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अपने ही अंदाज़ में भारतीय रेल पर भरोसा बढ़ाने का काम कर रहे हैं ये कर्मचारी

तर्कसंगत

Image Credits: Facebook/Rakesh Sharma

September 25, 2019

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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कार्यरत स्टेशन प्रबंधक राकेश शर्मा कई लोगों के लिए फ़रिश्ता साबित हो रहे हैं. शर्मा ने अपने व्यक्तिगत प्रयासों से अब तक चार वर्षों में 78 यात्रियों को स्टेशन या ट्रेन में छूटी चीज़ें उन्हें सही-सलामत उनके मालिक तक पहुंचा चुके हैं. इन सामानों में मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप, बैग, ज़रुरी दस्तावे़ज़ और यहां तक कि गहने भी शामिल हैं. बीते दिनों सिडनी का एक नागरिक भारत यात्रा पर आया था और उसका लैपटॉप गायब हो गया था जिसे शर्मा ने लौटाने में काफी मदद की थी. शर्मा के इस काम की काफी चर्चा हुई.

 

खुद ढूंढते हैं सामान के असल हक़दार को

शर्मा ने दिप्रिंट को बताया- ‘कुली या फिर ट्रेन में कार्यरत कर्मचारी या फिर कई बार यात्री भी लावारिस सामान ऑफिस तक पहुंचा देते हैं, जिसे लॉस्ट प्रॉपर्टी ऑफिस(एलपीओ) में जमा कराया जाता है. औपचारिक तौर पर हम एक (इन्वेंट्री) सूची बनाते हैं जिसमें आरपीएफ़(रेलवे प्रोटेक्शन फ़ोर्स) के कर्मचारी और उस व्यक्ति का हस्ताक्षर होता है जिसे सामान मिला है. यह तो हुई औपचारिक प्रक्रिया. लेकिन होता यह है कि लॉस्ट प्रॉपर्टी ऑफिस में सामानों की जानकारी लेने बहुत कम लोग ही जाते हैं, इसलिए मेरे पास जो सामान आता है उसको रजिस्टर कर मैं अपने पास रखता हूं और सामान के मालिक को ढूंढता हूं. यदि मुझे सामान का मालिक नहीं मिलता तो अखिर में लॉस्ट प्रॉपर्टी ऑफिस में सामान जमा करा देता हूं.’

 

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जिस कोच और सीट पर सामान छूटता है, उस आरक्षित सीट के यात्री का पता पीएनआर (पैसेंजर नेम रिकॉर्ड) के जरिए पता किया जाता है, अगर उसमें फोन नंबर होता है तो फोन के जरिए वर्ना पते के जरिए उनके सामान की जानकारी दी जाती है. कई बार ऐसा भी हुआ है कि उनका नाम तो पता चल जाता है लेकिन पता या फोन नंबर नहीं मिलता…ऐसे में सोशल मीडिया बहुत बड़ा सहारा साबित होता है. फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप के जरिये मैं पाए गए सामान की जानकारी वायरल करने की कोशिश करते हैं.

 

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यदि कोई व्यक्ति सामान पर क्लेम करता है तो उससे टिकट की कॉपी और सामान की जानकारी मांगते हैं. यदि सारी जानकारी सामान से मेल खाती है तो व्यक्ति को सामान सौंप देते हैं. अपनी इसी मेहनत से शर्मा न सिर्फ भारतीय बल्कि विदेशी पैसेंजेर का भी सामान लौटा चुके हैं. इसी साल मार्च में ऑस्ट्रेलिया से भारत आये पॉल मलाम नाम के एक विदेशी का लैपटॉप चंडीगढ़ से दिल्ली आने वाली ट्रेन में छूट गया था. शर्मा ने फेसबुक के माध्यम से उस पॉल मलाम को ढूंढ निकाला जिनका यह लैपटॉप था.

फिलहाल अभी उनके पास कपड़ों से भरा एक बैग और एक सोने का लॉकेट है. उन्होंने न्यूज़ 18 को बताया – ‘लॉकेट हमें ट्रेन नंबर 12006 केएलके शताब्दी के कोच नंबर सी-2 में 25.05.2019 को मिला है जिसकी तस्वीरें हमने वायरल कर दी है लेकिन अभी तक उस पर किसी ने क्लेम नहीं किया है.’

 

रेलवे के इस अधिकारी को ट्रेन में मिला सोने का लॉकेट, कहीं आपका तो नहीं?

 

तो अब यदि आपका भी कोई सामान नई दिल्ली स्टेशन पर छूट जाए तो मुमकिन है कि आप को सामान वापस मिल सकता है बशर्ते कि वह राकेश शर्मा तक पहुंचा हो.

 

 

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