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सड़क सुरक्षा को लेकर अनोखी मुहिम, पुरानी किताबें लेकर बाँट रहे हैं हेल्मेट

तर्कसंगत

July 8, 2019

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2016 के अध्ययन के अनुसार भारत में प्रति चार मिनटों में एक नागरिक अपना जीवन सड़क दुर्घटना के कारण खो देता है. यह एक बेहद ही गंभीर मुद्दा है और इसी मुद्दे पर लोगों को जागरुक कर रहे हैं राघवेन्द्र कुमार.

 

पुरानी किताबों के बदले बाँट रहे हैं हेल्मेट.

सड़क सुरक्षा की इस अनोखी मुहिम में राघवेंद्र पुरानी किताबों के बदले निशुल्क हेल्मेट का वितरण कर रहे हैं, ताकी ज़्यादा से ज़्यादा लोग इसका इस्तेमाल करें और सुरक्षित रहें, वह हेल्मेट वितरण की इस मुहिम को इस स्तर पर ले जा चुके हैं कि अब तक वह देश के अलग अलग राज्यों में 20,000 से भी अधिक हेल्मेट बाँट चुके हैं और अपनी नौकरी छोड़ अपना जीवन पूर्ण रूप से इस नेक कार्य को समर्पित कर चुके हैं. वह पुरानी किताबों के बदले हेल्मेट का वितरण करते हैं और उन किताबों को ज़रूरतमंद पढने वाले बच्चों को देते हैं, उनकी दान की गई किताबों की मदद से 2019 में आए रिजल्ट में 4 बच्चों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जो कि इस मुहिम का एक सन्तोषजंक फल है. राघवेंद्र यह मुहिम भारत के 9 अलग राज्यों में चला रहे हैं.

 

 

दोस्त की सड़क दुर्घटना में मौत ने बदला जीवन और बन गए हेल्मेट मैन.

दुनिया के लिये हेल्मेट मैन बन चुके राघवेंद्र बिहार कैमूर जिला से आए और मेरठ में वकालत पढ रहे थे. उनका जीवन तब बदला जब 2014 में इन्जीनियरिंग के फाइनल ईयर में उनके दोस्त कृष्ण की सड़क दुर्घटना के कारण दुखद मृत्यु हो गई, कृष्ण बाइक पर सवार थे और उन्होने हेल्मेट नही पहन रखा था, राघवेंद्र बताते हैं की “अस्पताल ले जाने पर कृष्ण को वेंटिलेटर पर रखा गया लेकिन वह नही बच सका और डॉक्टर ने उन्हे कहा कि अगर तुम्हारे दोस्त ने हेल्मेट पहन रखा होता तो शायद वह बच जाता.”यह वाक्य उनके लिये पीड़ादायक था.

 

 

जब वह कृष्ण के माता पिता से मिलने उनके घर पहुचे तो वे लोग टूट चुके थे, कृष्ण अपने माता पिता की इकलौती संतान थे और वह मन्नतों से 20 वर्ष बाद जन्में,वह स्मृति के तौर पर कृष्ण की कुछ किताबें लेकर पहुचे थे लेकिन वे लोग इसका क्या करते तो राघवेंद्र ने उन किताबों को गरीब बच्चों में दान करने का फैसला किया और युवाओं में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिये और लापरवाही के बदले हेल्मेट पहने का सन्देश देते हुए हेल्मेट निशुल्क वितरण किया जिससे सड़क दुर्घटना के कारण उनकी तरह कोई अपना ना खो दे.

 

 

