पर्यावरण

तमिलनाडु में 32 में से 24 जिलों में सूखा पड़ा है; खेती के लिए भी पानी नहीं

तर्कसंगत

Image Credits: Sustainability Next/One India

May 31, 2019

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इस बार की गर्मी ने हमारे देश की दक्षिणी राज्यों को अपनी जकड में ले रखा है,नतीजतन तमिलनाडु राज्य में पानी की भारी कमी देखी जा रही है.  जल संकट के लिए अधिकारियों के खिलाफ राज्यव्यापी रोष है , तमिलनाडु के तिरुनेलवेली कलेक्ट्रेट के निवास के बाहर 29 मई की रात को एक विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ जिसमें  आसपास के गाँवों के पुरुष और महिलाएँ धुप में खाली बर्तनों के साथ दफ्तर के बाहर बैठते हैं और दावा करते हैं कि कलेक्टर ने एक साल से अधिक समय से चले आ रहे जल संकट के बारे में उनकी शिकायतों का कभी समाधान नहीं किया. जैसा कि न्यूज़  मिनट ने बताया.

 

मानसून के देर से आगमन और पापनासम बांध के जलाशय के सूखने से निवासियों की चिंता बढ़ गयी है. पापनासम बांध जो तिरुनेलवेली, विरुधुनगर, और थूथकुडी जिलों को पानी की आपूर्ति करता है, निवासियों की जरूरतों को पूरा करने में विफल हो रहा है. अधिकारियों के अनुसार, बांध की जलस्तर अपनी 143 फीट की भंडारण क्षमता के मुकाबले 10 फीट (फीट) तक गिर गया है. पानी की आपूर्ति में कमी ने उन किसानों पर भारी पड़ाव डाला है जो धान की खेती पर निर्भर थे. इन तीनों जिलों के किसानों को खेती के लिए पानी की जरूरत के आधार पर पानी की आपूर्ति की जाती है। हालांकि इस साल पानी के भंडारण की कमी के कारण  किसानों ने धान की खेती के लिए उम्मीद छोड़ दी है. इन तीन जिलों के असंतुष्ट निवासियों तक पहुंचाने के लिए, पनासम बांध से 25 क्यूसेक और मनीमुथारू बांध से 2752 क्यूसेक का निर्वहन किया जा रहा है.

 

पानी का संकट केवल इन तीन जिलों में  ही नहीं है, राज्य के 32 में से 24 जिले सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं.  बिजनेस स्टैंडर्ड ने बताया कि त्रिची, नागापट्टिनम, तिरुवरूर और तंजौर जिले के डेल्टा क्षेत्र के 1,400,000 एकड़ में कावेरी के धान की खेती करने वालों के घर हैं। राज्य के धान उत्पादन में 45.4% का समावेश करने वाले इन जिलों में खेती को एक झटका लगा क्योंकि डेल्टा क्षेत्र को मेट्टूर बांध से पानी की अपर्याप्त आपूर्ति का सामना करना पड़ा.

अधिकारियों का कहना है कि कम बारिश राज्य की जर्जर स्थिति का कारण है. मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने राज्य में पानी की कमी के लिए 823.64 करोड़ रुपये रखे हैं। हालांकि, कार्यकर्ताओं और किसानों का मानना है कि यह स्थिति को हल करने के लिए पर्याप्त नहीं है. कार्यकर्ता संकट के पीछे सरकार द्वारा नियोजन की कमी को उजागर कर रहे हैं क्योंकि वे 259 tmcft (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) बाढ़ के पानी को सालाना समुद्र में बहाते हैं. जैसा कि पिछले दशक में भूजल स्तर 85% गिरा था, विशेषज्ञों का ध्यान पानी को बचाने का एकमात्र तरीका है कुशल जल भंडारण को लागू करना.

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