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जीएसटी की दूसरी वर्षगांठ पर अरुण जेटली: 12% और 18% स्लैब का एक दर में विलय संभव

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Image Credits: NDTV

July 2, 2019

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1 जुलाई को भारत में माल और सेवा कर (GST) की दूसरी वर्षगांठ को पूरा किया. जीएसटी के पिछले दो वर्षों में एक फेसबुक पोस्ट में, पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे “दुनिया की सबसे बड़ी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में से एक का पुनर्गठन” कहा, और इसके कार्यान्वयन और विश्लेषण करने के लिए पिछले दो वर्षों में GST का प्रभाव / परिणाम पर एक नज़र डाली.”

 

अप्रत्यक्ष कर

जीएसटी से पहले टैक्सेशन प्रणाली के बारे में बात करते हुए, जेटली ने लिखा कि पहले केंद्र और राज्य, दोनों माल और सेवाओं पर अप्रत्यक्ष कर लगाने के लिए स्वतंत्र थे.

इसके परिणामस्वरूप एक व्यापक प्रभाव पड़ा जिसका अर्थ था कि उपभोक्ता को बहुत अधिक मात्रा में छिपे हुए करों का भुगतान करना था. उदाहरण के लिए, कुछ मामलों में, राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला मनोरंजन कर 110% था. इसने उपभोक्ताओं की जेब पर काफी चोट पहुँचाई, जिसके परिणामस्वरूप जटिल कर कानूनों का पालन नहीं किया गया.

उन्होंने यह भी कहा कि कारोबारियों के लिए यह समस्याग्रस्त था क्योंकि कारोबारियों को “कई रिटर्न दाखिल करने थे, कई टैक्स इंस्पेक्टर से भी जूझना पड़ता था और इसके अतिरिक्त काम भी धीमे गति से होता था – ट्रक पूरी तरह से राज्य की सीमाओं पर हफ़्तों तक फंसे रहते थे,” उन्होंने लिखा.

इनडायरेक्ट टैक्सेशन को रिग्रेसिव (प्रतिगामी) कहते हुए, जेटली ने कहा कि इसके कारण से अमीर और गरीब ने विभिन्न वस्तुओं पर एक ही टैक्स का भुगतान किया.

उन्होंने कहा कि डायरेक्ट टैक्स , जो  प्रोग्रेसिव (प्रगतिशील) टैक्स है, ने सुनिश्चित किया है कि “आप जितना अधिक कमाते हैं, उतना ही अधिक भुगतान करते हैं,” जिससे “आम आदमी” के विभिन्न आर्थिक स्तरों में असमानता कम होती है.

 

 

GST का प्रभाव

जीएसटी के व्यापक कामकाज के बारे में बताते हुए जेटली ने लिखा कि यह ” सत्रह अलग-अलग कानूनों को मिलकर एक अकेला कानून बनाया गया. ”

इस तथ्य के समर्थन में कि जीएसटी के परिणामस्वरूप व्यवसायों में उच्च अनुपालन हुआ है, जेटली ने कहा कि “पिछले दो वर्षों में टैक्स भरने वालों का आधार 84% बढ़ा है. GST द्वारा कवर किए गए मूल्यांकनकर्ताओं की संख्या लगभग 65 लाख थी. आज, वे 1.20 करोड़ हैं.”

उन्होंने जीएसटी लागू होने के कारण राजस्व घाटे और लाभ के बीच तुलना की. जबकि विभिन्न वस्तुओं की लागत में कमी से लगभग Cr 90,000 करोड़ का वार्षिक नुकसान हुआ, कार्यान्वयन के एक वर्ष के भीतर राजस्व लाभ 2017-18 में 89,700 करोड़ से लगभग 10% प्रति माह था, जो कि अगले वर्ष 97,100 करोड़ रहा.

वित्त मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अप्रैल 2019 के लिए जीएसटी राजस्व संग्रह जीएसटी लागू होने के बाद सबसे अधिक दर्ज किया गया था. महीने के लिए कुल राजस्व1,13,865 करोड़ था जो पिछले साल के इसी महीने में एकत्र राजस्व से 10% अधिक है.

जेटली ने कहा कि सकारात्मक प्रभाव इस तथ्य के माध्यम से देखा जा सकता है कि “पहले ही वर्ष के बाद, बीस राज्य स्वतंत्र रूप से अपने राजस्व में 14% से अधिक की वृद्धि कर रहे हैं और उनके मामले में क्षतिपूर्ति निधि आवश्यक नहीं है.”

उन्होंने उपभोक्ताओं को होने वाले लाभ के बारे में बात करते हुए लिखा, “[जीएसटी] ने न केवल मुद्रास्फीति की जाँच की, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि आम आदमी उत्पादों पर अत्यधिक कर नहीं लगाया जाए. उदाहरण के लिए, एक हवाई चप्पल और एक मर्सिडीज कार पर एक ही दर से कर नहीं लगाया जा सकता है.”

“उपभोक्ता उपयोग की अधिकांश वस्तुओं को 18%, 12% और यहां तक कि 5% श्रेणी में लाया गया है. सिनेमा टिकट पर पहले 35% से 110% कर लगता था, अब इसे 12% और 18% तक लाया गया है. दैनिक उपयोग की अधिकांश वस्तुएं शून्य या 5% स्लैब में हैं, ”उन्होंने कहा.

 

असमानताओं को संबोधित करना

जीएसटी के उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ के उचित पुनर्वितरण के उद्देश्य के साथ जेटली ने लिखा, “पिछले दो वर्षों में जीएसटी परिषद की प्रत्येक बैठक ने उपभोक्ताओं पर कर संग्रह में सुधार के साथ कर बोझ को कम किया है.”

उन्होंने कहा, “जो लोग एक ही स्लैब जीएसटी के लिए तर्क देते हैं, उन्हें एक ही स्लैब शुरू करने के मुद्दे को संबोधित करना चाहिए कि एक स्लैब केवल अत्यंत संपन्न देशों में ही संभव है जहां कोई गरीब लोग नहीं हैं.”

उन्होंने कहा, ” जिन देशों में गरीबी रेखा से नीचे बड़ी संख्या में लोग हैं, वहां एकल दर लागू करना आसान नहीं होगा.”

भविष्य की संभावनाओं के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि “यह सुझाव देना ज़रूरी नहीं है कि स्लैब के युक्तिकरण की आवश्यकता नहीं है. वह प्रक्रिया पहले से ही चालू है. विलासिता के सामान को छोड़कर, 28% स्लैब को लगभग समाप्त कर दिया गया है. शून्य और 5% स्लैब हमेशा बने रहेंगे.”

उन्होंने आगे कहा कि “राजस्व बढ़ने के साथ, यह नीति निर्माताओं को 12% और 18% स्लैब को एक दर में विलय करने का अवसर देगा, इस प्रकार, जीएसटी को प्रभावी रूप से दो-दर वाला  टैक्स बना देगा.”

 

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