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काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर को स्थानीय, अयोध्या से जोड़ कर देख रहे हैं

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Image Credits: Live Hindustan

May 20, 2019

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अयोध्या तो झांकी है,काशी -मथुरा अभी बाक़ी है

बाबरी मस्ज़िद विध्वंस के समय कारसेवकों द्वारा लगाए जा रहे नारों को याद कर, विश्वनाथ मंदिर से लगी हुई 17वीं सदी की ज्ञानवापी मस्ज़िद की प्रशासनिक कमेटी के सदस्य अंजुमन इंतजामिया और ज्वाइंट सेक्रेटरी एसएम यासीन बताते हैं “अयोध्या जैसी स्थिति ज्ञानवापी मस्ज़िद की भी हो सकती है.”. प्रमुख अख़बार जनसत्ता से उद्धत

स्रोत : जनसत्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मह्त्वाकांक्षी और बहु चर्चित काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण वाराणसी में ज़ोर शोर से ज़ारी है. नवीनीकरण और सौंदर्यीकरण की इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य गंगा तट पर, ललिता घाट से विश्वनाथ मंदिर तक एक चौड़ा रास्ता बनाना ताकि गंगा तट से ही मंदिर के शिखर को दूर से ही देखा जा सके. इस मुहिम के तहत प्रशासन द्वारा क़रीब 300 घरों को खरीदे जाने का निर्धारित हुआ है और बीबीसी के अनुसार लगभग 200 घर खरीदे भी जा  चुके हैं.

स्रोत : बीबीसी

ऐसे में जहां कुछ लोग इस बात से ख़ुश हैं कि संकरी गलियों में बने उनके पुराने घरों के अधिग्रहण का सरकार दोगुना मुआवजा देे रही है. वहीं कुछ लोग पुराने काशी  की गलियों वाले रहन सहन और खान पान की संस्कृति नष्ट होते देख, इस फ़ैसले से आहत हैं. इन तोड़ी जा रही गलियों के कुछ दुकानदार विकल्प के अभाव में, जहां रोज़गार जाने से आहत हैं तो वहीं वाराणसी के अल्प संख्यक समुदाय की परेशानी का सबब कुछ और है.

दरअसल, इस मुहिम के तहत मंदिर मस्जिद के आस पास वाली जगह को लगभग ख़ाली करा लिया गया है. घरों को गिराने के बाद दूर से ही 17वीं सदी की ज्ञानवापी मस्ज़िद की इमारत भी साफ़ दिखाई देने लगी है और इसके आगे एक बड़ा मैदान भी निकल आया है जिसे क्रम में एक पार्क में तब्दील कर दिया जाएगा. इसी मैदान को लेकर चिंता जताते हुए, बनारस के पुराने मुस्लिम बाशिंदे बताते हैं कि इसमें पांच से दस हज़ार की भीड़ कभी भी बनाई जा सकती है और आज नहीं तो कल ज्ञानवापी मस्ज़िद को ख़तरा होगा ज़रूर. सरकारी प्रशासन भी दुश्वारियां बताकर अपनी लाचारी जाहिर कर देगा.

स्रोत : जनसत्ता

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब से वाराणसी में इस कोरिडोर पर काम शुरू हुआ है, शहर में किसी ना किसी कारण को लेेकर तनाव बना हुआ है. अधिग्रहण में 80 मुस्लिम घरों को खरीदे जाने से लेकर उनमें मंदिर मिलने और मंदिरों को गिराए जाने से लेकर कई अफवाहों से माहौल गरम रहा है. इस प्रोजेक्ट के मुख्य कार्यकारी श्री विशाल सिंह बताते हैं कि ना तो एक मंदिर तोड़ा गया है और ना ही किसी मूर्ति को नुक़सान पहुंचा है. मुस्लिम घरों को खरीदे जाने की बात भी कोरी अफवाह है क्यूंकि मंदिर के पास वाले इस इलाके में मुस्लिम आबादी ही नहीं है. अक्टूबर 2018 में ज़रूर, विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4 के पास स्थित मस्जिद के चबूतरे के टूटने से विवाद हो गया था जो मस्जिद का हिस्सा नहीं था लेकिन जिला प्रशासन ने मामले की संजीदगी को भांपते हुए, इस चबूतरे का दोबारा निर्माण करा दिया.

डीएम श्री सुरेन्द्र सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया है कि सीसीटीवी और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती से वे संतुष्ट हैं. मस्ज़िद को पूरी तरह से बैरिकेड द्वारा भी सुरक्षित किया गया है. मस्जिद को ना कभी कुछ नुक़सान हुआ और ना होगा. तोड़ा गया चबूतरा सुन्नी वक्फ बोर्ड के कब्जे में तो है लेकिन कोई धार्मिक स्थान नहीं है.

स्रोत : टाइम्स ऑफ़ इंडिया

बीबीसी और टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में ही काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत तिवारी ने कहा कि अयोध्या के बाद काशी को भी एक राजनीतिक एजेंडे में बदल दिया गया है. समय मुश्किल है लेकिन  वाराणसी का सामाजिक ताना बाना बहुत मजबूत है.

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