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एक इंजीनियर 200 बच्चों के माता-पिता की मदद से उनके लिए बेहतर बचपन सुनिश्चित कर रहा है

तर्कसंगत

May 21, 2019

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सारथी शब्द के साथ एक कल्पना जो तुरंत हमारे दिमाग में आती है वह यह है कि अर्जुन का रथ और श्री कृष्ण कुरुक्षेत्र के युद्ध में उनके सारथी. पौराणिक कथाओं का संदर्भ इस मामले में प्रासंगिक है, क्योंकि दिल्ली स्थित एक संस्था सारथी भी इस बात में बदलाव लाने का प्रयास कर रही है कि कैसे माता-पिता, विशेष रूप से निम्न आर्थिक पृष्टभूमि से अपने बच्चों के जीवन को आकार दे सकते हैं और उनमे सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं वो भी उनकी उम्र के बढ़ते वर्षों में.

सारथी नामक एनजीओ की स्थापना टीच फॉर इंडिया के भूतपूर्व साथी अंकित अरोड़ा ने की है. वह एक योग्य इंजीनियर हैं और उन्होंने सारथी को स्थापित करने से पहले शिक्षा क्षेत्र में बहुत नज़दीक से काम किया है. यह सेंटर स्क्वायर फाउंडेशन के साथ उनके कार्यकाल के दौरान, उन्होंने पाया कि बच्चे के संपूर्ण विकास और प्रदर्शन में माता-पिता का हस्तक्षेप कितना महत्व रखता है.

हालांकि विकसित देशों में, ऐसे संगठन थे जो माता-पिता के हस्तक्षेप के साथ काम कर रहे थे, भारतीय शैक्षिक परिदृश्य ने कभी ऐसा कुछ नहीं देखा. उन्होंने इस क्षेत्र में कुछ करने और एक स्थायी मॉडल बनाने का फैसला किया, जो सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रभावी और साथ ही साथ उसके प्रभाव को पूरे देश भर में लागू किया जा सके.

जब तर्कसंगत ने उनसे बात की, तो उन्होंने कहा, “संगठन की स्थापना के पीछे हमारा मुख्य उद्देश्य हमारे कम विशेषाधिकार प्राप्त भाइयों और बहनों के लिए सार्थक अनुभव बनाना है. हम उन्हीं सार्थक अनुभवों को दोहराना चाहते हैं, जिन्हें हासिल करने का सौभाग्य हमें मिला उन्हें भी मिलना चाहिये, जैसा कि हम सब अपने माता-पिता की मदद से बड़े हुए हैं.

सारथी, को अब एक वर्ष से अधिक हो गया है, वह यह मानता है कि एक बच्चे के विकास के सभी चरणों में उनके माता-पिता का हस्तक्षेप एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और इस सिद्धांत के साथ काम करता है, इसमें विशेष रूप से 12 वर्ष से कम आयु वर्ग पर ज्यादा जोर दिया जाता है. वर्तमान में, वह नई दिल्ली के दो समुदायों, आजादपुर समुदाय और पुल-प्रहलादपुर समुदाय में 200 परिवारों के साथ काम कर रहे हैं.

 

 

प्राथमिक सिद्धांत

दो उदाहरण/प्रतिमान/एलिमेंट, गुणात्मक और मात्रात्मक, तीन खंडों में मापा जाता है, जिसमे शैक्षणिक विकास, सामाजिक-आर्थिक विकास और संज्ञानात्मक विकास हैं. शैक्षणिक विकास पत्र के ज्ञान को संदर्भित करता है, सामाजिक-आर्थिक विकास नैतिकता, मूल्यों और आत्म-पहचान के जागरूकता के माध्यम से ज्ञात किया जा सकता है. जबकि, संज्ञानात्मक विकास मुख्य रूप से मस्तिष्क विकास और महत्वपूर्ण सोच जैसी संज्ञानात्मक क्षमताओं के विकास पर ध्यान केंद्रित करता है.

