मेरी कहानी

संजीव भट्ट के बच्चों का लिखा खत : हमारे पिता को सच्चाई के साथ खड़े होने के लिए सताया जा रहा है

तर्कसंगत

July 30, 2019

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20 जून 2019 को न्याय की हत्या करते हुए एक सत्र अदालत ने एक निर्दोष व्यक्ति को एक काल्पनिक और मनगढ़ंत मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उनका अपराध क्या है? उन्होंने नफरत और हिंसा के अपराधियों को साहसपूर्वक सामना किया, जबकि दूसरों ने चुप्पी साध ली, और उन्होंने लगातार राजनीतिक पीड़ित होने के बावजूद भी कभी भी अन्याय का समर्थन नहीं किया।

वह आदमी संजीव भट्ट है, और वह आदमी मेरे पिता हैं । मुझे आज भी याद है कि 2002 के गुजरात दंगों की जाँच के दौरान पिताजी ने आयोग के समक्ष साक्ष्य जमा करना शुरू किया था, तब हमलोग बहुत अच्छे से जानते थे की हमारा यह जीवन भविष्य में बदल जाएगा क्योंकि यह युद्ध रेखा को एक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ खींचा जा रहा जो बुराई और प्रतिशोध की भावना से ओत-पोत होने के कारण अद्वितीय था। हम तब भी नहीं डरे थे, और हम अब भी नहीं डर रहे।

उनके पास व्यवस्था में शक्ति हो सकती है, लेकिन हमारे पास हमारे सिद्धांत और सच्चाई हैं। उनकी ताकत भय और उत्पीड़न से आती है, हमारा सम्मान और नीतिपरायणता/ईमानदारी से आता है। लोग हमसे पूछते रहते हैं कि हम कैसे उन लोगों का सामना कर पा रहे हैं, उन सभी को कहने के लिए मेरे पास केवल एक चीज है: हम एक असाधारण आदमी के एक मजबूत परिवार से हैं। अत्याचारी आएंगे और जाएंगे, इतिहास उन्हें गंदगी की अवांछित बदबू की तरह मिटा देगा, लेकिन नायक हमेशा जीवित रहेंगे। 

संजीव भट्ट, जो दुनिया में एक ईमानदार अधिकारी के रूप में काम करते रहे, वह न केवल एक कर्तव्यपरायण पुलिसअफ़सर हैं, बल्कि एक श्रेष्ठ पिता भी हैं। वर्षों से मैंने डैड डॉन को कई भूमिकाओं को सहजता से देखा है। वह सिर्फ हमारे पिता नहीं हैं, वह हमारे गुरु, शिक्षक, मित्र, विश्वासपात्र, कठोर आलोचक, सबसे मजबूत समर्थक … हमारे प्रेम, हमारी ताकत के स्रोत, हमारे ध्रुव तारा हैं। सुपरहीरो की तलाश के लिए लोग अक्सर कल्पना की दुनिया में लिप्त रहते हैं; हमें अपने घर की चारदीवारी से आगे नहीं देखना होता था हमारे पिता पर हमें अपार सम्मान और गर्व है।

पिताजी ने हमें निडर होना सिखाया, जोखिम उठाना सिखाया और सबसे महत्वपूर्ण बात उन्होंने हमें अपनी आवाज़ उठाना सिखाया, एक ऐसी आवाज़ जो ज़ोर से बोलने के लिए नहीं बल्कि शिक्षित और तार्किक हो। उन्होंने हमें सवाल करना सिखाया, अन्याय के आलोक में कभी भी मूक दर्शक नहीं बनना और हमेशा निस्वार्थ भाव से अपनी जरूरतों को दूसरों के सामने रखना सिखाया।

ईमानदारी और अखंडता उनमें कूट-कूट के थी, उसको उन्होंने भी जिया और हमें भी जीना सिखाया ।

जब हम बड़े हो रहे थे, मेरे पिताजी हमेशा कहते थे कि जीवन में एक समय आएगा जब हम गलत और आसान एवं सही लेकिन मुश्किल होने के चौराहे पर फंसे होंगे, उस क्षण में हम जो निर्णय करेंगे वह हमारे बाकी ज़िंदगी को परिभाषित करेगा। यह दुनिया की सबसे स्वाभाविक प्रवृत्ति हो सकती है कि वह परिस्थितियों को देखे और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने से भाग जाए, लेकिन इसके बजाय हमें अपनी सीमाओं और आशंकाओं से परे रहना चाहिए और हमेशा सच्चाई, गरिमा और अनुग्रह का रास्ता चुनना चाहिए, परिणाम चाहें  कुछ भी हो। 27 वर्षों तक उन्होंने अपना कर्तव्य सम्मान और लगन से निभाया, कभी किसी राजनीतिक दबाव या सत्ता के अधीन नहीं रहे; वह हमेशा निरपेक्षता का अनुसरण करते रहें, और बदले में उनकी समर्पित और परिश्रमी सेवा का अंत प्रतिशोधी उत्पीड़न और राजनीतिक उत्पीड़न द्वारा पुरस्कृत किया गया; यह सब इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने इस फासीवादी शासन के खिलाफ बोलने की हिम्मत दिखाई।

यह मेरे दिल को बहुत चोट पहुँचाता है और यह देख मेरा खून उबल जाता है कि ईमानदारी और अखंडता का मूल्य अब हमारे “न्यू” इंडिया में कौन लोग दिखा रहे। अभी बलात्कारी, आतंकवादी और हत्यारे हमारे देश को चला रहे हैं; जबकि एक अधिकारी जिसने अपना पूरा जीवन हिंसा, घृणा और आतंक के खिलाफ लड़ते हुए बिताया, को पूरी निष्ठा और परिश्रम से अपना कर्तव्य निभाने के लिए झूठा फंसाया गया और फिर जेल में रखा गया।

