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बाल श्रम या बाल मजदूरी के बीच पिसते छोटू और मासूम गुड़ियाएं को बचाने वाले कानून

तर्कसंगत

May 31, 2019

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कई जगह,कई ढाबो कई दुकानों कई होटलों पर हमे साफ सफाई में जुटे बच्चे नजर आते है ,जिनको आमतौर पर हम या हम जैसे लोग छोटू कहकर बुलाते है, इसके अलावा घरों में छोटी छोटी बच्चियों भी काम करती नजर आती है,जिनको गुड़िया,या मुन्नी कहा जाता है. हमने कभी ये सोचा है कि इतनी मासूम उमर ये लोग क्या यही काम करने के लिए है, क्यों ये स्कूल नहीं जाते, पढ़ाई नहीं करते, क्यों काम का बोझ अपने नाजुक कंधो पर ढो रहे है ,क्यों इनको सपने देखने की उम्र में काम करना पड़ रहा है,जबकि ये तो इनको सपने देखने कि उम्र है.


जिन राज्यो में बाल श्रमिक सबसे ज्यादा है वो राज्य बिहार,उत्तरप्रदेश, मध्य प्रदेश,राजस्थान, और महाराष्ट्र है. नवीन जनगणना के अनुसार देश में 5 से 14 वर्ष की उम्र के 10.1 बिलियन बल मजदूर है, और इनमें से 80% बच्चे ग्रामीण क्षेत्र से उद्योगों और कारखानों में काम करने आते है. हमारे देश में बाल श्रम अपराध है, लेकिन फिर भी बाल मजदूर क्यों है?


निरक्षरता: ये कई कारणों से हो सकती है,क्यों की निरक्षरता का चक्र पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है,जब तक माता पिता शिक्षा का महत्व नहीं समझते जब तक बाल मजदूरी के दुषपरिणामों के बारे में माता पिता की जागरूकता नहीं बढ़ाई जा सकती,आमतौर पर मां बाप को लगता है कि रोटी कमाना ही जीवन का एकमात्र मकसद है. 
बाल श्रम वह काला धब्बा है जिसमें बच्चे अपने बचपन,अपने काबिल होने की क्षमता,अपना शारीरिक और मानसिक नुकसान करते है।

दरिद्रता: बाल श्रम का एक कारण गरीबी भी है, परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण मां बाप अपने बच्चो को बाल मजदूरी के दलदल में धकेलने के लिए मजबूर है, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत किए बिना बाल श्रम पर अंकुश लगाना दूर की कौड़ी है. 

पेशेवर: कुछ काम ऐसे है जहां वयस्क मजदूरों से ज्यादा बच्चो कि डिमांड होती है,जैसे चूड़ी उद्योग में वयस्कों के मुकाबले बाल मजदूरों को तरजीह दी जाती है,क्यों की ऐसा समझा जाता है कि बच्चो से कम पैसों में अपना मनचाहा काम करवाया जा सकता है और उनको उद्योग के हिसाब से ढाला जा सकता है. 



बाल श्रम निषेध एवं विनिमयन संशोधन अधिनियम 2016

1986 में बाल श्रम कानून की स्थापना के बाद,2016 में अधिनियम में कई संशोधित बदलाव किया गए है. अधिनियम की धारा 3 किसी भी व्यवसाय या क्रिया में बच्चो के रोजगार पर रोक लगाती है,मतलब 14 वर्ष के अंदर की आयु के किसी भी बच्चे को व्यवसाय में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. हालांकि इसके दो अपवाद भी है जैसे:

वो बच्चे जो अपने स्कूल के बाद अपने पारिवारिक व्यवसाय में मदद करते है और दूसरे वो जो खेल में या मनोरंजन जगत में अपने स्कूल को बाधित किए बिना काम करते है.

अधिनियम की धारा 3A में कहा गया है कि 15 से 18 वर्ष की आयु के किशोर को किसी भी खतरनाक व्यवसाय या प्रक्रिया में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
जैसे: खान,जवलनशील पदार्थ,विस्फोटक या अन्य खतरनाक प्रक्रिया.

 

धारा 3 या 3A के उल्लंघन करने पर अधिनियम में नियोक्ता को 6 माह से 2 वर्ष की सजा और 20000 तथा धारा 14 के तहत 50000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है.

यदि आप भी बाल श्रम कानून का उल्लघंन होते हुए देखे तो पास के पुलिस थाने में शिकायत कर सकते है।


फैक्ट्रीज एक्ट 1948

कारखाने में बच्चो को मजदूरी पर रखना अधिनियम कि धारा 67 के तहत जुर्म है।वो बच्चे जिन्होंने 14 वर्ष की आयु पूरी कर ली है,उनको भी इस शर्त पर काम करने वाली अनुमति मिल सकती है कि वो फिटनेस प्रमाण पत्र प्रस्तुत करे,जो कि माता पिता या अभिवावक द्वारा प्रस्तुत आवेदन पर सर्जन द्वारा दिया गया हो.


द माइंस एक्ट 1952

खदानों के अंदर और उसके आसपास काफी खतरा होता है,इससे कई लोगो की जान चली जाती है,इसीलिए माइंस एक्ट 1952 की धारा 40 के अनुसार बच्चो और 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों को खदान में काम करने की अनुमति नहीं है,प्रशिक्षु को देखरेख में अनुमति दी जा सकती है पर काम करने वाला 16 वर्ष से कम न हो.


किशोर न्याय अधिनियम 2015

इस कानून के अधिनियम की धारा 79 के अनुसार किसी को भी रोजगार के लिए बंधन में रखना दंडनीय अपराध है,इसके अलावा किसी भी मादक पदार्थ,शराब आदि की तस्करी करवाना भी अपराध है.


2009 के निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के लिए बच्चो के अधिकार

ये कानून बाल श्रम के बारे में बात नहीं करता बल्कि समाज की मानसिकता को बदलने के लिए सकारात्मक भूमिका निभाता है,ये बच्चो से काम करवाने कि जगह बच्चो कि पढ़ाई को अनिवार्य करने की पहल करता है।
अधिनियम की धारा 3 के अनुसार 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त शिक्षा और स्कूल जाना अनिवार्य कर देता है। यहां तक कि निजी स्कूलों में वंचित बच्चो और शारीरिक अक्षम बच्चो के लिए 25% सीटें आरक्षित करता है।
बाल श्रम आज देश की सबसे बड़ी सामाजिक समस्या है,दुनिया की सबसे बड़ी शिक्षा प्रणाली होने के बाद भी आज लाखो बच्चो के नसीब में स्कूल जाना नहीं लिखा,बल्कि वो अपने पेट को भरने के लिए बाल मजदूरी के दलदल में धंसते जा रहे है।सरकार की नीतियों को जमीन पर लागू करने,समाज में जागरूकता फैलाने और बाल श्रम जैसी बुराई से लड़ने के लिए एक बहुत ही जबरदस्त प्रयास की जरूरत है।
बाल श्रम के बारे में जानकारी के लिए और इसको समाप्त करने के लिए आप क्या कर सकते है,अपना क्या योगदान दे सकते है अपने शहर के किसी श्रम वकील से संपर्क कर सकते है।

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