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मिर्ज़ापुर मिड डे मील : अंधेर नगरी चौपट राजा का क्लासिक एग्जाम्पल है

तर्कसंगत

Image Credits: News18

September 3, 2019

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उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर में पुलिस ने मिड डे मील में बच्चों को नमक के साथ रोटी खिलाए जाने की ख़बर देने वाले स्थानीय पत्रकार के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया है. मिर्ज़ापुर के स्कूल के वीडियो में छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल के गलियारे में फर्श पर बैठकर नमक के साथ रोटियां खाते देखा गया था.

 

 

मिर्ज़ापुर के पुलिस अधीक्षक अवधेश कुमार पांडे ने कहा, “ज़िला अधिकारी की ओर से जांच कराए जाने के बाद पत्रकार पवन जायसवाल समेत तीन लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है.” तीन-पृष्ठ की FIR में हालांकि दर्ज किया गया है कि जिस दिन वीडियो शूट किया गया, उस दिन स्कूल में सिर्फ रोटियां पकाई गई थीं. इसमें कहा गया है कि गाम प्रधान के प्रतिनिधि को पत्रकार को स्कूल परिसर में बुलाने के स्थान पर सब्ज़ियों की व्यवस्था करनी चाहिए थी.

पवन ने मिर्ज़ापुर ज़िले के ज़मालपुर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय शिउर में छात्रों को मिड डे मील में नमक के साथ रोटी खाते हुए वीडियो रिकॉर्ड किया था. पवन का बनाया ये वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया जिसके बाद स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे.

अपने ऊपर लगे आरोपों की खबर सुनकर पत्रकार पवन जायसवाल ने एक वीडियो जारी किया जिसमें उन्होंने पूरी घटना और उन पर लगे आरोपों के बारे में बताया.

 

 

“मैंने स्कूल के अधिकारियों को पूर्व सूचना देने के बाद 22 अगस्त को एक स्कूल का दौरा किया. मैं दोपहर 12:07 बजे स्कूल पहुंचा और बच्चों को नमक के साथ रोटी खाते देखा. मैंने जिलाधिकारी को सूचित करने वाले वरिष्ठ पत्रकारों को खबर दी, जिन्होंने तब स्कूलों का दौरा किया और कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया, जिसके बाद मामला हाई प्रोफाइल हो गया, ”जायसवाल ने कहा।

जायसवाल ने आगे आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने खुद को किसी भी अन्य कार्रवाई से बचाने के लिए उनके खिलाफ आपराधिक आरोप लगाया है. पवन का दावा है कि स्थानीय प्रशासन ने पांच बार जांच की और वीडियो और घटनाक्रम को सही पाया. छठीं जांच ज़िला विकास अधिकारी प्रियंका निरंजन ने की.

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने पवन जायसवाल के समर्थन में एक बयान जारी किया है. गिल्ड ने यूपी सरकार से पत्रकार के खिलाफ सभी मामलों को वापस लेने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि उसे भविष्य में परेशान या नुकसान नहीं पहुंचाया जाए.

 

 

इस बीच, स्थानीय पत्रकारों ने मिर्जापुर में जिला प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और पत्रकार के खिलाफ एफआईआर को रद्द करने की मांग की.

 

 

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