अब प्रत्येक दिन में हर क्षण मुझे अपने पिता की याद आती है। आज हम जो कुछ भी हैं, उनकी वजह से हैं। चाहे इतिहास और राजनीति के चर्चा पर अंतहीन घंटों बैठना हों या हमें अलग-अलग खेल सिखाना हो, पिताजी ने हम सबको यह सब सिखाया।

वह हमारे अस्तित्व का एक अभिन्न अंग है, हमारी आत्मा है, एक हिस्सा है जो अभी हमसे दूर हो गया है क्योंकि लालची और अशिक्षित हिंसक पुरुषों का एक समूह एक निर्दोष व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत लाभ और राजनीतिक प्रतिशोध के लिए दोषी ठहराना ठीक समझा है।

आज से 10 महीने पहले, 5 सितंबर 2018 को, वे न सिर्फ पिताजी को दूर ले गए, वे हमारे साथ हमारे जीवन की भावना और हमारे जीवन के ड्राइविंग फ़ोर्स को दूर ले गए। सालों तक, बारिश हो या तूफान, हर शाम, शांतनु और पिताजी हमारे अल्मा मेटर में वॉलीबॉल खेलने जाते थे। अब शांतनु ने 10 महीनों में न तो वॉलीबॉल को हाथ लगाया है न ही स्कूल गया है।

अब भी मैं याद कर सकती हूं, मेरी सुबह की शुरुआत पिताजी के साथ होती थी, हम एक साथ नाश्ता करते, एक-दूसरे के साथ मिलकर जंबल और क्रॉसवर्ड को हल करने के लिए प्रतिस्पर्धा करते, यहां तक ​​कि जब मैंने आगे की पढ़ाई करने के लिए घर छोड़ा, तो दुनिया के किसी भी कोने में कोई फर्क पड़े या ना पड़े, चाहे समय का अंतर कितना भी हो, सुबह जागते ही पहला फ़ोन पिताजी का होता और बिस्तर पर जाने से पहले अंतिम फ़ोन भी पिताजी का ही होता। मैंने महीनों में उनकी आवाज़ नहीं सुनी है, मैं महीनों से सोयी नहीं हूँ। बड़े होने के दौरान, उन्होंने हमारे जीवन को कला, संगीत और किताबों से भर दिया, हमें रोल मॉडल प्रदान करने के वह अपने प्रयास में अटूट थे। उन्होंने हमारा जीवन निर्देशित किया और अपने जीवन के माध्यम से हमारा मार्गदर्शन करना जारी रखा। मुझे लगता है कि उन्हें कभी भी यह एहसास नहीं हुआ मैं और शान जिसको सबसे ज़्यादा चाहते थे वह कोई और नहीं वह मेरे पिताजी ही थे। वह हमारी प्रेरणा हैं, हमारा गौरव हैं। 

आज, हमारे पिता को कुछ ऐसा करने के लिए सताया जा रहा है जिसको करने की हिम्मत दूसरे नहीं जुटा सके – वे हमेशा सच्चाई के साथ खड़े रहें। घृणा और हिंसा के अपराधियों को बेपर्दा करने का साहस करने के लिए उन्हें बेरहमी से पीड़ित किया जा रहा है। कानून का घोर उल्लंघन हुआ है। एक बहादुर और ईमानदार आवाज़ का मज़ाक उड़ाया जा रहा है, और फिर भी बहुत से लोग जिनके लिए हमारे पिता ने लगातार लड़ाई लड़ी, वे चुप है।

आप चुपचाप देखते हैं, जबकि जिस आदमी ने कभी आपके लिए लड़ना नहीं छोड़ा, वह जीवन के लिए सताया जा रहा है। आप उस आदमी की रक्षा करने की हिम्मत नहीं जुटा सकते, जिसने आपका बचाव करते हुए सब कुछ खो दिया। आपकी कायरतापूर्ण चुप्पी मुझे बहरा कर रही है, आपकी निष्क्रियता निराशाजनक है।

हमारे पिता ने हमें जो कुछ भी सिखाया, वह हर बाधा से हमें पार करने के लिए प्रोत्साहित करता है, हमारे चरित्र को बनाने में उन्होंने हमारी मदद की, हम आज जो कुछ भी है उसमें उनका काफ़ी योगदान हैं।

उन्होंने हमें एक अविनाशी कवच ​​की तरह ढाल दिया है, अब उसकी ढाल, उसका कवच, उसकी ताकत बनने की बारी अब हमारी है।

हमारे पिता, संजीव भट्ट सबसे बहादुर और सबसे मजबूत इंसान हैं जिन्हें हमने जाना है, नफरत और हिंसा के इन अपराधियों से न्याय दिलाने के लिए उनकी लड़ाई जारी है, और हम उनके परिवार उनके साथ खड़े हैं।

हम गुजरात के उच्च न्यायालय में न्याय के इस हत्या को चुनौती देंगे। हमारे पिता ने अपना पूरा जीवन अनवरत रूप से गुजरात के पीड़ितों के लिए लड़ने के लिए समर्पित कर दिया, अब उनके लिए लड़ने की बारी हमारी है। हम तब तक आराम नहीं करेंगे जब तक हमारे पिता को न्याय नहीं मिल जाता और वह अपने परिवार के पास सम्मान और अखंडता के साथ घर वापस न आ जाते हैं। मैं आप सबसे यह वादा करती हूँ।

 

लेखक : आकाशी संजीव भट्ट और शांतनु संजीव भट्ट पूर्व IPS अधिकारी संजीव भट्ट के बच्चे हैं।

 

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