया गया था और दलित परिवारों को प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी.

रिपोर्टों के अनुसार, कुछ परिवारों को तो एक ही घर में टिन-छत वाले घर में आश्रय देने से इनकार कर दिया गया था. इसी तरह, बारिपदा से 4 किमी दूर पाटली में एक आश्रय गृह में, दलित परिवारों को प्रवेश करने की अनुमति देने के लगभग एक घंटे बाद उन्हें जगह छोड़ने के लिए कहा गया.

“सभी दरवाजे बंद थे, हमने अनुरोध किया लेकिन किसी ने हमें आश्रय नहीं दिया. उन्होंने प्रवेश से इनकार कर दिया क्योंकि हम दलित हैं ” बीबीसी से बिनिता गोचायत ने कहा.

अब तक, बरगद का पेड़ एक सप्ताह से अधिक समय से उनका आश्रय स्थल है. परिवारों ने केवल 3 मई को चक्रवात फानी की पहली रात को खाने के लिए कच्चा नारियल खाया था और तब से बिना भोजन किए हुए थे, बीबीसी को सूचना दी.

 

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