पर्यावरण

सियाचिन में दुश्मनों के साथ कचरे की भी सफाई कर रही है भारतीय सेना

तर्कसंगत

Image Credits: AzocleanTech/Webdunia

September 25, 2019

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पिछले 40 साल से भारतीय सेना सियाचिन में तैनात है और इन पर्वतीय इलाकों पर अपनी पकड़ को मजबूत रखने के लिए दिन रात चौबीस घंटे माइनस डिग्री तापमान में सैनिक डटे हुए हैं. इतने सालों में रसद भेजने के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है. लेकिन जो रसद के इस्तेमाल के बाद जो कचरा बच जाता है वो सियाचिन में ही रह जाता है. पिछले 40 साल में इस इस कदर कचरा बढ़ गया कि उसे साफ करना जरूरी हो गया.

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर दुनियाभर में छिड़ी बहस के बीच भारतीय सेना ने दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से पिछले 19 महीने में 130 टन कचरा साफ किया है। भारतीय सेना के अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि सियाचिन स्वच्छता अभियान के तहत जनवरी 2018 से अब तक यह कचरा साफ किया गया है। दरअसल, सेना के जवानों की तैनाती के कारण सियाचीन की चोटी पर कचरा बढ़ता जा रहा था।

भारतीय सेना दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से हर साल करीब 100 टन कचरा उठाने का लक्ष्य रखी है. यह सियाचिन को साफ करने की योजना का हिस्सा है. अनुमान के अनुसार, यहां हर साल 236 टन कचरा पैदा होता है. जनवरी 2018 से सियाचिन को साफ करने के अभियान के तहत यहां से 130 टन कचरा सेना ने साफ किया है.

भारतीय सेना ने चोटी पर तैनात सैनिकों के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेड्यूर (एसओपी) तैयार किया है। इसके तहत सभी जवानों को नीचे लौटते समय अपने साथ वहां रहने के दौरान पैदा हुआ कचरा भी साथ लाना होता है। अधिकारियों के अनुसार नीचे लाए गए कचरे में 48.14 टन अपशिष्ट पदार्थ सड़ने-गलने योग्य नहीं है जबकि 40 टन सड़ जाएगा। सैनिक अपने साथ 41.45 टन धातु अपशिष्ट भी लाए हैं, जिसमें गोलियों के खोखे आदि चीजें शामिल हैं।

एक अधिकारी ने कहा कि अभियान में नागरिक भी भाग ले रहे हैं और कचरे को अलग बैरल में डाल रहे हैं। कड़ाके की ठंड की वजह से यहां कचरा सड़ता नहीं है। सेना की लगातार कोशिश है कि ग्लेशियर में कचरा कम हो।

48 टन से ज्यादा बायोडिग्रेडेबल कचरा, 40.32 टन नॉन मेटेलिक कचरा और 41.45 टन नॉन बायोडिग्रेडेबल मेटेलिक कचरे को सियाचिन ग्लेशियर से हटाया गया है। यह कचरा 16,000 से 21,000 फिट की ऊंचाई वाले सेना के पोस्ट और उसके आस पास के इलाके से हटाया गया।

अधिकारियों ने बताया कि सेना ने कार्टन और कागज के कचरे के निस्तारण के लिए एक पेपर बेलर मशीन भी लगाया है। इससे दोबारा उपयोग में लाने योग्य वस्तुएं तैयार की जा सकती हैं। गैर धात्वित पदार्थों के निस्तारण के लिए तीन विभिन्न स्थानों पर इनसिनेट्रर मशीनें (कचरे को टुकड़े-टुकड़े करने वाली मशीन) लगाई गई है। सेना धातु के अपशिष्ट पदार्थों के निस्तारण के लिए औद्योगिक क्रशर भी उपलब्ध करवाने की कोशिश कर रही है।

 

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