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आईआईटी-मद्रास के छात्रों ने डिजाइन किया सेप्टिक टैंक रोबोट जो मैनुअल स्कैवेंजिंग को खत्म कर सकते हैं

तर्कसंगत

July 9, 2019

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अपने तकनीकी ज्ञान का उपयोग करते हुए आईआईटी मद्रास के अंतिम वर्ष के छात्र दिव्यांशु कुमार और उनकी टीम ने SEPoy – एक सेप्टिक टैंक क्लीनिंग रोबोट का आविष्कार किया है जिसमें पूरी तरह से मैनुअल मैला ढोने को खत्म करने की क्षमता है.

ये टीम डॉ प्रभु राजगोपाल द्वारा निर्देशित है, जिसने एक उन्नत डिज़ाइन विकसित किया है. कुछ समय पहले, तमिलनाडु में चार सफाई कर्मचारियों ने एक कारखाने में सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय अपनी जान गंवा दी, उसी दिन, एक अन्य सफाई कर्मी ने कुराली, चंडीगढ़ में एक सीवेज लाइन की सफाई करते हुए अपनी जान गंवाई.

उस दिन के बाद गुरुग्राम में हाथ से मैला ढोने वालों की दो और मौतें हुईं और जाहिरी तौर पर इन मौतों का जिम्मेदार सेप्टिक टैंक के अंदर का जहरीला धुआं था हालांकि 2013 में कानून द्वारा हाथ से मैला ढोने को प्रतिबंधित कर दिया गया है, लेकिन यह प्रथा अभी भी लगभग पूरे भारत में मौजूद है.

 

 

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पुरुष अपने जीवन को जोखिम में डालते हुए, मल के अपशिष्टों को हाथो से साफ करने का अमानवीय कार्य जारी रखे हुए है. राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) की एक 2018 रिपोर्ट में बताया गया है कि हर पांच दिनों में सेप्टिक टैंक या सीवर लाइनों की सफाई करते समय एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, इससे यह पता चलता है कि देश में अभी भी बड़ी संख्या में सफाई कर्मी ये काम कर रहे हैं. इस अमानवीय प्रथा पर अंकुश लगाने के लिए सरकार और गैर-लाभकारी विकास क्षेत्रों द्वारा बार-बार प्रयास किए गए हैं.

आईआईटी मद्रास के छात्रों द्वारा बनाए गए रोबोट सेप्टिक टैंक में कीचड़ को काटकर समरूप करता है ताकि इसे वैक्यूम पंप खींच कर बाहर निकाल सके. व्यावसायिक रूप से इसको बनाने और स्थापित करने का अनुमानित खर्च लगभग 10 से 30 लाख हो सकता है. सफाई कर्माचारियों के साथ कई बैठकों के बाद, हमने महसूस किया कि हमें डिज़ाइन को अपग्रेड करने की आवश्यकता है, ताकि इसे अधिक आसान बनाया जा सके जिससे मशीन को संचालित करने के लिए किसी विशेष कौशल की आवश्यकता न हो, दिव्यांशु ने बताया कई लोगों ने सीवर लाइनों को साफ करने के लिए तकनीक का आविष्कार किया है, लेकिन उस तकनीक में सेप्टिक टैंक से मेनियूली मैला ढोने वालों के लिए एक हाई रिस्क हैं.

हमने इस समस्या को सुर्खियों में लाने का फैसला किया, ताकि जो तकनीक पहले से ही बाजार में है और जो सफाई मैनुअल रोबोटों से हो रही है, हमारे रोबोट उससे बेहतर है सफाई कर्मचारी के साथ बातचीत से टीम को समझ में आया कि सेप्टिक टैंक की कीचड़ सीवर लाइन से कैसे अलग होती है. सेप्टिक टैंक में, कीचड़ बहुत चिपचिपा होता है, जिससे मशीन के लिए नेविगेट करना मुश्किल हो जाता है, इसलिए हमें एक मजबूत डिजाइन की जरूरत थी चूंकि एक सेप्टिक टैंक का छेद बहुत छोटा है, इसलिए हमारे रोबोट को कॉम्पैक्ट होना चाहिए, इसलिए हमने एक ऐसा रोबोट बनाया जो आसानी से टैंक में घुस जाए और अंदर फैलकर कीचड़ को आसानी से काट दे.

SEPoy रोबोट बायो प्रोपुलेजन तकनीक से काम करते है, जो पानी में जाकर मछली कि तरह चलकर अपना काम करते है, मशीन टैंक के अंदर जाकर फेल कर सारे कीचड़ को समरूप करती है. इसके बाद इस कीचड़ को एक वैक्यूम पंप के द्वारा बाहर निकाल देते है इलेक्ट्रॉनिक गिमबल के साथ हाई डेफिनेशन वाले कैमरे मशीन की बॉडी से जुड़े होते हैं, जिससे रोबोट रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) में बदल जाता है, जिसे काफी दूरी से मॉनिटर और ऑपरेट किया जा सकता है. सेप्टिक टैंक के अंदर, रोबोट तीन दिशाओं में घूम सकता है और कीचड़ को हटाकर आगे बढ़ सकता है रोबोट को एक सेप्टिक टैंक के अंदर पर्यावरण से मिलता-जुलते नकली सेटअप में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है. अभी टीम (सफाई कर्मचारी आंदोलन) SKA के साथ संपर्क में है, जो देश से मैनुअल सफाई को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है.

 

 

इस एनजीओ ने SEPoy के आविष्कार की बहुत सराहना की है और उनको उम्मीद है कि यह आविष्कार उनके लिए सहायक सिद्ध होगा दिलचस्प बात ये है कि ये पहला मौका नहीं है जब उनके द्वारा सामाजिक मुद्दों पर इस तरह तकनीक का सहारा लिया गया हो, दिव्यांशु द्वारा अन्य विकास की परियोजनाएँ भी चलाई जाती है. उन्होंने एक सहकर्मी से दूसरे सहकर्मी को सीखाने की प्रणाली के माध्यम से स्कूली छात्रों में नेतृत्व दक्षता विकसित करने के लिए संगठन में शामिल किया है, जहाँ वरिष्ठ छात्र अपनी जूनियर कक्षाओं को पढ़ाते हैं वे अगले पांच सालों में 1,25,0000 छात्रों को आगे निकलने का लक्ष्य दे रहे है. इस फाउंडेशन का संचालन दिव्यांशु और दो अन्य युवा आईआईटी मद्रास से करते हैं.

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