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जूही और बॉबी रमानी ने अक्षम लोगो के लिए “डिफरेंटली एबल्ड” रेस्त्रां की एक चेन की शुरुआत की है

तर्कसंगत

June 28, 2019

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जूही और बॉबी रमानी बहनों के लिए, ऑटिज़्म  के बारे में जागरूकता पैदा करने से ज्यादा कुछ भी महत्वपूर्ण कुछ नहीं है, और अब वे बैंगलोर और लखनऊ में रेस्त्रां को उनके लायक बनाने के मिशन पर हैं।

जूही और बॉबी रमानी ने अक्षम लोगो के लिए “डिफरेंटली एबल्ड” रेस्त्रां की एक चेन की शुरुवात की है. अपने भाई से ही प्रेरित होकर उन्होंने अक्षम लोगो के लिए सोचना शुरू किया कि. जब इस तरह के बच्चे अपने परिवार के साथ कहीं पर या किसी रेस्टोरेंट में खाने के दौरान असामान्य हरकते करते है तब उस परिवार के लिए बड़ी ही असहज स्थिति हो जाती है,तब इस मुश्किलें निपटने के लिए डिफरेंटली एबल्ड रेस्त्रां शुरू करने का विचार आया.

 

 

अब जूही और बॉबी के लिए, इस तरह ऑटिज़्म से ग्रसित लोगो के बारे में जागरूकता पैदा करने से ज्यादा कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है, और साथ ही अब वे चाहती है कि बैंगलोर और लखनऊ में भी इसी तरह के रेस्त्रां बनने चाहिए.

“आई सपोर्ट फाउंडेशन” उनका NGO है जिसकी सहायता से वो बच्चों और सीखने में अक्षम लोगों की मदद करने का प्रयास करती है, उन्होंने हाल ही में रेस्त्रां और कैफे में डिफरेंटली एबल्ड लोगों और उनके परिवारों के लिए परेशानी मुक्त अनुभव करवाने की पहल की है तर्कसंगत से बात करते हुए, जूही रमानी ने कहा कि अलग-अलग हैसियत वाले लोग अपने परिवार के साथ विभिन्न रेस्त्रां में जाते हैं, जहां अक्सर उनके साथ-साथ परिवार के लिए भी एक असहज स्थिति बन जाती है, तब बड़ा ही मुश्किल समय होता है.

 

 

अपने स्वयं के अनुभवों के बारे में याद करते हुए जूही वो वजह बताती है कि जिसने उन्हें इस पहल को शुरू करने के लिए प्रेरित किया, मेरा भाई, जो ऑटिस्टिक है, रेस्त्रां में अन्य टेबलों से भोजन लेता था, हालांकि यह व्यवहार ऑटिस्टिक लोगों के बीच असामान्य नहीं है समाज में बहुत सारे अक्षम लोग है, जिनके बारे में समाज में अलग अलग धारणा है, पर लोगो को मानसिक विकलांगता और शारीरिक विकलांगता के बारे में पूरी तरह पता नहीं है.

डिफरेंटली एबल्ड अवेयरनेस के बारे में लोगों को जागरूक करने और डिफरेंटली एबल्ड बच्चों के माता-पिता के लिए बिना परेशानी का अनुभव देने के लक्ष्य के साथ आई सपोर्ट फाउंडेशन कैफे और रेस्त्रां के कर्मचारियों को शिक्षित करने के मिशन की अगुवाई कर रहा है जो उन लोगों की सहायता कर सकते हैं, जो अपने रेस्त्रां में काम कर सकते हैं.

 

 

पिछले एक साल से, फाउंडेशन ने बैंगलोर और लखनऊ में 15 ऐसे भोजनालयों को सफलतापूर्वक बदल दिया है जैसे  चुंग वाह, पेट्टो, बकासुर, चटपटा भारत, ट्रीट इन बैंगलोर और कैफे बेवज़ह, द चेरी ट्री कैफे, द रेड ट्रक इन लखनऊ ये कुछ रेस्त्रां है जिन्हें फाउंडेशन ने अक्षम लोगो के लिए सोशल फ्रेंडली रेस्त्रां में बदल दिया है.

 

 

अपने काम करने के तरीके के बारे में जूही ने कहा, “हम प्रपोजल के साथ रेस्त्रां पहुंचते हैं, जिसके बाद हम वहां के कर्मचारियों को एक घंटे में इसके बारे में बताते है कि कैसे वे अपनी रेस्त्रां में आने वाले  ऑटिस्टिक बच्चे और उनके परिवार के लिए बेहतर और अधिक आरामदायक बना सकते हैं. इसके पूरा होने पर, हर रेस्त्रां को पीले रंग का स्टिकर मिलता है जो इस बात का प्रतीक है कि यहां पर रेस्त्रां आपके अनुकूल है बल्कि फ्रेंडली भी है, इसके बारे माता-पिता को पता चलेगा और वो भी वहां सहज महसूस करेंगे.

 

 

भले ही यह पहल वर्तमान में बैंगलोर और लखनऊ के कुछ हिस्सों तक सीमित है, जूही जल्द ही इसे अखिल भारतीय स्तर पर ले जाना चाहती हैं, और अधिकांश सार्वजनिक स्थानों को अलग तरह के अक्षम लोगो के लिए अनुकूल बनाना चाहती है.

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