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एक महिला के संघर्ष की दास्तान, जो अपनी असाधारण जीवटता की वजह से सांसद बनी

तर्कसंगत

July 2, 2019

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एक बालिका वधू और आंगनवाड़ी रसोइए से शुरू हुई उड़ीसा की एक महिला किसान की सांसद तक की यात्रा सफलता और जीवटता कि कहानी बयां करती है.

दिल्ली में संसद मार्ग के रास्ते में एक असाधारण महिला के कदम पड़े है जो अपनी क्षमताएं कई बार साबित कर चुकी है, हम बात कर रहे है उड़ीसा की नव निर्वाचित सांसद की जो एक 68 वर्षीय किसान महिला है जिनको लोकसभा 2019 के लिए उड़ीसा वासियों ने संसद में चुनकर भेजा है.

प्रमिला बिसोई उड़ीसा के अस्का निर्वाचन क्षेत्र से बीजू जनता दल (बीजद)की सांसद हैं, जिन्होंने मुख्यधारा की सभी मीडिया की सुर्खियों से दूर रहकर अपने निर्वाचन क्षेत्र के बिना किसी उल्लेखनीय विशेषताओं वाले गावों में अविश्वसनीय विकास किया है. पिछले दो दशकों में प्रमिला ने विकास के लिए असाधारण योगदान दिया, जिसने कुल 55% वोटो के साथ 2019 लोकसभा चुनाव में उनकी जीत की नींव रखी.

आज, चर्मरिया गाँव की हर किसी की प्रिय मौसी को राजनीतिक सम्मान प्राप्त हैं ग्राम विकास के कार्यकारी निदेशक, लिबी जॉनसन का कहना है मैं प्रमिला को 2000 के दशक से जानता हूं जब उड़ीसा सरकार ने एक विकास परियोजना शुरू की थी “मिशन शक्ति” इसके तहत चर्मारिया में स्व सहायता समूह से अपना सफर शुरू करने वाली प्रमिला गावों के हर आंदोलनों में सबसे आगे रही,फिर वो चाहे पानी की आपूर्ति हो वनी करण हो या सभी के लिए शौचालय हो.

 

एक साधारण किसान प्रमिला

प्रमिला एक किसान है, जिसके पास मात्र एक एकड़ जमीन है, पाँच साल की उम्र में शादी होने के कारण उनको बाल वधू भी बनना पड़ा, उनकी स्कूली शिक्षा कक्षा 3 तक पहुंच कर समाप्त हो गई आंगनवाड़ी में खाना बनाने पर उनको आय होती थी, ठीक उसी वक़्त उन्होंने स्थानीय स्व-सहायता समूह में भाग लेना शुरू कर दिया और जल्द ही अपने उत्कृष्ट नेतृत्व कौशल और एक अदम्य धैर्य के लिए पहचानी जानें लगी. चर्मारिया और आसपास के गांवों के निवासियों के लिए, प्रमिला पिछले 18 वर्षों से एक सच्ची संरक्षक और उनकी मौसी है.

 

पुरषों से सहयोग न मिलने पर महिलाओं को साथ लिया

जब उन्होंने महिलाओं को बदलाव लाने के लिए इकट्ठा किया तब पुरुषों ने उनका मजाक उड़ाया, इन पिछड़े गाँवों के पुरुष पाइप लाइन या टॉयलेट निर्माण जैसी प्रगतिशील परियोजना के प्रति उदासीन होते हैं. प्रमिला बताती है कि आखिरकार इन मुद्दों पर कैसे उन्होंने जीत हासिल की, प्रतिदिन मीलों पैदल चलकर नदी से पानी लाना महिलाओं के लिए थकाऊ काम था खासकर चिलचिलाती गर्मियों के दौरान, इधर पानी की कमी से फसलों को भी नुकसान हो रहा था इसलिए, स्वाभाविक रूप से, सभी महिलाओं ने गांव के अंदर उचित जलापूर्ति की मांग की लेकिन पुरुषों ने पाइप से पानी की आपूर्ति के लिए हमारा मजाक उड़ाया.

प्रमिला अपनी मांगो पर दृढ़ रही, पुरुष आंदोलन में शामिल होने के लिए तैयार नहीं थे, इसलिए उन्होंने सिर्फ महिलाओं के साथ बैठकें कीं कुछ निष्कर्ष पूर्ण बैठकों के बाद, पुरुषों ने अपना विचार बदल दिया और प्रमिला के शानदार प्रयासों के कारण इनका साथ देने का फैसला किया आखिरकार, नतीजे में चर्मारिया के हर घर में पानी के नल और टैंक थे, सिंचाई के लिए पानी की भी व्यवस्था की गई थी स्वच्छता के मुद्दे पर लगभग सबने काम किया अस्का में लोग अब आराम से शौचालय का उपयोग कर रहे हैं जिसका पूरा श्रेय प्रमिला को जाता है.

 

प्रमिला ने अकेले बदलाव की पहल की

लिबी जानसन बताते है कि कैसे प्रमिला ने गाँव की महिलाओं को लामबंद करने में नेतृत्व संभाला और आगे विकास की ध्वजवाहक बनी “हमारे गाँव में एक तरफ नदी थी और दूसरी तरफ एक बंजर, पथरीला पहाड़, जिसपर पर्याप्त पेड़ नहीं थे. हम अधिक से अधिक पेड़ों के लिए दृढ़ थे, प्रमिला बताती है वह अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए प्रशासनिक हल्के में से किसी को भी बुलाने में संकोच नहीं करती थी प्रमिला के बुलाने पर जिला वन अधिकारी, वन रेंजर और अन्य अधिकारियों ने बैठक के लिए तुरंत अपना समर्थन देने के लिए सहमति दी. बैठक के बाद उन्हें बीज और पौधे मिले, तब पुरुषों और महिलाओं ने वृक्षारोपण किया, अब, चर्मारिया के पास खुद पर स्वाभिमान करने के लिए एक उचित कारण है जब उड़ीसा के मुख्यमंत्री ने उन्हें एक महत्वपूर्ण संसदीय क्षेत्र में बड़े बड़े दिग्गजों से ऊपर स्थान दिया, तब प्रमिला के उत्थान की कहानी कितनी अभूतपूर्व है ये पता चला, कि कितनी ही बार विकास की असाधारण पहल के लिए उनको सम्मानित किया गया है.

विपक्ष ने उनकी शैक्षिक और सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाकर उन्हें गिराने करने की कोशिश की, लेकिन जिन नागरिकों ने अपनी मौसी के संघर्ष को देखा, उनके लिए ये बातें कोई मायने नहीं रखती थी और नतीजा सामने है, क्योंकि प्रमिला यकीनन दुनिया की सबसे बड़े लोकतंत्र की प्रतिष्ठित सीट पर अपनी जगह बनाने में कामयाब रही है.

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