मेरी कहानी

मेरी कहानी #MoreThanMarks : आत्महत्या का प्रयास करने व घर से भागने से लेकर कक्षा में अव्वल आने तक.

तर्कसंगत

May 16, 2019

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परीक्षाओं का मौसम चल रहा है और सैकड़ों छात्र और उनके चिंतित माता-पिता मिश्रित भावनाओं के साथ परिणामों विश्लेशण करेंगे, कुछ अभिन्न और और कुछ निराश. परीक्षा एक संभावित कैरियर के लिए एक कदम है, लेकिन वे पूरी तरह से आपके जीवन का फैसला नहीं करते हैं. #MoreThanMarks आम लोगों की वास्तविक जीवन की कहानियों को सामने लाने के लिए तर्कसंगत का एक अभियान है, जो अपने अंकों के बावजूद सफल हुए और इस  पर जोर दिया कि आप सफल हो सकते हैं और एक खुशहाल जीवन जी सकते हैं, भले ही आप एक अव्वल नंबर छात्र न हों.

मैंने जो कुछ किया, उसके लिए शर्मिंदा हूं. मैं स्कूल में मेहनती छात्र था, ईमानदारी से नोट्स लेता था और हर विषय में 70% से अधिक अंक प्राप्त करता था. यह 8वी कक्षा के दौरान था कि चीजें बदल गईं. मैंने कभी इतना असहाय महसूस नहीं किया था.

मैं दक्षिण बेंगलुरु के एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय स्कूल का छात्र था. मेरे माता-पिता ज्यादातर हर पैरंट्स टीचर्स मीटिंग में मेरे परीक्षा परिणाम को देखने के लिए तैयार रहते थे. हालाँकि, जब 2008 में मेरे स्कूल ने हमारे पाठ्यक्रम में संस्कृत की शुरुआत की, तो यह मेरे लिए कठिन था. मामलों को बदतर बनाने के लिए, संस्कृत पढने वाली पहली भाषा बन गई. मैंने कन्नड़ में अच्छा स्कोर किया जो हमारी पहली भाषा थी, लेकिन अब जब स्कूल प्राधिकरण ने संस्कृत को लेना अनिवार्य कर दिया, तो दबाव बनना शुरू हो गया.

मुझे याद है कि किसी भी अन्य विषय की तुलना में संस्कृत सीखने में अधिक समय बिताना पड़ता है. यह एक मूल वाक्य को समझने का संघर्ष था. मुझे पता था कि विषय में 70% अंक की उम्मीद करना रेगिस्तान में पानी खोजने की कोशिश करने जैसा था, आप केवल इसके लिए उम्मीद ही कर सकते हैं.

मेरा सबसे बुरा सपना सच हो गया जब मैंने अपना परिणाम प्राप्त किया। मैं संस्कृत में फेल हो गया था. मैं स्तब्ध और भ्रमित था, डरा हुआ था और भयभीत था. मैं अपने जीवन में कभी असफल नहीं हुआ था.

मेरे सबसे अच्छा दोस्त कार्तिक, जो उसी परीक्षा में भी असफल हुआ था उसने सुझाव दिया कि हम आत्महत्या कर लेते हैं. हमें नहीं पता था कि क्या करना है. फिर, पिटाई या उससे भी बदतर माता-पिता की चुप्पी सहना सजा का सबसे खराब रूप था जिसे कोई सोच भी नहीं सकता था.

इसलिए हम लंच ब्रेक के दौरान, जब कोई आसपास नहीं था, तो हमने टिनचर ले आए ( जो घावों को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है) और कक्षा में ही पीया. हमारे आश्चर्य के लिए, यह एक बेवकूफी भरी योजना थी, क्योंकि कुछ भी नहीं हुआ, सिवाय मेरे उल्टी करने के. अन्य दो अवसरों पर, हमने अपने जीवन को समाप्त करने के लिए मच्छर मारने की दवाई और चूहे का जहर खरीदा. हालांकि, हमारे भाग्य में हमारे लिए अन्य योजनाएं थीं, और हम अपने सभी प्रयासों से बच गए.

पहले परीक्षा के बाद, मैंने कड़ी मेहनत से पढाई की, लेकिन दूसरे परीक्षा के परिणाम को देखने के बाद, ऐसा लगा कि मेरे बेहतर अंक आने के लिए यह प्रयास पर्याप्त नहीं थे. मैं फिर से असफल हो गया. इस बार कार्तिक और मुझे यकीन था कि जैसे-जैसे हमारी आत्महत्या की योजना एक बड़ी असफलता बनती जा रही थी, हमने सोचा हम लोग अपने माता-पिता से दूर भाग जाते हैं.कार्तिक और मैं दोनों स्कूल की छुट्टी के बाद भाग गए. हम श्रृंगेरी शहर ले जाने वाली बस में बैठ गए (बेंगलुरु से 320 किमी दूर). हम तीन दिनों के लिए अपनी पॉकेट मनी पर जीते रहे और एक लॉज में शरण ली.

तीसरी रात, मैंने अपने घर पर स्थिति जानने के लिए अपने एक स्कूल के दोस्त को फोन किया. मैं डर गया था जब मुझे पता चला कि मेरे माता-पिता ने मेरे लिये एक गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. मैं डर गया और हमने एक बार में ही लौटने का फैसला किया. हम दोनों उसी रात लौटे. मेरे आने पर, मेरे माता-पिता ने स्वागत किया जैसे कि कुछ भी नहीं हुआ हो.

उस घटना के बाद, मैंने संस्कृत के लिए ट्यूशन लिया और अपने अंतिम परीक्षाओं में कक्षा में टॉप किया. मैने ग्रेड 10वी बोर्ड्स के दौरान, मैंने अपनी कक्षा से सबसे अधिक अंक प्राप्त किए. मैंने 125 में से 95 स्कोर किए. जूनियर कॉलेज (11 और 12 वीं कक्षा) में मैंने संस्कृत और अंग्रेजी के साथ विज्ञान का विकल्प चुना. मैंने सभी विषयों में अच्छे अंक प्राप्त किए और फिर से संस्कृत में टॉप किया. बाद में, मैंने अपनी इंजीनियरिंग पूरी की और अब एक मीडिया हाउस के लिए काम करता हूं.

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