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बचपन में यातायात समझ का विकास, एक प्लेस्कूल जो सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियम सिखाता है

तर्कसंगत

May 17, 2019

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2016 के एक अध्ययन के अनुसार भारत में प्रति चार मिनटों में एक नागरिक अपना जीवन सड़क दुर्घटना के कारण खो देता है. सड़क सुरक्षा एक बेहद ही महत्वपूर्ण मुद्दा होने के बावजूद सामान्य जन में अपना स्थान नही बना पाया है.

ऋषभ आनन्द एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने आम जनता को सड़क सुरक्षा के मुद्दे  पर जागरुक करने का बीड़ा उठाया है. पिछ्ले पांच वर्षों से ऋषभ ने ऐसे कईं मुहिमों और कार्यक्रमों की शुरुआत की है जिनसे समान्य जन के बीच सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैले. जैसे ”प्रयास-एक कदम सड़क सुरक्षा की ओर”, इस मुहीम के मुताबिक, ऋषभ और उनके साथी स्कूलों और कॉलेजों में जाकर वर्कशॉप का आयोजन करते हैं. ऋषभ का यह संघठन, झारखंड के रांची मे आधारित है और इसके 2016 में आरम्भ से अबतक यह 250 स्कूलों और कॉलेजों तक जा पहुंचे हैं.

 

 

सभी मुहिमों में सबसे दिलचस्प है इनका ‘कार्टून प्लेस्कूल’ नामक प्लेस्कूल जो बच्चों को केवल सड़क सुरक्षा और उनसे जुडे नियम सिखाने में समर्पित है. ऋषभ ने ‘तर्कसंगत’ से बात करते हुए कहा यह अपनी तरह का भारत में एकमात्र और पहला प्लेस्कूल है.

 

प्ले स्कूल जो यातायात समझ का विकास करे:

जीवन के प्रारंभिक दौर में याद की गईं चीज़ें हमारे साथ जीवन भर रहतीं हैं, जैसे की अक्षर,संख्या इत्यादि. मैनें समझा की यातायात की समझ व सूझभूझ जैसी चीजें भी जीवन के प्रारंभ में सिखा देनी चाहिए-ऋषभ कहते हैं.

 

इस स्कूल में लगभग एक से डेढ़ साल के अंतराल में बच्चों को ट्रैफिक सिग्नल, स्पीड ब्रेकर, ट्रैफिक रोड आदि के बारे में पढ़ाया जाता है. यह पूछे जाने पर कि बच्चे इन पाठों का जवाब कैसे देते हैं, ऋषभ ने कहा, “लोग ऐसा समझते हैं की ट्रैफिक नियम जैसे बोरिंग, उदास टॉपिक पर बच्चे ध्यान काम देंगे मगर असलियत इसके विपरीत है. इसका राज़ यह है कि हम ‘ट्रैफिक पार्कों’, टॉय कारों, स्पीड ब्रेकर और ट्रैफ़िक लाइटों के साथ, ट्रैफ़िक  जैसी स्थिति बनाने  करने की कोशिश करते हैं. हमारे सिखाने का तरीका बहुत हद तक नाटकों और खेलों पर आधारित है.”

 

 

पोस्टर कैम्पेन,साइकलोथौन और बहुत कुछ:

इस मुहीम में कदम रखने से पहले ऋषभ ने एक पत्रकार के रूप में काम किया, वह पत्रकार के तौर पर दिल्ली व बंगलूरू जैसे शहरों में रहे. वहां उन्हे महसूस हुआ कि परिस्तिथि यहाँ अधिक गम्भीर थी, बावजूद इसके जनता में इसे लेकर कुछ जागरूकता भी थी. लेकिन इसके मुकाबले छोटे शहरों में यह परिस्तिथि और भी बुरी थी. तभी ऋषभ अपने गृहनगर रांची चले गए. वहाँ उन्होने ’पोस्टर कैम्पेन’ से मुहिम कि शुरुआत की. जब उनके प्रयासों को प्रमुखता मिलने लगी, उन्होने पुलिस अधिकरीयों और नगर निगम के साथ साइक्लोथान का आयोजन करवाया और जल्द ही ऋषभ और उनके साथी वालंटियर्स यह मुहीम स्कूलों,कॉलेजों,हॉस्टलओ व कोचिंग सेंटर ले पहुँचे। रांची से शुरु की गई यह मुहिम अब जमशेदपुर और बोकारो समेत 4-5 शहरों तक पहुँच चुकी है.

 

 

“2019 से हमने सड़क दुर्घटना से जुड़े लोगों और उन्के रिश्तेरिश्तेदारों को परामर्श देने का कार्य भी शुरु किया है. हम कानूनी व मैडिकल सलाह देते हैं. अकसर गहरे हादसों के शिकार लोग बड़े आघात हो जाते हैं और इस कारण ट्रौमा में चले जाते हैं. यहाँ तक की नजदीकी रिश्तेदार भी ट्रौमा के खतरे के करीब होते हैं.ऋषभ बाताते हैं.

 

 

सड़क सुरक्षा का मुद्दा काफी हद तक आम जनता की नज़रों से छूटता रहा है. इसके गम्भीर व अहम होने के बावजूद लोग इसकी बात नही करते.

ऋषभ के इस परिस्तिथि को बदलने के प्रयासों की लॉजिकल इन्डियन सराहना करता है.

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