सचेत

जानिए कैसे एक 25 साल का युवक कर रहा है गरीब प्रवासी मजदूरों की मदद.

तर्कसंगत

September 9, 2019

SHARES

आजकल अपने आधार कार्ड/पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र को बैंक खाते और अन्य तमाम चीजों साथ लिंक करना अनिवार्य हो गया है. हालांकि जिनके पास सारे दस्तावेज होते हैं उनके लिए ये आसान होता है, लेकिन जिनके पास दस्तावेज नहीं होता उनके लिए खासी मुश्किल आती है. खासकर उन लोगों के लिए जो नए शहरों में रहने के लिए आते हैं.

24 वर्षीय नरेश सिजापति उर्फ नरेश भाई लोगों को पहचान पत्र दिलाने और सारे पहचान पत्रों को आधार कार्ड से जोड़ने का काम भी कर रहे हैं. यह काम वे सिर्फ 40 रुपये में कर रहे हैं. नरेश के बारे में बात करते हुए, क्रांति बेन ने तर्कसंगत से कहा, “अगर नरेश भाई नहीं होते, तो मैं अभी भी बेरोजगार होती. उन्होंने कुछ ही दिनों में मेरा आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता – सब कुछ बना दिया. उन्होंने मुझे उन सरकारी लाभ योजनाओं के बारे में भी बताया जिनसे मुझे लाभ मिलना था. जैसे- प्रधान मंत्री श्रम योगी मान -धन (पीएम- एसवाईएम) और अटल पेंशन योजना (एपीवाई). उसने मेरे लिए जो किया है वह सराहनीय है. भगवान उसे आशीर्वाद दें.”

 

Panah Foundation

 

दरअसल नरेश को भी कभी ऐसी ही दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. नरेश ने 2017 में पनाह फाउंडेशन की स्थापना की थी. वे एक मोबाइल वैन की तरह अपना ऑफिस चलाते हैं. इस वैन को नरेश भैया की वैन के नाम से जाना जाता है. उन्होंने अभी तक पूरे अहमदाबाद में 23 टीम लीडर्स और 600 से अधिक सदस्य जोड़े हैं. इस वैन को दो लोग चलाते हैं और एक महिला भी है जो ऑटो रिक्शा के जरिए काम संभालती है.

 

Panah Foundation Mobile Van

 

इस अनूठी पहल के बारे में बताते हुए नरेश ने कहा, ‘मैं शहर में हर जगह काम कर रहे एसबीआई कियोस्क को देखता था. ये कियोस्क अधिक से अधिक लोगों को बैंकिंग के दायरे में लाने की कोशिश करते हैं. उसी समय, डिजिटल इंडिया पहल की मदद से छोटे-छोटे सेंटर खुल रहे थे जो दस्तावेज बनवाने में सहायता प्रदान करते हैं.’ दस्तावेज बनवाने में लोगों की मदद करने के लिए पनाह फाउंडेशन ने यूआईडीएआई और भारतीय स्टेट बैंक के साथ समझौता किया है.

अपनी अन्य पहलों के बारे में तर्कसंगत से बात करते हुए, नरेश ने कहा, ‘श्रम संसाधन और सहायता केंद्र के माध्यम से पनाह फाउंडेशन मजदूरों को कौशल और ज्ञान विकास प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है. हम श्रमिकों के लिए “स्वयं सहायता” समूह बनाने की भी योजना बना रहे हैं. नियुक्त किए गए टीम लीडर लगातार मजदूरों की सहायता करने के लिए उपलब्ध रहेंगे, और उन्हें किसी भी समस्या में मदद करेंगे.’ नरेश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि पनाह फाउंडेशन प्रवासी मजदूरों के लिए एक मददगार केंद्र के रूप में उभरे.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...