 

 

सारथी का तरीका

कोई यह जिज्ञासा रख सकता है कि इन प्रतिमानों को बच्चे के समग्र विकास में योगदान करने के लिए माता-पिता द्वारा मूर्त रूप से कैसे परिवर्तित किया जाता है? यह हस्तक्षेप उनके सरल और अभी तक के सबसे अत्यंत प्रभावी मोड के माध्यम से किया जाता है. हस्तक्षेप के तरीके के तीन भाग है और उनके कार्यान्वयन का एक बहुत ही सरल रूप है. अंकित ने कहा, “हमने शुरुआत में स्मार्टफोन आधारित दृष्टिकोण का फैसला किया था. लेकिन, इस मामले में, हमारे कार्यकम का मुख्य हिस्सा माताएं है, जो की कम आय वाले समूहों से आती हैं. उनके पास अक्सर स्मार्टफोन ही नहीं होता है. इसलिए, हमारा मॉडल एक फीचर-फोन आधारित है.

 

  •  माताओं को डू इट योरसेल्फ एक्टिविटी किट दी जाती हैं जो क्रमबद्ध रूप में हैं. मॉडल का पहले हिस्से में एक रिकॉर्डेड कॉल है जो माताओं को अपने फोन पर प्राप्त होती है. यह कॉल एक या दो मिनट तक चलती हैं और यह ज्यादातर एक ट्रिगर कॉल होती है और यह निर्देश पर आधारित है और गतिविधि किट के आधार पर कॉल-टू-एक्शन है. माताओं को सप्ताह में दो बार प्री-रिकॉर्डेड कॉल मिलती है और वह उसके लिए अपने अनुकूलित समय स्लॉट का विकल्प चुन सकती हैं.

 

  • दूसरा घटक एक सामुदायिक संबंध प्रबंधक है. समुदाय की माताओं में से एक को समुदाय की नेता के रूप में नियुक्त किया जाता है जो यह सुनिश्चित करती है कि पूर्व-दर्ज कॉल पर दिए गए निर्देशों का पालन किया जाए और वह उसका फीडबैक भी लेती है. वह प्रभावी पेरेंटिंग को सक्षम करने के लिए माताओं को आवश्यक प्रेरणा और सहायता प्रदान करती है. उसकी सेवाओं के एवज में उसे कुछ मुआवजा भी दिया जाता है. रोल निर्माण और नियमित फॉलो-अप भी उसकी नौकरी का एक हिस्सा है. वह हर हफ्ते एक लाइव कॉल करती है.

 

  • हाउस विजिट मॉडल का अंतिम घटक है. एक उचित प्रतिक्रिया तंत्र सुनिश्चित करने के लिए, समुदाय की नेता हर महीने समुदाय के सदस्यों के घर में एक घर का दौरा करती हैं. यह हस्तक्षेप मॉडल के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करता है.

 

 

इसका प्रभाव

सकारात्मक प्रभाव को लाभार्थियों की व्यवहारीकिता और उनकी मानसिकता में एक दिखाये देने वाले परिवर्तन के संदर्भ में मापा जा सकता है. उन्होंने कहा, “पहले, माताओं को इस बात पर संदेह था कि पूरी प्रक्रिया कैसे होगी. लेकिन कुछ महीनों के बाद, हमें उनकी ओर से सक्रिय भागीदारी मिलने लगी हैं”. उन्होंने एक उदाहरण का हवाला दिया, जहां बच्चे की मां ने प्रभावी ढंग से सोने से पहले वाले समय में पढ़ने को एक जगह दी है. इस प्रथा को और आगे ले जाते हुए, उन्होंने अपने हिसाब से बच्चे के लिए कुछ किताबें भी खरीदीं.

एक नोट में, अंकित ने कहा, “हमारी पहल बहुत ही नवजात अवस्था में है. हम उत्पाद को एक स्मार्टफोन के दृष्टिकोण पर ले जाना चाहते हैं और जहाँ हम 1 मिलियन परिवारों के जीवन को बदलना, हमारे दीर्घकालिक लक्ष्यों में से एक है’. तर्कसंगत समुदाय, अंकित द्वारा सारथी की मदद से किए गए प्रयासों की सराहना करता है. वह हम सभी के लिए एक प्रेरणा हैं.

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