सप्रेक

बग़ैर हाथ-पैर के वो वायलिन बजाती है, पेंटिंग करती है मगर ज़िंदगी से शिकायत नहीं करती है

तर्कसंगत

September 17, 2019

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कई छोटे मोटे प्रॉब्लम होते हैं जिनका सहारा लेकर हम या तो हार मान लेते हैं या कामचोरी करने लगते हैं. यदि आपको लगता हैं कि सिर्फ आपकी जिंदगी ही मुश्किलों से भरी हैं तो जरा इस बहादुर और हुनरमंद लड़की की कहानी पढ़ लीजिये.

केरल के कोझ‍िकोड की रहने वाली 17 वर्षीय नूर जलील एक दिव्यांग लड़की हैं. जन्म से ही उनके हाथ बांह के आगे और पैर घुटनों के नीचे विकसित नहीं हुए हैं. नूर खुद को ना तो मजबूर मानती हैं और ना ही बेचारी समझती हैं. नूर जीवन में हमेशा सकारात्मक रहती हैं. उसके लिए कोई भी काम नामुमकिन नहीं हैं. नूर के अंदर कई सारे हुनर हैं. जैसे वो पेंटिंग बना सकती हैं, वायलन बजा सकती हैं.

इसके अलावा, वह एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं और विभिन्न संगठनों को दान करती हैं, मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के साथ काम करती हैं. उनका मानना है कि निरंतर समर्पण आपको कुछ भी दिला सकता है.

बचपन में नूर अपने घरवालों से पूछती कि दूसरों की तरह उसक हाथ-पैर क्यों नहीं है? घरवाले उससे ये कहते कि समय के साथ हाथ-पैर आ जाएंगे और नूर इसी को सच मान लेती. मगर जब 10 साल तक उन्होनें अपने आप में कुछ परिवर्तन दिखा तो वो समझ गयी कि उनसे झूठ  बोला जा रहा है.

New Indian Express से हुए एक बात-चीत में नूर ने कहा, मैं हमेशा नई चीज़ें सीखना चाहती थी. मैं अपनी विकलांगता को आशीर्वाद के रूप में देखती हूं. मैं एक सिविल सर्विस अफ़सर बनना चाहती हूं. मैं दिव्यांगों के हक़ में आवाज़ उठाना चाहती हूं. मैं अपना घर बनाना चाहती हूं. मेरे बकेट लिस्ट में नासा जाना और एवरेस्ट की चढ़ाई करना भी है.

 

Noor Jaleela Kochi
इमेज कर्टसी: टाइम्स नाउ

 

पेंटिंग में रूचि

कठिनाइयों के बावजूद, नूर ने टाइम पास के रूप में पेंटिंग शुरू की और खुद के प्रयासों से इसमें महारत हासिल की. “मैंने बहुत कम उम्र में एक पेंसिल के साथ स्क्रिबलिंग शुरू कर दिया था. मैंने अपने हाथों के बिना ब्रश को पकड़ने का एक तरीका पता लगाकर अपनी सीमा को पार कर लिया. यह धीरे-धीरे विभिन्न स्कूल प्रतियोगिताओं के माध्यम से विकसित हुआ. मेरे पिता ने मुझे एक पेंटिंग क्लास में भेजा था जब मैं क्लास 5 में पढ़ती थी.  हालांकि यह केवल एक छोटे के समय के लिए ही था मगर मैं वहां से अलग-अलग चित्रों के बारे में जानने में कामयाब रही.

 

Noor Jaleela Paintings
इमेज कर्टसी: मनोरमा ऑनलाइन

 

दिसंबर 2017 में कोझीकोड ललिता कला अकादमी आर्ट गैलरी में विकलांग बच्चों के साथ काम करने वाली एक गैर सरकारी संस्था ‘ड्रीम ऑफ अस’ द्वारा आयोजित उनकी पहली पेंटिंग प्रदर्शनी में उनकी दो पेंटिंग शामिल थीं.

 

वायलिन में भी रूचि है

कुन्नमंगलम के औक्सिलियम नवज्योति हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने वाली नूर अपने पढाई से समय निकाल कर उन्होनें वायलिन भी सीखा है. “मैंने पाठ्यक्रम के भाग के रूप में कक्षा सातवीं में वायलिन बजाना शुरू किया. लेकिन शुरुआत आसान नहीं थी. मैंने इसे नीचे की ओर रखकर सेलो की तरह बजाया. मैंने हेयरबैंड का उपयोग करके इसको बांध दिया करती हूँ. अब मैं आसानी से बजा सकती हूँ.”

उभरती कलाकारा अपने परिवार को अब तक हासिल की गई हर चीज का श्रेय देती हैं. “मैं कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में पैदा हुई थी, मेरी हालत देखकर, डॉक्टर भी थोड़ा हिचकिचा रहे थे. लेकिन मेरे माता-पिता को संदेह नहीं था. वो मेरी छोटी से छोटी हरकतों से खुश होते थे. वे मुझे प्रेरित करते रहे.”

 

Noor Jaleela

 

नूर ने मशहूर गायिका के.एस.चित्रा के साथ गाना भी गाया है. नूर के पिता अब्दुल करीम कुछ व्यवसायों के प्रबंधन के अलावा एक बिजली ठेकेदार के रूप में काम करते हैं. उनकी माँ अस्माबी ने महाराजा के कॉलेज, एर्नाकुलम से रसायन विज्ञान में स्नातक किया है. उनकी बड़ी बहन आयशा वर्तमान में बीडीएस कर रही हैं.

 

Noor Jaleela with Chitra
इमेज कर्टसी: माध्यमम

 

नूर की ज़िन्दगी हम सभी के लिए मिसाल है. बड़ी से बड़ी मुसीबतें आए, हमें उनमें भी अवसर ढूंढना चाहिए.

 

 

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