मेरी कहानी

मेरी कहानी: मेरी सह-यात्री ने कैब सीट पर पीरियड का दाग छोड़ा था मगर ड्राइवर ने हँसते हुए इसे साफ किया

तर्कसंगत

July 3, 2019

SHARES

“कुछ दिन पहले मैंने एक शेयर-कैब की, जैसे ही मैं अपनी सीट पर बैठी, मैंने, सामने की सीट पर एक व्यक्ति को देखा, उसकी घड़ी और आईफोन देख के उसकी दौलत झलक रही थी साथ ही, तीखे नैन नक्श और हल्की दाड़ी भी थी. वह फर्राटेदार अंग्रेजी में बात किये जा रहा था. “पक्का इंग्लिश मीडियम का होगा मैंने सोचा. जल्द ही, अगला पिकअप पॉइंट आ गया. जो महिला बैठी वह काफी सतर्क और काफी असहज लग रही थी, मैं काफी देर तक उसे अपनी सीट पर बेवजह हिलते हुए महसूस कर सकती थी. फिर किसी भी ‘जिम्मेदार’ टीनएजर की तरह, मैंने अपने इयरफ़ोन कानों में लगाये और सो गयी.

“इनको तो बस गंदगी  फैलानी होती है हर जगह.,”मैं आगे की सीट पर बैठे हुए उस नौजवान को यह कहते हुए सुनकर चौंक गई.

“ऐसे पब्लिक कार में दाग छोड़कर गई, शर्म है भी या नही”

मैंने अपनी जींस को ध्यान से चेक किया. यह मेरे पीरियड्स का 5 वां दिन था. तो यह मुझसे नही हुआ था और फिर मैंने अपना सिर घुमा लिया, लाल दाग मेरी सीट के बाज़ू में लगा था. यह ठीक वहीं था जहाँ दूसरी महिला कुछ समय पहले बैठी थी, मैं अभी भी उसको दूर भीड़ में गुम होते देख सकती थी. मुझे याद है उसने कैब का इंतज़ार करते हुए अपने बैग को अपने कूल्हों के करीब से जकड़ कर रखा था.

आगे की सीट वाला लड़का अभी भी चिल्ला रहा था.

“देवी मैया की पूजा चढ़ाने जा रहे थे..पता नही क्या आफत आ गई और शेयर कैब बुक कर लिया. अब पूरी गाड़ी खराब हो गई. हमको तो यही उतार दीजिये भईया.”

उसके बाद वह आदमी कार से उतर गया, जो ड्राइवर अब तक चुप था और वह नीचे उतर गया और पीछे मेरे बगल वाला दरवाजा खोल दिया. मैं सर्दी की उस सुनसान सड़क पर गाड़ी में अकेले बैठी थी. मुझे डर लगा और ड्राइवर की नियत पर शक़ भी हो रहा था यह सिर्फ 6 बजे था, लेकिन ठंडी दिसंबर हवाओं का धन्यवाद.

“बस दो मिनट मैडम ,” वह नीचे झुका और एक नम कपड़े से खून के दाग को साफ करने लगा. मैंने राहत की सांस ली.

“भैय्या, एक बात बताइयें, आपको सच में अजीब नही लगा, आपकी गाड़ी में दाग लगा और आप मिटाये उसे खुद.“ मैने किराया देते समय पूछा. ड्राइवर मुस्कुराया.

“मैडम हमारे घर में औरते हैं. हमसे ज़्यादा अजीब तो वो मैडम को लग रहा होगा. उनकें बस में होता तो वह कभी ऐसा ना करतीं और मैडम कितने लोग चाय कॉफ़ी गिरा देते है सीट के ऊपर. वो दाग भी तो हम को ही मिटाना पड़ता है ना. तो बस दाग था, मिटा दीया.”

मै दंग रह गई और मैं शिक्षा के वास्तविक अर्थ को एक बार समझने की कोशिश करती रही.

 

– स्नेहा भट्टाचार्य, एमबीबीएस स्टूडेंट

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...