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ओडिशा के इस शख़्स ने अकेले अपने दम पर राज्य में गुटखा बैन कराया है

तर्कसंगत

May 31, 2019

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इस धूम्रपान निषेध दिवस पर हम आपको बताने जा रहे हैं उस शख्स से जिसने अकेले अपने डीएम पर ओडिशा राज्य में गुटखा पान मसाला बैन करा दिया है. हम बात कर रहे हैं काजी साही, भद्रक, ओडिशा के रहने वाले मो. इमरान अली की.

इमरान ने NISWAS में सोशल वर्क में मास्टर पूरा किया और उसके बाद वे विभिन्न सामाजिक कार्यों में लगे हुए हैं. अब, वह सामाजिक कार्य विभाग, बीजेबी स्वायत्त कॉलेज के साथ-साथ इग्नू अध्ययन केंद्र में एक गेस्ट फैकल्टी है. उन्होंने अपनी स्वैच्छिक सेवा एनएसएस के साथ शुरू की, जिसने उन्हें उत्कल विश्वविद्यालय और ओडिशा सरकार द्वारा स्टेट एनएसएस अवार्ड से “बेस्ट एनएसएस यूनिवर्सिटी अवार्ड” मिला और उन्हें उनकी स्वैच्छिक सेवाओं और राष्ट्र निर्माण गतिविधियों के लिए ओडिशा सरकार द्वारा “राज्य युवा पुरस्कार” से भी सम्मानित किया गया है.

 

इमरान अली की शरुआत

इमरान ने अपने मास्टर ऑफ सोशल वर्क की डिग्री हासिल करते हुए शहर में तंबाकू के खतरे को काफी करीब से देखा है.  भुवनेश्वर में शांतिपाली झुग्गी में अपने एक क्षेत्र के दौरे के दौरान, वह 10 साल के बच्चों तंबाकू उत्पादों, विशेष रूप से गुटखा खाते देखते थे, पता करने पर उन्होनें पाया कि बाजार में तम्बाकू उत्पादों की आसान उपलब्धता और माता-पिता की अज्ञानता से बच्चों के लिए इन वस्तुओं का उपयोग करना आसान हो जाता है.  यह लत, बदले में, बच्चों के बड़े होने पर शराब और ड्रग्स जैसे अन्य बुरी लतों के लिए तैयार कर देती है.

 

 

धीरे-धीरे, उन्होंने भुवनेश्वर में नशा मुक्ति युवा संकल्प (NMYS) बनाने के लिए कुछ समान विचारधारा वाले युवाओं को एक साथ लाया, जो तंबाकू / शराब की लत और मादक द्रव्यों के सेवन के खिलाफ एक स्वैच्छिक अभियान था.समूह में लगभग 30 युवा शामिल हैं जो स्वैच्छिक आधार पर काम करते हैं. उन्होंने शहर भर के स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाकर, धीरे-धीरे योजनाबद्ध तरीके से नशाबंदी की ओर कदम बढ़ाया है.

ओडिशा में गुटखा बैन

इमरान बताते हैं कि हमने देखा कि राज्य के कई ओएमएफईडी (उड़ीसा स्टेट को ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन लिमिटेड) बूथ तंबाकू और धूम्रपान शावक में बदल रहे थे. इनमें से कई बूथों में दूध से अधिक तंबाकू उत्पाद मिला करते थे  मैं, एक दोस्त जितेंद्र कुमार साहू के साथ, ओडिशा उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की, दूध के पार्लर में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की, और उसमें सफल रहा.”

इतना ही नहीं इस जीत के साथ जोश से भरे इमरान ने मुंह के कैंसर के मामलों की बढ़ती संख्या को दूर करने के लिए राज्य में गुटखा की बिक्री और कारोबार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए अभियान शुरू किया. रिपोर्टों के अनुसार, धुआं रहित तंबाकू ओडिशा में सभी कैंसर के 40% से अधिक के लिए जिम्मेदार है. 43% से अधिक आबादी एक या दूसरे रूप में धूम्रपान रहित तंबाकू का सेवन करती है.

