पर्यावरण

लोहे के बर्तन में खाना पकाकर यहाँ अनीमिया को मात दे रही हैं महिलाएं

तर्कसंगत

Image Credits: Uiowa

September 11, 2019

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हम आप सभी ने बचपन में अपने घरों में लोहे के बर्तन देखे होंगे, जो अब शायद घर के स्टोर रूम में या किसी बोड़े में बंद किसी कोने में रखे होंगे. कारण कि उसकी साफ़ सफाई के झंझट से और कुरूप रंग के बजाए हमारे रसोई में नॉन स्टिक बर्तनों ने ले ली. जो सुन्दर भी और साफ करने में आसान भी.

मगर इस लोहे के बर्तन के अपने फायदे थे जो हमें अपने घर की बूढ़ी दादी नानी से सुनने को मिलेगी. शुक्र है कि ग्रामीण भारत में ही सही मगर अभी भी इसका चलन बंद नहीं हुआ है. इसके क्या फायदे हैं इसकी एक छोटी झलक आपको इस खबर से मिलेगी.

झारखंड की राजधानी रांची से 70 किलोमीटर दूर तोरपा ब्लॉक में 85 फीसदी महिलाएं अनीमिया की बीमारी से पीड़ित थी. इस वजह से उन्हें पीरियड के दिनों में अधिक रक्तस्राव, कई तरह के दर्द और अन्य समस्या रहती थी. यहां काम करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ता को एक आइडिया आया और उन्होंने यहां रहने वाले लोगों से लोहे की कढ़ाई में खाना बनाने के लिए कहा.

इलाके में काम करने वाले एनजीओ प्रोफेशनल असिस्टेंस फॉर डेवलपमेंट एक्शन या प्रदान ने पब्लिक हेल्थ रिसोर्स नेटवर्क के साथ मिलकर इलाके के 2,000 परिवारों को लोहे की कढ़ाई और लोहे के बर्तन में खाना बनाने की सलाह दी. इसके महज 6 महीने के अंदर इन परिवारों का हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ गया.

अनीमिया क्या है और इसके प्रभाव ?

भारत की 50 फीसदी महिलाएं अनीमिया से पीड़ित हैं. अनीमिया नाम की इस बीमारी में खून में हीमोग्लोबिन का लेवल कम हो जाता है. इस वजह से पीरियड्स के दौरान जरूरत से ज्यादा ब्लीडिंग, बहुत ज्यादा थकान और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में तेज दर्द जैसे तकलीफ होती है.

अनीमिया रक्त से संबंधित बीमारी है जो महिलाओं में ज्यादा पायी जाती है. शरीर में आयरन की कमी के कारण यह समस्या होती है. विटमिन बी12, फोलिक एसिड, कैल्शियम युक्त आहार आदि अनीमिया से बचाव में मदद करते हैं. इन चीजों से इस बीमारी के प्रभाव को कम किया जा सकता है. अनीमिया से ग्रस्त लोगों को फल और हरी सब्जियां ज्यादा खाने की सलाह दी जाती है.

 

शरीर के केमिकल रिएक्शन में मदद

अभियान की शुरुआत करने वाले प्रेम शंकर ने कहा, “जब हमने इलाके की महिलाओं से बात की तो उन्होंने हमें अपनी बीमारियों के बारे में बताया. हमने उन्हें खाना बनाने के लिए लोहे के बर्तन इस्तेमाल करने की सलाह दी. इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियां और साइट्रिक एसिड खाने के लिए भी कहा. साइट्रिक एसिड आयरन को एब्जॉर्ब करने में मदद करता है, जिससे अनीमिया में कमी आती है.”

लोहे के बर्तन में खाना पकाने की वजह से इलाके की महिलाओं को शरीर में होने वाले दर्द में राहत मिली, थकान कम लगने लगी, घुटने का दर्द घटा और मासिक धर्म से जुड़ी दिक्कतों में भी काफी सुधार हुआ. इलाके की महिलाओं का दावा है कि उनके गैस्ट्रिक की दिक्कतें सुधर गई हैं और बहुत सी महिलाएं इस बदलाव के बाद दूसरी बार मां बन पाईं हैं.

 

लोगों के सोच में बदलाव

लोहे के बर्तन में खाना पकाने से इस इलाके की महिलाओं की अनीमिया की समस्या सुधरने के बाद अब दूसरे जिले में भी इसे ले जाने की पहल की जा रही है. पिछले कुछ सालों में खाना पकाने के लिए लोहे के बर्तनों का उपयोग बढ़ा है. अब शहरों में भी इस ट्रेंड की वापसी हो रही है. लोहे के बर्तन में खाना पकाने से दूसरे बर्तनों की तुलना में वक्त भी 15% तक कम लगता है.

इस इलाके में सेल्फ हेल्प ग्रुप की स्वस्थ बदलाव दीदी बिश्वासी टोपने ने कहा, “लोहे के बर्तन में खाना पकाने से ना सिर्फ मासिक धर्म के वक्त होने वाली दिक्कत कम हुई है, बल्कि अन्य कई समस्या से भी मुक्ति मिली है.” अब जिला प्रशासन भी इस पहल में मदद करने की सोच रहा है. ग्रामीण महिलाओं में प्रोटीन की कमी दूर करने के लिए अब मशरूम की खेती और उसके खपत को बढ़ावा देने के प्रयास किये जा रहे हैं.

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