पर्यावरण

दिल्ली: गाज़िपुर का वो कूडे का ढेर जो 2020 में हो जाएगा ताज महल से भी बड़ा

तर्कसंगत

June 18, 2019

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अनुमान है की गाज़िपुर की यह लैंडफिल जो भारत का सबसे ऊचा कूडे का ढेर है 2020 में ताज महल की इमारत से भी ऊँचा उठ जाएगा.

पूर्वी दिल्ली में यह नज़ारा आम है जहां बाज़ जैसे कई शिकारी पक्षी कूडे के ढेर पर मन्डराते नज़र आयेंगे और इन्ही गंदी जगहों पर ही चूहे,गायें,और कुत्ते घूमते दिखाई देते हैं यह नज़ारा किसी की आंख को नही भाता. इस लैंड़फ़ील का क्षेत्र लगभग 40 फुटबॉल मैदानों जितना है और यह हर साल 10 मीटर से ऊचा बढ जाता है. पूर्वी दिल्ली के सुप्रिटेंडेन्ट इन्जीनियर के अनुसार हालांकी अभी भी इसका कद 65 मीटर (213 फीट) है.और यह अगर इसी गती से बढ़ता तह तो अगले वर्ष यह ताजमहल की इमारत से भी ऊचा हो जाएगा.

पिछले ही वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने भी चेतावनी दी कि इस ढेर के ऊपर उडने वाले विमानों को सतर्क करने के लिये लाल लाइट्स लगायी जायें.

 

कूडे के ढेर से सेहत को है कई नुक्सान

गाज़िपुर 1984 में खुला था और 2002 में यह अपनी पूर्ण सीमा तक पहुँच गया और इसी दौरान इसे बंद कर देना चाहिये था.लेकिन पूरे शहर भर से सेकड़ों ट्रकों में भर रोज़ाना ही कूड़ा आता रहा.

2018 में भारी बारिश के कारण इस विशाल ढेर के पहाड का कुछ हिस्सा गिर भी गया था जिसमे दो लोगों की जान चली गई,जिसके बाद डम्पिन्ग पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया था.लेकिन यह प्रतिबंध बस कुछ दिन ही चला क्योंकि प्रधीकारी दूसरा विकल्प नही निकाल पाये.

अक्सर ही इस ढेर से मीथेन गैस निकलने के कारण आग लग जाती है और इसे भुजाने में ही काई दिन लगते है.और जब मिथेन पर्यावरण में मिलता है तो इसके प्रभाव जानलेवा होते हैं.

और इससे एक काला और जहरीला तरल पदार्थ लिकैट भी निकलता है जो पास के नहर नालों में जाता है. ढेर से निकलने वाली ज़ेहरीली बदबू से पास के रहने वालों के लिये सांस लेना भी मुश्किल है. कई प्रदर्शन धरे के धरे रह गए और आस पास के वासी जाने लगे हैं.

“मैं जब भी इस कूडे के ढेर के आस पास से गुज़रता हूँ तो इससे आने वाली दुर्गंध असहनीय होती है.इस इलाके में जाना ही मुश्किल है,तो मै सोच सकता हूँ की वहां रहने वालों को किसका सामना करना होता होगा.”अमित बैनर्जी,दिल्ली के निवासी तर्कसंगत को बताते हैं.
“यह एक बेहद ही गंभीर मामला बन चुका है और अगर इसे जल्द ही सुलझाया नही गया तो इसके काफी दुष्प्रभाव होंगे.” कूडे के ढेर के पास ही एक रिसाइकल प्लाण्ट है जो वेस्ट को ऊर्जा में परिवर्तित करता है.अगर इसी प्रकार कूडे के जलने से ज़ेहरीली गैस निकलती रही तो वहां के निवासियों का जीवन बेहाल ही हो जाएगा.

भारतीय शहर दुनिया के सबसे बड़े कचरा उत्पादकों में से हैं,जिनमे से हर वर्ष 62 मिलियन टन कचरा पैदा होता है.सरकारी आंकड़ो के अनुसार,यह 2030 तक 165 मिलियन टन तक हो जाएगा. कूडे के ढेर,उद्योग,वाहनों से धुआ और खेती जलाने से राष्ट्रीय राजधानी के हवा अधिक मात्रा में दूषित हुई है.

2016 में ही कचरा प्रबंध नियम लागू किए गए थे,दिल्ली सरकार ने बार बार चौकीदारों,सुप्रीम कोर्ट और कार्यकर्ताओं पर ही आरोप लगाया है की वे इस समस्या से निपटने के लिये गम्भीर नही हैं.

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