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ग्राम प्रधानों की जातिवादी दबंगई के कारण लखीमपुर के दलित अधिकारी ने की आत्महत्या

तर्कसंगत

Image Credits: Media Vigil/India Today

September 9, 2019

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दलित उत्पीड़न की खबरें हमारे देश में आम हो गयी हैं. उत्पीड़न से आजिज हो उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में एक दलित ग्राम विकास अधिकारी ने 5 सितम्बर को आत्महत्या कर ली. इस घटना ने एक बार फिर रोहित वेमुला कांड की याद ताजा कर दी है. आत्महत्या करने वाले अधिकारी त्रिवेंद्र कुमार रैदास ने अपनी मौत के लिए रसूलपुर के ग्राम प्रधान जुबेर खान, देवरिया के ग्राम प्रधान पति हरदेव सिंह उर्फ पप्पू और उसके बेटे को जिम्मेदार ठहराया है.

 

प्रधानों द्वारा जातिसूचक बेइज़्ज़ती होती थी 

पीड़ित अधिकारी ने अपने सुसाइड नोट में ग्राम रसूलपुर के प्रधान व देवरिया प्रधान का बेटे पप्पू तथा किसान युनियन के अध्यक्ष की जातिसूचक गालियों से तंग आकर आत्महत्या का कारण बताया है. त्रिवेंद्र ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि ‘मेरे 8 माह के सेवाकाल में एक भी दिन इन लोगों ने मुझे सुकून से काटने नहीं दिया. मेरी मौत के जिम्मेदार ग्राम रसूलपुर व ग्राम देवरिया के प्रधान व किसान यूनियन के अध्यक्ष प्रदीप शुक्ला उर्फ श्यामू शुक्ला हैं.”

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार किसान पंचायत के मंच पर किसान नेता ने ग्राम विकास अधिकारी त्रिवेंद्र कुमार को ज़लील किया. भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक के अध्यक्ष राकेश चौहान ने अधिकारी से कहा कि ‘घूस देकर आए हो कि आरक्षण से आए हो? कोरम जिले का पूरा होना चाहिए. कामचोर,नालायक, नकारा, निकम्मे…गरीब किसान मजदूरों को उल्टा परेशान करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को जूते मारकर नौकरी से बाहर किया जाएगा. काम भी नहीं करोगे…नौकरी भी सरकार की लोगे..और उसके बाद जब बात पड़ेगी तो आंखें निकलवाकर सड़क पर फिंकवा दूंगा.’

जितनी देर किसान पंचायत होती रही, ग्राम विकास अधिकारी त्रिवेंद्र कुमार को मंच पर खड़ा करके ज़लील किया जाता रहा.

आरक्षण से नौकरी पाने का ताना और दुर्व्यवहार ने एक दलित जाति से ताल्लुक रखने वाले ग्राम विकास अधिकारी की जान ले ली.

 

नवंबर में होनी थी शादी

गौरतलब है कि त्रिवेंद्र का विवाह 28 नवंबर को आज़मगढ़ के एक पीसीएस अधिकारी की बेटी से होना था. त्रिवेंद्र के पिता कोमल प्रसाद कहते हैं, “मेरे बेटे का इस कदर उत्पीड़न किया गया कि उसने ज़िन्दगी के बजाय मौत को चुना. उसकी दो महीने बाद शादी होने वाली थी. वो यह कहते-कहते रो पड़ते हैं कि हम उसकी बारात की तैयारियां कर रहे थे और अब इन कंधों को उसकी लाश उठानी पड़ेगी.” कोमल प्रसाद खुद लखीमपुर के राजकीय पद्धति आश्रम विद्यालय में 33 साल शिक्षक और प्रिंसिपल रह चुके हैं.

लखीमपुर में इस घटना से सरकारी कर्मचारी बहुत खफा हैं. उन्होंने इसके खियाफ धरना-प्रदर्शन भी किया. ग्राम विकास अधिकारी संघ,लखीमपुर के अध्यक्ष विजय शर्मा ने कहा कि दोषियों के विरुद्ध बड़ी से बड़ी कार्रवाई की जाए. उनको अधिक से अधिक सज़ा दी जाए.

इस मामले में पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है जिनमें से चार गिरफ्तार किए गए हैं, लेकिन त्रिवेंद्र को मंच पर ज़लील करने का आरोपी राकेश चौहान और उसका साथी श्यामू शुक्ला अभी फरार है.

 

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