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एक साल के बाद भी फ्लैट न मिलने पर ग्राहक बिल्डर से पैसा वापस ले सकते हैं

तर्कसंगत

Image Credits: NDTV/Wikipedia

May 20, 2019

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आज की ज़िन्दगी में जहाँ लोगों को अपने सपनों को पूरा करने के पीछे भागते भागते समय नहीं मिलता, तो हर चीज़ में शॉर्टकट और तकनीक पर निर्भर रहते हैं. मिडिल क्लास परिवार के लिए घर भी एक सपने की तरह ही है जो वह पाई पाई जोड़ कर पाना चाहता है. मगर समय की कमी ठीकेदार, मज़दूरों की झिकझिक से बचने के लिए बड़े बिल्डर्स का सहारा लेता है और पैसे दे कर निश्चिन्त हो जाता है. मगर उस वक़्त का क्या जब पूरे पैसे देने के बाद भी उसे उसके सपनों का घर नहीं मिल पाता?

इसी मुसीबत से निपटने के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने बिल्डर्स के लिए एक नया नियम बनाया है जिसके मुताबिक  ग्राहकों को तय समयसीमा से ज़्यादा से ज़्यादा एक साल बाद में फ्लैट देना होगा और ऐसा नहीं करने पर उन्हें ग्राहकों से लिए पैसे 10% इंटरेस्ट के साथ चुकाना होंगे अगर ग्राहक फ्लैट के बजाय अपना पैसा वापस मांगता है.

इस नियम के पीछे का कारण यही है कि ग्राहकों से पूरे पैसे लेने के बाद बिल्डर्स समय से फ्लैट का मालिकाना हक़ ग्राहकों को नहीं देते, इसके पहले सुप्रीमकोर्ट ने भी बिल्डर्स पर शिकंजा कसते हुए उन्हें फ्लैट्स का हैंडओवर ग्राहकों को जल्द से जल्द देने की हिदायत दी थी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ग्राहकों को अनिश्चितकालीन समय के लिए बिना फ्लैट्स के नहीं छोड़ा जा सकता. हालाँकि पैसे वापस करने के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गयी है.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट में कहा कि प्रेम नारायण की अध्यक्षता वाली एनसीडीआरसी की बेंच ने अपने आदेश में कहा, अब ग्राहकों  को अपना रिफंड मांगने का अधिकार है अगर उन्हें फ्लैट देने में देरी हो रही है, यदि एक साल से अधिक का समय बीत चुका हो.

अदालत दिल्ली निवासी सलाभ निगम की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होनें ग्रीनपोलिस, लक्जरी आवास परियोजना, 2012 में एक फ्लैट खरीदी थी. सलाभ ने फ्लैट के लिए 90 लाख रुपये दिए थे और समझौते के अनुसार, फ्लैट अगले 3 सालों में उनको दे दी जानी थी, जिसमें ज़्यादा से ज़्यादा 6 महीने की देरी की छूट थी.

बिल्डरों से रिफंड या फ्लैट न मिलने पर, सलाभ ने एनसीडीआरसी से संपर्क किया. अदालत ने बिल्डरों को रुकी हुई परियोजना को समाप्त करने और 2019 के सितंबर तक फ्लैट सौंपने का आदेश दिया. इसके अलावा, आयोग ने बिल्डर को विलंब के लिए, मुआवजे के रूप में जमा धन पर 6% ब्याज का भुगतान करने का भी निर्देश दिया.

हाल ही में, कोर्ट ने यूनिटेक लिमिटेड को दिल्ली निवासी के लिए 1 करोड़ से अधिक वापस करने के लिए भी कहा, क्योंकि कंपनी दो साल से अधिक समय के लिए एक फ्लैट का पोसेशन देने में विफल रही. अदालत ने यूनिटेक को 10 महीने के ब्याज के साथ तीन महीने के भीतर पूरी राशि वापस करने का आदेश दिया.

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