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क्या उत्तर प्रदेश के शिक्षकों पर लगी ‘सेल्फी अटेंडेंस मीटर’ सफ़ल हो पाएगी ?

तर्कसंगत

Image Credits: News18/BBC

July 18, 2019

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आजकल उत्तर प्रदेश में शिक्षकों की सेल्फी से अटेंडेंस भेजने की न्यूज़ काफी चर्चा में है, हलाकि इस प्रकार के प्रयोग बहुत सालों से किये जा रहे है, बहुत से जिलों में कभी कलेक्टर के द्वारा तो कभी बेसिक शिक्षा विभाग के द्वारा। चंदौली, गाज़ियाबाद जैसे कई और जिलों में इसे लागू किया जा चुका है. लेकिन यह कभी सफल नहीं रहा, कभी विरोध प्रदर्शन के कारण तो कभी लागू करने के तरीका ही सवालों के घेरे में रहा.

 

शिक्षकों के स्कूल न जाने की गंभीर समस्या 

शिक्षकों के स्कूल न जाने की समस्या बहुत ही गंभीर विषय है, खासकर सभी हिंदी-भाषी राज्यों में. हिंदी राज्यों में अगर इस समस्या का समाधान निकलता है तो ये राज्य सरकारों के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता होगी. अभी कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के एक जिले (बाराबंकी) में फिर से सेल्फी से अटेंडेंस भेजने के नियम को लागू किया गया है. इसे जिला के बेसिक शिक्षा विभाग के द्वारा लागू किया गया है.  शिक्षकों को सख्त लहजे में निर्देश दिये गए हैं कि समय पर स्कूल पहुंचें और क्लास से सेल्फी लेकर भेजें, नहीं तो दिन का वेतन कटवाने के लिए तैयार रहें. यह प्रणाली गर्मियों की छुट्टियां शुरू होने से पहले मई में शुरू कर दी गई थी . इस कदम के बाद से पिछले दो महीने में अब तक 700 से अधिक शिक्षकों की कम से कम एक दिन की सैलरी काटी जा चुकी है. विभाग ने इस प्रक्रिया को ‘सेल्फी अटेंडेंस मीटर’ का नाम दिया है.

बेसिक शिक्षा अधिकारी वी. पी. सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री और बेसिक शिक्षा मंत्री के निर्देश पर सेल्फी लेने और सत्यापित करने की पूरी प्रक्रिया को सख़्ती से लागू किया जा रहा है. शिक्षकों को विशेष रूप से कहा गया है कि अगर वे सुबह 8 बजे तक अपनी सेल्फी पोस्ट नहीं करते हैं, तो वे अपने एक दिन का वेतन खो देंगे.”

 

 

शिक्षकों की अलग-अलग शिकायते

हालांकि बहुत से शिक्षकों ने नए प्रणाली को अनुचित बताया है, 21वीं शताब्दी में टेक्नोलॉजी का महत्व पहले से कही बढ़ गया है. आम जीवन से लेकर अंतरिक्ष तक सभी जगह टेक्नोलॉजी नज़र आने लगी है. हम आज की जीवन-शैली को टेक्नोलॉजी से अलग नहीं कर सकते. इस टेक्नोलॉजी युग में सरकार भी इसका सहारा लेकर समस्याओं का समाधान निकलने पर जोर दे रही है. शिक्षकों से सेल्फी खींच कर या तो वेबसाइट पर या एप्लीकेशन पर या तो वह्ट्स एप्प के जरिये अपलोड करने के लिए बोला जाता है. अभी भी भारत में ऐसी बहुत सी जगहें है जहाँ मोबाइल का नेटवर्क नहीं आता. स्कूल में इंटरनेट की धीमी स्पीड और नेटवर्क की समस्या रहती है, नेट की स्पीड इतनी धीमी होती है कि सेल्फी पोस्ट ही नहीं हो पाती तो वही बहुत से लोगों के पास स्मार्ट फोन नहीं है जिससे की फोटो अपलोड किया जा सके. बहुत से शिक्षकों की अलग-अलग शिकायते है जैसे ट्रैफिक जाम हो जाने, ग्रामीण इलाकों में सार्वजनिक परिवहन की अनुपलब्धता और खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी सेल्फी पोस्ट करने में देरी का कारण बन सकती है. जिससे एक दिन का वेतन खोने का डर बन सकता है. इसके अलावा, अब स्कूल में स्मार्टफोन ले जाने देने से सोशल मीडिया साइटों पर सर्फिग करते शिक्षकों पर काबू पाना सरकार के लिए भी एक चुनौती होगी. 

 

सरकार की दृढ़ता

शिक्षा विभाग को पूर्ण विश्वास है की ये नियम उन शिक्षकों पर सिकंजा कसने में मदद करेगी जो स्कूल नहीं जाते है और अगर यह नियम काम करती है, तो इसे अन्य जिलों में भी लागू कर सकते हैं. सेल्फी के अटेंडेन्स के अलावा विद्यालय में होने वाली प्रार्थना, मिड डे मील का वितरण, संचालित कक्षाओं के बारे में भी जानकारी लिया जा सकता है. मुख्यमंत्री योगी और शिक्षा विभाग के द्वारा शिक्षा प्रणाली और छात्रों की तुलना में शिक्षण मानकों में सुधार करना, ये सरकार की दृढ़ता दर्शाती है. यह देखना है की, क्या ये प्रणाली वास्तविक बदलाव ला पाने में सक्षम होती है या नहीं ?

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