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“बीमारी से अधिक प्रशासनिक विफलताओं ने लोगों को मारा”: बिहार इंसेफेलाइटिस पीड़ितों पर बोले डॉ कफील खान

तर्कसंगत

June 27, 2019

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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बिहार राज्य में इंसेफेलाइटिस के कारण 150 से अधिक बच्चों की मौत हुई है और हर दिन मरने वाले बच्चों की संख्या बढती जा रही है. इस बीमारी के कारण राज्य में साल दर साल कई मौतें हुई हैं.

 

 

2014 में, एक समान प्रकोप में, लगभग 379 बच्चों की मृत्यु हुई और तब भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने मुजफ्फरपुर में 100 बिस्तरों वाले आईसीयू का वादा किया था. यह वादा, दुर्भाग्य से, अभी भी पूरा नहीं हुआ है. इस साल फिर से डॉ. हर्षवर्धन ने इसी तरह के वादे किए हैं.

वर्तमान स्थिति ने पूरे देश का ध्यान खींचा है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग(नैशनल ह्यूमन राइट्स कमिशन)ने भी केंद्र और राज्य सरकार को “स्वास्थ्यसेवा प्रणाली की कमियों और अपर्याप्तताओं” के लिए नोटिस भेजे हैं.

 

 

उत्तर बिहार में सेवा कर चुके एक डॉक्टर ने तर्कसंगत को बताया कि बुनियादी ढांचा बहुत खराब है. “कोई पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं. डॉक्टरों की समय पर नियुक्ति नहीं की जाती है और वे उपलब्ध कर्मचारियों के साथ काम कर रहे हैं.”

गोरखपुर बीआरडी अस्पताल त्रासदी जहां 60 से अधिक बच्चों क ऑक्सीजन की कमी से मौत हुई थे उस हादसे के बाद 2017 में सुर्खियों में आने वाले डॉ कफील खान, अब बीमारी से प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए मुजफ्फरपुर गए हैं. वह मुज़फ़्फ़रपुर के आसपास के विभिन्न गाँवों में शिविर लगा रहे हैं और सेवा कर रहे हैं.

 

” ख़राब डॉक्टर:पेशेंट रेशियो

तर्कसंगत के साथ बातचीत में, डॉ कफील खान ने कहा, “मैं उन परिवारों की मदद करने के लिए मुजफ्फरपुर आया हूं जो प्रभावित हैं. चूंकि मैं उन अस्पतालों में नहीं जा पाऊंगा जो उन्हें उपचार प्रदान कर रहे हैं, हम परिधीय क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और जागरूकता शिविर आयोजित कर रहे है और उन्हें सलाह के साथ उन्हें दवा भी दे रहे हैं और गंभीर मामलों का मेडिकल अस्पतालों में उल्लेख कर रहे हैं.

 

राज्य में स्वास्थ्य सेवा की स्थिति के बारे में बात करते हुए डॉ कफील खान कहते हैं कि इस बीमारी से ज्यादा बच्चों की मौत प्रशासनिक विफलता से हुई है.

“अस्पतालों की स्थिति बहुत खराब है, बुनियादी ढांचे की गंभीर कमी है, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्स और उपकरणों में भी भारी कमी है, बहुत सारे मरीज हैं. वास्तव में, एक अस्पताल में, एक बड़ा हॉल है जिसमें सैकड़ों बीमार बच्चे हैं, उच्च तापमान परेशानी और बढा रहा है.

 

 

230 बच्चों के लिये सिर्फ 4 ही आईसीयू हैं और डॉक्टर पर बहुत बोझ है डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों के अनुसार, डॉक्टर: रोगी का रेशियो 1: 4 होना चाहिए, लेकिन यहां रेशियो स्पष्ट रूप से बिगड़ चुका है, रोगी के रेशियो में नर्स 1:60 है जबकि आदर्श रूप में, यह 1: 2 से अधिक नहीं होना चाहिए,” डॉ खान ने कहा.

 

 

डॉ. कफील खान ने जो कदम उठाए, उन पर कहा, “मरने वालों की संख्या 150 से अधिक बताई गई है, लेकिन यह केवल उन बच्चों की है जिनकी मृत्यु अस्पतालों में हुई है, बहुत से बच्चों की मौत गाँव से अस्पताल के बीच आवागमन के दौरान हुई है जिसे दर्ज ही नहीं किया गया, मैंने परिवारों से बात की है, उनमें से सभी गरीब हैं और उन्होंने इसकी पुष्टि की है.मेरा मानना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोगी और मेडिकेयर के बीच पहला संपर्क हैं,यह बहुत महत्वपूर्ण है कि लक्षणों को पहले चरण में पहचाना जाए और बहुत देर होने से पहले अस्पताल में भेजा जाए जो पीएचसी बहुत अच्छी तरह से कर सकता है. हमें इसके लिए और पीएचसी की जरूरत है.”

 

 

अपने बिदाई नोट में, वह कहते हैं कि सबसे ज्यादा प्रभावित सबसे गरीब हैं, उनका कहना है कि सरकार, अस्पतालों के विशेषज्ञों को यहाँ लाए, यहां तक कि जरूरत पड़ने पर मरीजों को दिल्ली स्थानांतरित करना चाहिए.

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