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मीडिया चुनाव के वक़्त मतदाताओं के सोच पर कितना असर करती हैं

तर्कसंगत

Image Credits: Google APIS

May 23, 2019

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आज का दौर मीडिया का दौर है जहां कहा जाता है कि अगर आपने अपना स्थान मीडिया में बना लिया तो जनता के दिलों में भी आप अपना स्थान बना ही लेंगे तभी तो चाहे वह नेता हो या अभिनेता मीडिया के मंच पर छाया रहना चाहता है, चाहे वह सोशल मीडिया हो प्रिंट हो या टेलीविजन.

सोशल मीडिया पर भी पार्टियों द्वारा आई.टी सेल का जाल बिछाया जा चुका है जो आपके व्हट्सऐप्प और फ़ेसबुक पर प्रचार प्रसार करते ही रहते हैं, जो मुश्किल से ही खबरे या मुद्दे है वे है तो अफवाहें व घृणा से भरे अपवाद हैं, जिसमे पार्टियाँ अपने प्रतिनिधियों का विशाल कद जनता के दिलों में कायम करना चाहती हैं.

अगर एक लोकतांत्रिक नज़रिये से देखा जाए तो यह खतरनाक है जब जनता की नज़रों पर फेक न्यूज़ और प्रोपेगैंडा की पट्टी बाँध उसे मुद्दो और वास्तविकता से दूर रखा जाए उसका ध्यान मुद्दों से भटकाया जाए, जनता से उम्मीद की जाए की वे चेहरे पर वोट दे ना की काम पर और इसी तरह जनता के वोट को गलत तरीके से प्रभावित करने की यह ज़िम्मेदारी मीडिया ने खूब अच्छे से निभाई है.

पार्टियाँ मीडिया पर वर्चस्व बनाए रखने के लिये तमाम पैसे खर्च करने को तैयार है और इसे सही मायनों में भारतीय राजनीति का मीडियाटाईज़ेशन कहा जाएगा, आज राजनीति में मीडिया की शक्ति और जनता के बीच उपस्थिति साफ है और मीडिया घराने अपने इस प्रभाव का इस्तेमाल जनता की राय से खिलवाड़ करने में करते हैं,अधिकतर मीडिया चैनलों की लगाम कोर्पोरेट या राजनेताओं के हाथ है और इसके कई  उदाहरण है.

मीडिया चुनावों के माहौल में दो छवियों की भिड़ंत दिखाते है और इस भिड़ंत के पीछे मुद्दे और जनता के सवाल छुप जाते हैं और वोटर अपना वोट मुद्दों और काम की जगह हावी और ज़्यादा दमदार नेता तय कर देते हैं जो की लोकतंत्र की कार्यशैली को चोट पहुँचाते हैं. जब उम्मीदवार को वोट उसके काम पर नही या उसके मीडिया उपस्थिति पर दिया जाए तो यह ईलेक्शन प्रणाली क्षति पहुँचाता है.

वोटरों को मीडिया के ज़रिये प्रभावित करना वोटर का वोट दूषित करना है. फेक न्यूज़ सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नही रहा है वह व्हट्सेप्प से निकल नुक्कड़ की चर्चाओं में जा चुके हैं और आखिरकार पोलिन्ग बूथ में अपना असर दिखाते हैं. फेक न्यूज़ एक गहरे चिंता का विषय है.

हाल ही में निर्वाचन आयोग ने एक ऐप लौन्च किया जिसमे कोशिश है की वोटर ज़्यादा से ज़्यादा अपने उम्मीदवार के कार्यों और छवि के बारे में जानकारी प्राप्त कर पाए.फेक न्यूज़ की जड़ों को मिटाने के लिये ऑल्ट न्यूज़/alt news और इंडियास्पेन्ड का factchecker.in जैसी वेबसाइटों ने सराहनीय काम किया है.

साथ ही Jaano India और mumbai votes भी लोगों तक सही व विश्वसनीय खबर और सरकारी नीतियों को पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं.

इन दिनों सच्ची व विश्वसनीय खबरों इस कमी के माहौल में जब जनता नेताओं की जातियों और मूल पर वोट डाले जा रही हो.

कुछ न्यूज़ मंच अभी भी उम्मीद जगाये हुए है,मीडिया ही अपनी विश्वसनीयता खुद सुधार सकता है तो मीडिया जनता का दायित्व सम्भाले ना की नेताओ का, उम्मीद है मीडिया की खबरों का स्तर बढ़ेगा और जनता तक काम की और मुद्दों की खबरें पहुँचेंगी जिसके आधार पर वह अपना वोट सही दिशा में डाल पाएंगे.

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