जब जागरूकता अभियान और ऑनलाइन अभियानों से कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं हुआ, तो उन्होंने उच्च न्यायालय में एक और जनहित याचिका दायर की. इस बार, CLAP (कमिटी फॉर लीगल एड टू पुअर) नामक एक गैर सरकारी संगठन ने उनकी मदद के लिए कदम आगे बढ़ाया. NMYS एक बार फिर सफल रहा और राज्य ने 2013 में पूर्ण प्रतिबंध लग गया.

 

विदेशों में भी प्रचार

इमरान की एक ख़ास बात और भी है कि वह कहीं भी आने जाने के लिए ट्रैन की जनरल या स्लीपर कम्पार्टमेंट का ज़्यादा उपयोग करते हैं जिससे उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से बात कर के  उन्हें नशा मुक्ति के लिए प्रेरित कर सकें.

 

 

इतना ही नहीं उन्होनें इंडोनेशिया तक में जा कर अपने इस कैंपेन के ज़रिये लोगों को तम्बाकू से दूर रखने की कोशिश की है. उनका कहना है की अगर हम आज के बच्चों को तम्बाकू के खतरनाक परिणामों के बारे में शिक्षित करेंगे तो आने वाला समय तम्बाकू रहित हो इसकी सम्भावना बढ़ जाती है.

 

 

इमरान की इस पहल में लगन इस चीज़ से भी समझी जा सकती है कि उन्होनें अपने हेलमेट और गाडी पर भी लोगों से तम्बाकू छोड़ने की अपील करने वाले मैसेज लगवा रखे हैं,  इतना ही नहीं उन्हें 19 राज्यों के 54 कम्युनिटी रेडियो के द्वारा तंबाकू निषेध कैंपेन चलाने के लिए  लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स भी दिया गया है.

 

 

इमरान अपने आप को खुशकिस्मत महसूस करते है कि उनके पास ऐसे लोग हैं जो इस तरह के कारण में योगदान देकर अपनी टीम की मदद करने को तैयार हैं. पेशेवर संपादक, वॉयस-ओवर कलाकार, कैमरामैन आदि, अपनी फिल्मों के लिए स्वयंसेवक को मुफ्त में उनकी मदद करते हैं. उन्होनें तम्बाकू के खिलाफ एक किताब भी लिखी है जिसका शीर्षक है “ब्लडी गुटखा” जिसमें वह गुटखे से होने वाली बिमारियों के बारे में जिक्र करते हुए लोगों से उस छोड़ने की अपील करते हैं.

 

 

इमरान ने तर्कसंगत से बात करते हुए कहा कि ‘नशा बंदी को सफल करना यह अपने आप में एक नशा है’ और लोगों  और सरकार के सार्थक सहयोग से उनका यह नशा और भी बढ़ता जाता है. वह हर साल हर दिन निरंतर अपने जीवन को नशामुक्ति के लिए लोगों को जागरूक करने में लगाए हुए हैं. वह विभिन्न रेडियो चैनल के माध्यम से भी लोगों में और खास कर के बच्चों में नशा मुक्ति के खिलाफ जागरूकता बना रहे हैं.

तर्कसंगत उनकी इस सोच और लगन को सलाम करता है. साथ ही ये उम्मीद करता है कि उनके आगे वाले लक्ष्यों को भरपूर सफलता मिले. उन्होंने एक तरह से अपना जीवन नशा मुक्ति को समर्पित कर दिया है, उन्हें उम्मीद भी है कि जगरुक बच्चों के कारण अगली पीढ़ी इस तम्बाकू के चंगुल से बची रहेगी, उनके इस प्रयास में उनका सहयोग करने के लिए आप तर्कसंगत के फेसबुक मैसेंजर पर संपर्क कर सकते हैं.

 

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