वह बताते हैं की जब वह इस मुहिम में जी जान लगा रहे थे तो उन्हे  करीब 2 साल बाद एक माँ का फोन आया और वह बताती हैं की उनके द्वारा दान की गई पुस्तकों की मदद से उनके पुत्र ने डिस्ट्रिक्ट टॉप किया है. यह खबर उनके लिये प्रेरणादायक साबित हुई और उन्होने सोचा क्यो ना वह अपनी सड़क सुरक्षा मुहिम में साक्षरता के लिये मुहिम भी शामिल कर लें और उन्होने लोगों को प्रोत्साहित किया कि वे अपनी पुरानी किताबें दान करें उसके बदले हेल्मेट ले जायें जिससे गरीब बच्चों को पढने का साधन मिलेगा और दूसरी तरफ हमारी सड़कें कुछ हद तक हादसा मुक्त हो पायेंगी, तब से वह किताबों के बदले हेल्मेट बाँट रहे हैं और उन्होने कुछ चौराहों, मन्दिर, मस्जिद और अन्य स्थानों पर ER11 बुक बैंक की स्थापना की जहां लोग अपनी पुरानी किताबें दान कर सकते हैं. राघवेंद्र के इस निःस्वार्थ काम से प्रभावित होकर बिहार सरकार ने उन्हें सम्मानित किया है और ‘हेल्मेट मैन’ का खिताब दिया इसके आलावा, नोएडा शहर के प्रशासनिक अधिकारियों ने भी उनका साथ देते हुए नोटिस निकाला है कि यदि किसी ने हेल्मेट नहीं पहना है तो पेट्रोल पंप पर उसके दुपहिया वाहन में पेट्रोल नहीं भरा जाएगा.

 

 

मुहिम में आने वाली मुश्किलें

राघवेंद्र बताते हैं कि इस मुश्किल को चलाने में उन्हें कुछ दिक़्क़तों का सामना भी करना पड़ता है. दरअसल राघवेंद्र अपनी नौकरी छोड़ चुके हैं और इसी मुहिम को लेकर पूर्ण रूप से समर्पित हैं और मुख्य रूप से जो समस्या वह वित्तीय है यहाँ तक की इसके लिये राघवेंद्र ने नोएडा का घर भी बेच दिया और जो वोलन्टीयर उनके साथ जुड़ते हैं वो भी अस्थाई रूप से जुड़ते हैं और वे हर वक्त उनके साथ अलग अलग शहरों में नही आ सकते. राघवेंद्र का कहना है की अगर इस मुहिम में उनके लिये कोई स्पोन्सर मदद करने आगे आता है तो यह उपयोगी होगा. सबसे बड़ी बाधा है रोड पर खड़े होकर काम करना उसके लिये भी पर्मिशन चाहिये होती है जो आसान नही, कई लोग उनको सरकारी एजेंट समझ उनसे हेल्मेट ले लेते हैं लेकिन इस मुहिम की प्रेरणा और लक्ष्य को नही समझते.

 

भविष्य के लिये लक्ष्य और योजना

राघवेंद्र चाहते हैं कि इस मुहिम में सरकार भी शामिल और एक ऐसा कानून लाया जाए जिसके तहत कोई भी व्यक्ति बिना हेल्मेट के टोल क्रॉस ना कर पाए, उनका मानना है कि सड़क दुर्घटना से ज़्यादातर युवा ही प्रभावित होते हैं और इसका सबसे बड़ा कारण है हेल्मेट ना पहनने की लापरवाही, अगस्त में बहुत से कॉलेज खुलेंगे और अगर सभी कॉलेज आने वाले छात्रों का स्वागत हेल्मेट गिफ्ट देकर करेंगे तो यह सड़क सुरक्षा के लिये अच्छा संदेश होगा, वह यह भी कहते हैं की एक दूसरे को हेल्मेट गिफ्ट करने का रिवाज होना चाहिये. गरीब बच्चों को किताबें बाँटने और शिक्षा में मदद करना के पीछे का राघवेंद्र का लक्ष्य है भारत में 100% साक्षरता,वह चाहते हैं की भारत में हर कोई शिक्षित हो और इसके लिये वह लगातार काम कर हैं.

 

 

पाठकों के लिये संदेश

राघवेंद्र अपनी ओर से पाठकों को यही संदेश देना चाहते हैं कि लोग अपनी किताबों की रद्दी ना बनायें वे किताबें दान करें और किसी गरीब को शिक्षा का तोहफा दें. लोग सदा हेल्मेट का इस्तेमाल करें और सड़क पर सावधान रहें. अगर आप भी राघवेंद्र की इस नेक देश सेवा की मुहिम से जुड़ना चाहते हैं या किसी भी प्रकार से उनकी मदद करना चाहते है तो आप सीधे तौर पर उनसे दिए गए नंबर पर सम्पर्क कर सकते हैं 8510006477.

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