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नॉएडा में बिल्डर के लोन न चुका पाने पर, बैंक ने सोसाइटी वालों को दिया फ्लैट खाली करने का नोटिस

तर्कसंगत

Image Credits: Magic Bricks

August 14, 2019

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अभी के समय में अपने सपनों का आशियाना बनाना हर किसी का ख्वाब होता है. खास कर कि आप अगर किसी महानगर में रहते हैं, तो यह ज़िन्दगी की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. इस उपलब्धि को हासिल करने के बाद अगर आपको पता चले कि आपके घर पर मालिकना हक़ अगर कोई बैंक जमा रही है जिससे आपका कोई वास्ता तक नहीं तो आपका क्या हाल होगा, ये हम सब समझ सकते हैं.

ऐसा ही कुछ हुआ है नॉएडा के सेक्टर 75 में गार्डिनिया गेटवे के निवासियों के साथ. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस सोसाइटी के निवासियों को पिछले सप्ताह 5 अगस्त को यूनियन बैंक से एक नोटिस मिला है. नोटिस के अनुसार बैंक ने उन्हें 20 अगस्त तक घर खाली करने को कहा है. नोटिस में यह भी लिखा है कि गार्डिनिया गेटवे के बिल्डर ने बैंक से 31 दिसंबर 2015 को 78.45 करोड़ रूपये लोन लिया था और बदले में प्रोजेक्ट को गिरवी रखा था. बिल्डर ने वो पैसा नहीं चुकाया और अब बैंक का अधिकार है कि वह अपने पैसे वापस निकलने के लिए सोसाइटी पर कब्ज़ा कर सकता है.

इस नोटिस के मिलने से सोसाइटी में रहने वाले लोग काफी परेशान हैं. उनका कहना है कि उन्होनें बिल्डर को पूरे पैसे देकर फ्लैट खरीदी है. उनका अब कोई बकाया भी नहीं है जो उन्हें बिल्डर को देना हो. ऐसी स्थति में बिल्डर के किये धोखाधड़ी का नुक्सान वो क्यों भुगतें ?

इस सोसाइटी का निर्माण 2011 में शुरू हुआ था और 2015 तक लोगो को उनके फ्लैट्स का मालिकाना हक़ दे दिया गया था. इस सोसाइटी में तकरीबन 550 फ्लैट्स हैं और लगभग 220 परिवार इसमें अभी रह रहे हैं. यूनियन बैंक के नोटिस से सोसाइटी के प्रेसिडेंट बी एस लावाणीआ सकते में है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए वो कहते हैं कि हमने जब फ्लैट्स के पूरे दाम दे दिए हैं तो न जाने हमें क्यों प्रताड़ित किया जा रहा है? आगे नहीं मालुम कि और कौन सी परेशानी आएगी।

गार्डिनिया गेटवे के अडिशनल डायरेक्टर सुरेंदर डेबाल का कहना है कि वो बकाये राशि के भुगतान के लिए बराबर बैंक के संपर्क में हैं.

बैंक ने कहा कि उसे यह कदम उठाना पड़ा क्योंकि डेवलपर उसके प्रश्नों का जवाब नहीं दे रहा था. बैंक के लोन रिकवरी अफसर, दिवाकर चौधरी ने कहा, “हमने ऋण वसूली के उपाय के रूप में निवासियों को नोटिस जारी किया यह एकमात्र तरीका है जिससे हम आशा करते हैं कि बिल्डर ऋण चुकाने की हमारी मांग का जवाब देंगे.”

कुमार मिहिर, एक वकील जो रियल एस्टेट मामलों को संभालते हैं, ने कहा कि नोटिस निवासियों को नहीं भेजा जा सकता है. मिहिर ने कहा, “बैंक इस तरह से निवासियों को बेदखली नोटिस सौंप नहीं सकता है. उनकी बातचीत का प्राथमिक बिंदु बिल्डर है.”

इन सारे गतिविधियों के बीच सोसाइटी में रहने वालों को यह आशंका बराबर सता रही है कि उन्हें 20 अगस्त के बाद घर खाली करना पड़ेगा, जिसके लिए वो बिलकुल भी तैयार नहीं हैं.

तर्कसंगत उम्मीद करता है कि यूनियन बैंक बिल्डर कंपनी के साथ मिलकर इस मुसीबत का उपाय निकाले न कि लोगों को उनके घरों से निकालकर जिनकी कीमत उन्होनें पूरी तरह से दे दी है.

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