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सरकार द्वारा ISRO वैज्ञानिकों के वेतन में कटौती, एसोसिएशन नाखुश

तर्कसंगत

Image Credits: Tale Post/UP Varta News

September 10, 2019

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इंडियन स्पेस रिसर्च सेंटर (ISRO) के वैज्ञानिक फिलहाल चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ से संपर्क करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं. दूसरी तरफ  ISRO के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों सहित हजारों सीनियर स्टाफ मेंबर इंक्रीमेंट्स की कटौती का सामना कर रहे हैं.

जी हाँ, पढ़ कर थोड़ा अटपटा लगे, कि एक तरफ सरकार चंद्रयान -2 की सफलता पर इसरो के वैज्ञानिकों की पीठ थपथपा रही है. पूरा देश उनकी इस उपलब्धि और आंशिक मुश्किलों के समय उनके साथ खड़ा था फिर इसरो के वैज्ञानिकों की इंक्रीमेंट्स में कटौती कोई फेक न्यूज़ तो नहीं ? जी नहीं ऐसा नहीं है. दरअसल जब चंद्रयान-2  की लांच की तैयारी चल रही थी,  केंद्र सरकार ने 12 जून 2019 को जारी एक आदेश में कहा है कि इसरो वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को साल 1996 से दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि के रूप में मिल रही, प्रोत्साहन अनुदान राशि को बंद किया जा रहा है.

 

क्या है सरकार का आदेश ?

सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि 1 जुलाई 2019 से यह प्रोत्साहन राशि बंद हो जाएगी. इस आदेश के बाद D, E, F और G श्रेणी के वैज्ञानिकों को यह प्रोत्साहन राशि अब नहीं मिलेगी. इसरो में करीब 16 हजार वैज्ञानिक और इंजीनियर हैं. लेकिन इस सरकारी आदेश से इसरो के करीब 85 से 90 फीसदी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की तनख्वाह में 8 से 10 हजार रुपए का नुकसान होगा. क्योंकि ज्यादातर वैज्ञानिक इन्हीं श्रेणियों में आते हैं. इसे लेकर इसरो वैज्ञानिक नाराज हैं.

 

 

भारत सरकार का मेमोरेंडम 

 

 

न्यू इंडियन एक्सप्रेस को एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि संबंधित ज्ञापन के प्रभावी होने से स्टाफ को हर महीने औसतन 10000 रुपये कम मिल रहे हैं.

इस खबर के मालूम पड़ते ही सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा फूट रहा है.

 

 

स्पेस इंजीनियर्स एसोसिएशन ने ये मांग रखी है

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार अब इसरो के वैज्ञानिकों के संगठन स्पेस इंजीनियर्स एसोसिएशन (SEA) ने इसरो के चेयरमैन डॉ. के. सिवन को पत्र लिखकर मांग की है कि वे इसरो वैज्ञानिकों की तनख्वाह में कटौती करने वाले केंद्र सरकार के आदेश को रद्द करने में मदद करें. क्योंकि वैज्ञानिकों के पास तनख्वाह के अलावा कमाई का कोई अन्य जरिया नहीं है.

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Image Credit: Aaj Tak

 

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Image Credit : Aaj Tak

 

  1. इसरो वैज्ञानिकों के लिए दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि की अनुमति राष्ट्रपति ने दी थी. ताकि देश में मौजूद बेहतरीन टैलेंट्स को इसरो वैज्ञानिक बनने का प्रोत्साहन मिले. साथ ही इसरो वैज्ञानिक भी प्रेरित हो सके. ये अतिरिक्त वेतन वृद्धि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 1996 में अंतरिक्ष विभाग ने लागू किया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा था कि इस वेतन वृद्धि को स्पष्ट तौर पर ‘तनख्वाह’ माना जाए.
  2. छठे वेतन आयोग में भी इस वेतन वृद्धि को जारी रखने की सिफारिश की गई थी. साथ ही कहा गया था कि इसका लाभ इसरो वैज्ञानिकों को मिलते रहना चाहिए.
  3. दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि इसलिए लागू किया गया था कि इसरो में आने वाले युवा वैज्ञानिकों को नियुक्ति के समय ही प्रेरणा मिल सके और वे इसरो में लंबे समय तक काम कर सकें.
  4. केंद्र सरकार के आदेश में परफॉर्मेंस रिलेटेड इंसेंटिव स्कीम (PRIS) का जिक्र है. हम यह बताना चाहते हैं कि अतिरिक्त वेतन वृद्धि और PRIS दोनों ही पूरी तरह से अलग-अलग हैं. एक इंसेंटिव है, जबकि दूसरा तनख्वाह है. दोनों एकदूसरे की पूर्ति किसी भी तरह से नहीं करते.
  5. सरकारी कर्मचारी की तनख्वाह में किसी भी तरह की कटौती तब तक नहीं की जा सकती, जब तक बेहद गंभीर स्थिति न खड़ी हो जाए.

 

इसरो में किसी वैज्ञानिक की भर्ती C श्रेणी से शुरू होती है. इसके बाद उनका प्रमोशन D, E, F, G और आगे की श्रेणियों में होता है. हर श्रेणी में प्रमोशन से पहले एक टेस्ट होता है, उसे पास करने वाले को यह प्रोत्साहन अनुदान राशि मिलती है. लेकिन अब जब जुलाई की तनख्वाह अगस्त में आएगी, तब वैज्ञानिकों को उसमें कटौती दिखेगी.

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