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क्या है ई-सिगरेट, क्यों हुई बैन और इसे रखने पर क्या क्या सजा हो सकती है?

तर्कसंगत

September 19, 2019

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भारत में तत्काल प्रभाव से ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाया जाएगा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 18 सितंबर को एक संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की। सीतारमण ने कहा कि ई-सिगरेट एक बड़ी समस्या बन गई है और धूम्रपान करने वाले बच्चों के जोखिम को बढ़ाती है। ई-सिगरेट को “स्टाइल स्टेटमेंट” कहते हुए उन्होंने कहा कि लोग शांत दिखने के साथ-साथ ई-सिगरेट की आदत में पड़ रहे हैं।
सीतारमण ने कहा कि ई-सिगरेट के 400 से अधिक ब्रांड हैं जो भारत में निर्मित नहीं हैं लेकिन देश में 150 से अधिक स्वादों के साथ बेचे जाते हैं।

सुश्री सीतारमण ने घोषणा करते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। ई-सिगरेट से संबंधित उत्पादन, निर्माण, आयात या निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन पर प्रतिबंध है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि “अमेरिकी में सात लोगों की मौत ई-सिरगेट की वजह से हुई है. वहां इसका इस्तेमाल बहुत तेज़ी से बढ़ता जा रहा है।”

 

ई सिगरेट का कारोबार करने वाले को पहली बार एक साल की सज़ा और एक लाख का जुर्माना हो सकता है। दूसरी बार पकड़े जाने पर 3 साल तक की सज़ा और 5 साल तक की जेल हो सकती है। ई सिगरेट रखने पर भी 6 महीने की जेल और 50,000 तक का जुर्माना संभव हैं।

बुधवार को एक अध्यादेश के ज़रिए इसे लागू किया जाना है। इस फ़ैसले के तहत न तो ई सिगरेट बनाई जाएगी, न बेची जाएगी और न ही उसका प्रचार होगा। ई-सिगरेट, हीट-न-बर्न स्मोकिंग डिवाइसेस, वेप एंड ई-निकोटीन फ्लेवर वाले हुक्का जैसे धूम्रपान उपकरणों पर प्रतिबंध लगाना नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिनों के एजेंडे की प्रमुख प्राथमिकताओं में था।

क्या है इ सिगरेट ?

ई-सिगरेट बैटरी से चलने वाले ऐसी डिवाइस है जिनमें लिक्विड भरा रहता है। यह निकोटीन और दूसरे हानिकारक केमिकल्‍स का घोल होता है। जब कोई व्यक्ति ई-सिगरेट का कश खींचता है तो हीटिंग डिवाइस इसे गर्म करके भाप में बदल देती है। इसीलिए इसे स्‍मोकिंग की जगह वेपिंग कहा जाता है। ई-सिगरेट में निकोटीन और दूसरे हानिकारक केमिकल्स का घोल होता है। निकोटीन अपने आप में ऐसा नशीला पदार्थ है जिसकी लत लग जाती है। इसलिए विशेषकर हृदय रोगियों को ई-सिगरेट से दूर रहना चाहिए।

 

इ सिगरेट की शुरुआत

ई सिगरेट की शुरुआत आम सिगरेट की लत छुड़ाने के लिए हुई थी, यह बैटरी से इस्तेमाल होती है.लेकिन विकसित देशों में खासकर युवाओं और बच्चों में ये नई महामारी में बदलती दिख रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी कहा था कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट से  पारंपरिक सिगरेट जैसा ही नुक़सान होता है। अमरीका में हुए एक अध्ययन के आंकड़ों के अनुसार, वहां 10वीं और 12वीं के स्कूली बच्चों में ई-सिगरेट का चलन 77.8 प्रतिशत बढ़ा है जबकि मिडिल स्कूल के बच्चों में ई-सिगरेट लेने का चलन 48.5 प्रतिशत बढ़ा है। युनाइटेड स्टेट में मिशिगन के बाद न्यूयॉर्क सिटी दूसरा ऐसा स्टेट बन चुका है, जहां फ्लेवर्ड ई-सिगरेट पर बैन लगाया जा चुका है।

 

सिगरेट पर प्रतिबन्ध क्यों नहीं ?

1.3 बिलियन की आबादी के साथ, भारत तंबाकू निर्माताओं के लिए एक आकर्षक बाजार है। विश्व स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार, भारत समग्र तंबाकू खपत सूची में दूसरे स्थान पर है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि लगभग 10 लाख लोग तम्बाकू के कारण मरते हैं। भारत में, बीड़ी पारंपरिक रूप से देश के ग्रामीण हिस्सों में खपत होती है, 2011 में 5.8 लाख से अधिक लोग मारे गए।

इस निर्णय के बाद ट्विटर पर कई सारी प्रतिक्रियाएं आयी नहीं, जिनमें से कुछ का पूछना है कि, क्यों नहीं शराब पर प्रतिबंध लगाते हैं?

 

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