मेरी कहानी

मेरी कहानी : मेरा इन सारे तकलीफ का अंत तब हुआ जब मैंने अपनी माँ से अलग होने का फैसला किया

तर्कसंगत

Image Credits: Humans Of Bombay

June 26, 2019

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“मुझे याद है कि जब मैंने 5 साल की उम्र में मेरे मामा ने मेरे साथ यौन दुर्व्यवहार किया था। यह मासूम हरकतों के साथ शुरू हुई थी, जैसे कि उनकी गोद में बैठना, गले लगना। लेकिन मैंने इसे बहुत बाद तक कभी नहीं समझा। जब मैं 5 साल की थी तब मेरे माता-पिता अलग हो गए क्योंकि मेरे पिताजी को कुछ पैसे की दिक्कत थीं। इसलिए मम्मी ने हमें छोड़कर दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहने चली गयी।
मैंने अगले 5 वर्षों तक उन्हें नहीं देखा – मैं अपने पिता के साथ लॉज में, और दूसरे लोगों के घरों में रहती थी। लेकिन जब मैं 11 साल की थी, मेरे पिताजी बीमार पड़ गए, और उन्होंने मुझे दिल्ली में मेरी माँ की जगह पर छोड़ने का फैसला किया। मैं अपने मामा के घर वापस आ गयी। वह अक्सर मुझे गलत जगहों पर छूते थे  – वह मुझे खाली कमरे में ले जाते थे|
मेरे पिताजी के दिल्ली छोड़ने के तुरंत बाद, मेरी माँ को एक दोस्त का फोन आया और उसने मेरे पिताजी की मदद करने के लिए कहा। लेकिन माँ ने मना कर दिया और उस पर अड़ी रही। तीन हफ्ते बाद, हमें खबर मिली कि मेरे पापा एक सरकारी अस्पताल में गुजर गए।
जब मैं अपने मामा के परिवार के साथ थी, तो मेरी माँ मुम्बई चली गई। इसलिए मुझ पर नजर रखने के लिए आसपास कोई नहीं था और तब उन्होनें अपना घिनौना व्यवहार जारी रखा।

हद तो तब हो गयी जब वो अपने बेटों के सामने मुझे छेड़ते थे| वे कुछ भी समझने के लिए बहुत छोटे थे, लेकिन मैं इसे अब और नहीं सह सकती थी। मैंने जाकर अपनी नानी और मम्मी को बताया – दोनों में से किसी ने भी मुझ पर विश्वास नहीं किया। उन्होंने कहा कि यह सब मेरे दिमाग में बॉलीवुड की बकवास है। वास्तव में, मेरी नानी ने मुझे मेरी माँ के दोस्त के घर पुणे में भेज दिया।

मैं इसकी उम्मीद नहीं कर रही थी, लेकिन कम से कम इससे मेरे यौन शोषण का अंत हुआ। मैं उसके साथ 4 साल तक रही, लेकिन वो समय भी आसान नहीं था। वह मुझे सफाई और घर के कामों में लगा देती, यहाँ तक कि अपने बेटे को भी स्कूल पहुँचाने के लिए कहती। इसलिए मैंने मुंबई भागने का फैसला किया। मेरे पास बस का किराया भी नहीं था, लेकिन मेरे दोस्तों ने मेरे लिए 300 रुपये जमा करे के दिए।
लेकिन मेरा इन सारे तकलीफ का अंत तब हुआ जब मैंने अपनी माँ से अलग होने का फैसला किया। मुझे उसी मामा का फोन आया और वो मुझसे पूछ रहे थे कि मैं बाहर क्यों जा रही हूं? और जब उन्होनें कहा, ‘मुझे पता है कि तुम इस तरह क्यों हो, क्योंकि मैंने तुम्हारा बचपन बर्बाद कर दिया है’, और इसके लिए माफी मांगी। मैंने उन्हें कभी माफ़ नहीं किया – मैं कैसे कर सकती थी ?
उन्होनें जो मेरे साथ किया मैं उसकी हक़दार नहीं थी – कोई भी बच्चा ऐसा कुछ पाने का हकदार नहीं है। उन्होनें मुझे सिर्फ 5 साल की उम्र में ही सबसे अलग कर दिया, और आज, मैं वही हूं जो मैं हूं क्योंकि मैं खुद से अपने घाव को भरने देने का मौका दिया। मेरे दर्द ने मुझे कमजोर नहीं बनाया, इसके बजाय, इसने मुझे सबसे मजबूत बना दिया। ”

 

स्रोत :

*TRIGGER WARNING*“I remember being sexually abused by my uncle when I was 5. It began with innocent things like sitting…

Posted by Humans of Bombay on Tuesday, 25 June 2019

 

 

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