मेरी कहानी

मेरी कहानी : मैं कैंसिल फूड ऑर्डर को गरीब बच्चो में बांट देता हूँ और उन्हें पढ़ाता भी हूँ

तर्कसंगत

July 2, 2019

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ये बात चार साल पहले की है जब में दमदम कैंटोनमेंट के पास गलियों से गुजर रहा था, जब एक लड़का दौड़ता हुआ आया और मेरे पैरों पर गिरकर भीख मांगने लगा. मुझे लगा कि शायद वह नशे का आदी है और उसे पैसे देना पैसा बर्बाद करना है, मैंने उसे मना किया लेकिन वह इतनी दयनीय और आक्रामक हालत में पैसे मांग रहा था कि मैंने उसे एक थप्पड़ जड़ दिया.
मैं जोमाटो के साथ फूड डिलीवरी करता हूं लेकिन दमदम छावनी और पूरे बंगाल में नवोदित युवाओ के लिए, मैं एक बड़ा भाई हूं..

मेरी कहानी वहीं से शुरू होती है

लड़के को थप्पड़ मारने के बाद, मैंने उसे दिलासा दिया, तब उसने बताया वह नशे में नहीं है लेकिन उसकी मां उसे भीख मांगकर पैसे लाने के लिए मजबूर करती है, उसने बताया कि अगर वह जिस दिन शाम को बिना पैसे के घर जाएगा तो उसकी मां उसे मार डालेगी. थोड़े दिनों बाद जब वह डेंगू से ग्रस्त हुआ और अस्पताल ने उसका व्यक्तिगत विवरण मांगा, तो उसकी माँ को भी बच्चे के पिता के नाम याद नहीं था क्यूं कि जन्म से पहले ही उन्हें छोड़ गया था.

यह लड़का इस तरह जीने वाला अकेला नहीं था मुझे पता चला कि रेलवे स्टेशन के आसपास कई अन्य बेघर बच्चों का भविष्य भी इसी तरह अंधकारमय है उनमें से किसी ने भी स्कूल के अंदर कदम नहीं रखा था. बच्चो के परिवार के बड़े लोग नशे के आदी, भीख मांगने और यहां तक ​​कि छोटे आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे. जबकि छोटे बच्चे पूरे दिन सिर्फ खेलते रहते और बड़े होकर अपने बड़े लोगो के जैसे ही अपराध के काम में जुट जाते.
जल्दी ही मैंने प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर एक चटाई और 17 बच्चो को लेकर शाम का एक स्कूल शुरू किया, जिसमें जल्दी ही 27 बच्चे शामिल हो गए, हम इन बच्चो को मूल बाते सिखाते है, उनमें से कई अब सरकारी स्कूलों में जाने लगे है.

इनमे भी ज्यादातर अनाथ है, जिन्होंने घर परिवार के प्यार और देखभाल को कभी नहीं जाना और कुछ ऐसे परिवारों से हैं जिनमें माता पिता तो हैं, पर बिखरे हुए, यानि अलग अलग, में हमेशा इस बात की वकालत करता हूं कि उनको शिक्षा मिले.
पर हकीकत ये है कि उन्हें अपने परिवार को चलाने के लिए धन की जरूरत है इसलिए मैंने बच्चों के लिए छोटे स्टालों और उपक्रमों की व्यवस्था की है, जहां वे मजे से स्कूल के बाद जूस, नींबू पानी, पानी की बोतलें बेचकर काफी कुछ कमाते हैं उनके लिए ये ज्यादा शारीरिक श्रम भी नहीं है.
मैं वन-आश्रित समुदायों के साथ-साथ उत्तरी बंगाल के नक्सलबाड़ी, अलीपुरद्वार में, ग्रामीण सुंदरबन में रहा हूं, बेलपहाड़ी या टोटोपारा जैसे आदिवासी गांव जो उच्च गरीबी दर के लिए सुर्खियों में हैं, इसलिए इन चार सालों के दौरान मैने शिक्षा पर ही जोर दिया है.

यहां हम बच्चो को स्कूल के दाखिल करवाने में मदद और उनको स्टेशनरी, यूनिफॉर्म तथा दवाई किट भी देते है साथ ही साथ इन जगहों पर साल में दो तीन बार ड्राइव भी आयोजित करते हैं.
शुरू में मेरी नौकरी कोलकाता नगर निगम में थी, अपना सारा समय बच्चो को देने के लिए मैंने नौकरी छोड़ दी लेकिन, मुझे अपना परिवार भी चलाना है, इसलिए पिछले साल जुलाई के आसपास मैंने जोमाटो में काम करना शुरू किया.

 


इस दौरान मैंने दमदम में एक दयालु रेस्तरां के मालिक के साथ दोस्ती की, जो बच्चो के बारे में जानने के बाद मेरी टीम में जुड़ा. अब, ज़ोमैटो ग्राहकों द्वारा कैंसिल ऑर्डर का खाना और उनके रेस्तरां का बचा खाना बच्चों को नाश्ते और कभी-कभी रात के खाने के लिए मिलता है.

रोल काकू के नाम से प्रसिद्ध, वह सज्जन बच्चों के लिए दावत की व्यवस्था भी करते है, वह सज्जन पब्लिसिटी से दूर रहना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने मुझे कसम दिलाई है कि मैं उनका नाम या उनके रेस्तरां का नाम जनता के सामने कभी नहीं बताऊं.

आम तौर पर, जब कोई ग्राहक खाने का ऑर्डर रद्द करता है, और जो रेस्तरां खाना तैयार कर चुका होता है, उसे रिफंड मिल जाता है और रेस्तरां के मालिक डिलीवरी वालों को ही खाना खिलाते हैं.

यदि डिलीवरी वाला खाना लेकर रेस्तरां से निकल चुका और ऑर्डर रद्द हुआ है तो zomato अपने डिलीवरी बॉय को खाना अपने घर या किसी गरीब को देने का बोलता है.

ज़ोमैटो ने भी एक NGO फीडिंग इंडिया के साथ साझेदारी की है जिसमें कैंसिल ऑर्डरों वाला खाना स्थानीय आश्रय घरों, अनाथालयों, वृद्धाश्रमों, विशेष रूप से विकलांग और समान संस्थानों के लिए केंद्रों को दिया जाता है.हम जैसे डिलीवरी बॉयज को भी दान करने के निर्देश दिए जाते है. मेरे क्षेत्र में हमें सेंट मैरी अनाथालय को दान करने का निर्देश दिया गया है जो हम करते हैं.

मैं चाहता हूं कि यह प्रयास बड़े पैमाने पर जारी रहे क्यो की हर दिन रेस्तरां से बहुत खाना बर्बाद होता है और इसका 1% भी इन भूखे बच्चों तक नहीं पहुंचता.

मैं सभी रेस्तरां मालिकों, खाना डिलीवर करने वाले लोगों और खाना डिलीवर करने वाली कंपनियों से अपील करता हूं कि अपने पड़ोस में असहाय और भूखे लोगों तक ये खाना पहुंचा दिया करे,ताकि बचा हुआ खाना किसी कि भूख को शांत कर दे.

 

कहानी : पथिकृत साहा

अगर आप भी इनकी मदद करना चाहते हैं तो 9804788406/9123348301 पर संपर्क करें 

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