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आईएएस अधिकारी ने छात्र की आत्महत्या के बाद अपना रिपोर्ट कार्ड साझा किया 44 .5% 10 वीं में, 12 वीं में 65%

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Image Credits: India Times

May 22, 2019

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पिछले कुछ दिनों में कई बोर्ड ने नतीजे घोषित किए. जबकि परिणाम कुछ के लिए अपार खुशी का कारण है तो कुछ अन्य लोगों को इससे निराशा हुई है. अधिकतर, बच्चों की क्षमता पूरी तरह से उनके द्वारा प्राप्त किए गए अंकों के आधार पर तय की जाती है. यदि वे अपनी परीक्षा में ’अच्छा प्रदर्शन करने में विफल’ रहते हैं, तो लोग उन्हें असफल बोल, उन्हें तानो से परेशान कर देते हैं. इतनी कम उम्र में इस तरह के तंजों का सामना करने में असमर्थ, कुछ बच्चे ऐसा कर गुज़र जाते हैं जो उनके माता पिता या टीचर्स नहीं सोच सकते है.

10 मई को, छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CGBSE) ने बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित किए, और कई ऐसे थे, जो अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण हुए, जबकि कुछ अन्य पास नहीं हो सके. वहीं परीक्षा में असफल होने से निराश रायगढ़ के एक लड़के ने आत्महत्या कर ली.

आत्महत्या करने वाले बच्चे की लगातार खबरों से दुखी होकर 2009 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी अवनीश कुमार शरण, जो वर्तमान में कबीरधाम जिले, छत्तीसगढ़ के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात हैं, उन्होने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखी, अपने स्वयं के अंक शेयर किए और छात्रों से कहा “खराब परिणाम आने से वे निराश ना हों”.

“बस अंकों का खेल”

उन्होंने फेसबुक पर लिखा “आज मैंने अखबार में चौंकाने वाली खबर पढ़ी कि परीक्षा में अप्रत्याशित परिणाम के कारण एक छात्र ने आत्महत्या कर ली. मैं सभी छात्रों और उनके माता-पिता से विनती करता हूं कि वे परिणाम को गंभीरता से न लें! यह एक नंबर गेम है. आपको अपनी योग्यता साबित करने के कई और मौके ज़रूर मिलेंगे.”

सिर्फ सलाह ही नहीं, उन्होंने अपने परिणामों को भी साझा किया, जो उन्होंने अपने मैट्रिक, इंटरमीडिएट और स्नातक परीक्षा में प्राप्त किए थे. वह ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के आरबीएस कॉलेज, दलसिंगसराय के छात्र थे, कक्षा 10 और 12 बोर्ड परीक्षा में 44.5% और 65% अंक प्राप्त किए और अपनी स्नातक परीक्षा में 60.7% अंक प्राप्त किए. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, उन्होंने कहा, “आज विकल्प असीमित हैं, और जब तक छात्र अपने स्वप्न के साथ बने रहने का प्रयास करेंगे, तब तक अवसर आते रहेंगे. स्कूल बोर्ड के परिणाम बच्चे के भविष्य का फैसला क्यों करें.उन्हें जल्द ही इसे भूल जाना चाहिए क्योंकि परीक्षा परिणाम दुनिया का अंत नहीं है.”
हाल ही में, एक अन्य महिला, वंदना सूफिया कटोच ने इसी तरह की तर्ज पर दिल खोलकर पोस्ट किया. उन्होने कहा कि उन्हे अपने बेटे के बोर्ड्स में 60% लाने के बाद भी उसपर गर्व है.
कटोच के पोस्ट को बहुत से लोगों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली, जिसमें कई माता-पिता भी शामिल हैं.



“दुनिया अवसर से भरी है”


अवनीश कुमार शरण के फेसबुक पोस्ट में स्पष्ट रूप से उन लोगों की मदद करने का इरादा था, जो बोर्ड परीक्षा (CGBSE) को क्लियर नहीं कर पा रहे हैं और परिवार के क्रोध का सामना कर रहे हैं, या भविष्य के बारे में निराश हैं.उनकी पोस्ट का उद्देश्य इस तथ्य पर ध्यान देना था कि दुनिया में किसी भी परीक्षा को किसी व्यक्ति के मूल्य को पूरी तरह से समझने के लिए नहीं बनाया गया है.

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