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गुजरात स्कूल में दलित शिक्षक के लिए अलग से पानी का बर्तन रखा गया

तर्कसंगत

Image Credits: Desh Pradesh/Live Hindustan

September 3, 2019

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ये 2019 है लेकिन हम अभी भी उन नियमों और विनियमों का पालन कर रहे हैं जो एक रूढ़िवादी समाज द्वारा बनाए गए थे. यह कहा जाता है कि एक स्कूल वह जगह होती है जहाँ बच्चों को नई चीज़ें सिखाई जाती हैं और खुले दिमाग को कैसे रखा जाता है ताकि जब वे बड़े हों तो उन्हें धर्म, जाति, वर्ग, रंग जैसी चीज़ों से नहीं रोका जा सके.

लेकिन क्या होगा अगर वे स्कूल से ही भेदभाव सीखें?

एक चौंकाने वाले मामले में, गुजरात में एक 46 वर्षीय दलित शिक्षक, कन्हैयालाल बरैया को नोटिस दिया गया, क्योंकि उन्होंने अपने उच्च-जाति के तीन आरोपों के लिए रखे  घड़े से ‘आरक्षित’ पानी पिया था.

दलित शिक्षक द्वारा भेदभाव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के दो सप्ताह बाद, उन्हें 28 अगस्त को दूसरे सरकारी स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया. उन्होंने 14 अगस्त को चोटिला पुलिस स्टेशन में अपनी प्राथमिकी दर्ज कराई. बरैया ने प्रिंसिपल मंसंग राठौड़ पर जातिगत भेदभाव, आपराधिक धमकी और उनके खिलाफ नफरत फैलाने का आरोप लगाया है. उन्होनें यह भी आरोप लगाया कि पहले दिन से, दो साल पहले, प्रिंसिपल ने उनके खिलाफ घृणा उकसाया, लेकिन वह छात्रों के हित में चुप रहे.

बरैया ने एफआईआर में कहा कि , “स्कूल के प्रिंसिपल ने दो घड़े रखे हैं  – एक मेरे लिए क्यूंकि मैं वाल्मीकि समुदाय से हूं और दूसरा तीन शिक्षकों के लिए, जो कोली पटेल और दरबार जैसे उच्च समुदायों से है.”

प्रिंसिपल ने उन्हें 3 जुलाई को एक नोटिस भेजा जिसमें लिखा था कि आप वाल्मीकि समुदाय से संबंधित शिक्षक हैं सवर्ण शिक्षकों के घड़े का पानी न पियें.

 

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