मेरी कहानी

मेरी कहानी : मैं जब रात 2 बजे अपने ससुराल को छोड़ कर निकली तो मेरे जेब में केवल 750 रूपये थे

तर्कसंगत

July 9, 2019

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मैं सशस्त्र बलों की पृष्ठभूमि से आती हूँ, मैं अंबाला में पली-बढ़ी और जल्द ही मुंबई चली गई. वहां मनोविज्ञान में एक डिग्री ली साथ ही कानून का अध्ययन भी किया. मैंने शुरुआत में अपने माता-पिता दोनों को कैंसर से खो दिया था. हालांकि, सभी कठिनाइयों के बावजूद, मैंने अपनी शिक्षा जारी रखी, मैं अपने माता पिता द्वारा सिखाई गई नसीहतों पर चलती हूँ. जब में मुश्किल हालात में उलझती हूँ मां पिता के सिखाए ये जीवन पाठ हमेशा समाधान देते है मेरे पिता ने हमेशा मुझे वित्तीय रूप से स्वतंत्र होने पर जोर दिया.

मैं अपने आसपास के बारे में जागरूक होने के लिए रोजाना अखबार पढ़ती हूं. मेरी माँ मुझ पर विश्वास करती थी, मुझे बताती थी कि मैं वह सब हासिल कर सकती हूं जो मैं चाहती थी, और मैंने इसके लिए कड़ी मेहनत की. मेरे जीवन में एक मोड़ तब आया था, जब मैं अपने पति के घर से अपनी जेब में केवल 750 रुपये लेकर घर छोड़ा था, मैंने फैसला किया किया था कि अब अपने जीवन में किसी भी दुर्व्यवहार से दबकर नहीं रहूंगी.

आज में एक सफल वकील हूं, लेकिन जब मैंने सुबह के 2 बजे घर छोड़ा था तब मेरे पास 750 रुपये थे, उस बात को लगभग 18 साल हो चुके है मुझे याद है कि जिस परिवार को मैंने अपना माना वो बहुत ही क्रूर था, हालांकि वो एक सम्मानित परिवार था, जिस घर की मैं बहू थी.

साल 2000 में मेरे पति ने तलाक के लिए अर्जी दी, लगभग 10 साल बाद फैसला आया, इस दौरान मैंने कानून का अध्यन करना शुरू किया की मेरे केस में आखिर हो क्या रहा है.

मैंने एक NGO शुरू किया , सोचा कि में इसको भुगतान वाली सेवा बनाऊं, लेकिन जब मैंने महिलाओं की आवाज़ में उदासी और लाचारी को सुना, तो मैंने फैसला किया कि नहीं ये बिना भुगतान कि सेवा ही रहेगी.

मैंने अपनी लड़ाई पूरी तरह से अपने दम पर लड़ी है आज, मैं एक वकील हूं, और मैं किस तरह की वकील हूं ये मैं अपने क्लाइंटों को यह तय करने दूंगी, क्यूंकि पैसा कभी मेरे लिए पहली पसंद नहीं रहा. मैंने जो किया वह मेरी इच्छा शक्ति थी, मेरा मानना ​​है कि चाहे कोई भी बाधाएं क्यों न हों, किसी को या तो इनको हटाना सीखना होगा या खुद अलग हटना होगा.

दुर्भाग्य से, जब एक महिला तलाक या दिक्कत वाली शादी की परेशानी से गुजरती है, तो लोग तरह तरह की सलाह देते हैं, लेकिन वास्तव में, उन्हें यह एहसास नहीं होता है कि भावनात्मक और नैतिक समर्थन ही एक महिला के लिए सबसे अच्छा सहारा होता है. मुझे किसी भी रिश्तेदार से कोई सहयोग नहीं दिया लेकिन वास्तव में यह असहयोग ही मेरे लिए एक आशीर्वाद बन गया. इस असहयोग ने मुझे तलाक की पीड़ा से गुजर रहे लोगों के लिए भारत का पहला गैर-न्यायिक तलाक सहायता समूह स्थापित करने के लिए प्रेरित किया, जो एक पितृसत्तात्मक मध्यवर्गीय समाज की नैतिकता को चुनौती देता है.

मेरा NGO पुरुषों के लिए भी उपलब्ध है क्योंकि पुरुषों को भी भावनात्मक समर्थन मिलने का कोई सहारा नहीं है, मेरा समूह परामर्श के माध्यम से 8,000 से अधिक लोगों की सहायता कर चुका है.

यहां तक कि मेरी यात्रा ने मुझे मुंबई का एक सफल तलाक वकील बना दिया है, मुझे NCW (राष्ट्रीय आयोग महिला) द्वारा एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में सम्मानित किया गया है. मेरे सहायता समूह ने उन महिलाओं की उम्मीदों को बांधा है जो महसूस करती हैं कि तलाक जीवन का अंत है. समूह का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को अलगाव की चुनौतियों से निपटने में मदद करना है सामाजिक-आर्थिक बाधाओं से परे महिलाओं ने जाना है कि कानूनी, नैतिक और कभी-कभी आर्थिक समर्थन की उनको जरूरत है लोगो ने मुझे अहसास कराया कि तलाक के बाद अकेलेपन,और शारीरिक जरूरतों कि पूर्ति, जैसी समस्याएं भी आती है. इसी सब अनुभवों के आधार पर मैंने ” 360 degree back to life” नाम कि किताब लिखी है लोगो की मदद के लिए मैंने ‘Divorcekart’ ऐप लॉन्च किया जो भारत का पहला ऐसा ऐप है, जो लोगों को उन वकीलों से जोड़ता है, जो 24 घंटे, सभी सात दिनों में उनसे बात कर सकते हैं.

आज लोग उन सभी दुःख और तकलीफों से जूझने को तैयार नहीं हैं जो असफल शादियाँ से उत्पन होते हैं, वह बंधनों से अलग होकर दूसरी तरफ देख रहे है, वे उन बेड़ियों को तोड़कर आजाद होना चाहते है और मैं चाहती हूँ लोग तलाक को एक सामान्य घटना की तरह ट्रीट करे. आज जिस जगह मैं खड़ी हूँ अपनी ज़िन्दगी के उस मुकाम पर जहां जीतने के लिए पूरा आसमान है. खुद पर भरोसा करो किसी को नीचे गिराने के बजाय खुद ऊपर उठना बेहतर है.

 

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