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गुरु रहमान: वो शिक्षक जो 11 रूपये में भी किसी को आईएएस बना सकता है

तर्कसंगत

Image Credits: Aim Civil Services

September 30, 2019

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बिहार के अदम्य अदिति गुरुकुल के हजारों छात्रों के लिए, जो आज सब इंस्पेक्टर, आईएएस, आईपीएस, आईआरएस और सीटीओ अधिकारी बन गए हैं, गुरु रहमान वह शिक्षक हैं जिन्होंने उनकी दुनिया बदल दी।

डॉ मोतीर रहमान खान ने 1994 में कोचिंग कक्षाएं शुरू की, क्योंकि उन्हें प्यार हो गया था। प्यार वो भी एक हिन्दू लड़की से और उनका प्यार जीतने के लिए इन्होनें हिन्दू विश्विद्यालय से एमए में टॉप किया। घर परिवार वाले इनकी शादी को माने नहीं मगर सच्चे प्यार की इज्जत रखते हुए इन्होनें शादी की और फलस्वरूप बिरादरी से भी निकाले गए।

 

उन्हें साल 1994 में बिहार में 4,000 उप निरीक्षकों की भर्ती के दौरान प्रसिद्धि मिली; जिनमें से 1,100 रहमान के छात्र थे। तब रहमान बिहार में हर किसी के लिए जाना-पहचाना नाम बन गए और राज्य के हर कोने से छात्र उनकी कक्षाओं में आने लगे।

इसके अलावा एक और घटना ने रहमान का कोचिंग कक्षाओं के प्रति नजरिया बदल दिया। एक बार एक छात्र उनके पास मार्गदर्शन के लिए आया, क्योंकि उसके पास कोचिंग के लिए पैसे नहीं थे। पर रहमान को पता चला कि वह छात्र बहुत ही मेहनती और काबिल है। इसलिए उन्होंने उसे केवल 11 रूपये लेकर अपनी कोचिंग क्लास में आने के लिए कहा। यही छात्र आज उड़ीसा के नौपड़ा का जिला अधिकारी है।

इसके बाद गरीब तबकों से आने वाले छात्रों से रहमान केवल 11 रूपये लेकर उन्हें प्रशिक्षित करते थे। वे हमेशा छात्रों से पूछते कि वे कितनी फीस दे सकते हैं। जो कुछ भी छात्र उन्हें देते, वे उसी में उन्हें पढ़ाते थे।

 

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बेटर इंडिया से बात करते हुए उन्होनें बताया  “10,000 से अधिक छात्रों ने मेरी अकादमी से अध्ययन किया है। हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार फीस देता है। किसी ने मुझे कभी धोखा नहीं दिया है”।

साल 2007 तक, रहमान को गुरु रहमान के नाम से जाना जाने लगा। उन्होंने अपनी बेटी के नाम पर अपनी अकादमी को अदम्य अदिति गुरुुकुल का नाम दिया। रहमान और अमिता धार्मिक सद्भावना का प्रतीक भी बन गए हैं क्योंकि उन्होंने अपने बच्चों के नाम से उपनाम को हटा दिया। उन्होंने अपने बच्चों का नाम अदम्य अदिति और अभिज्ञान अर्जित रखा।

 

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बिहार के पूर्णिया जिले के एक सेवानिवृत्त प्राथमिक विद्यालय शिक्षक की बेटी मीनु कुमारी झा (उनकी एक अन्य छात्र) आईपीएस अधिकारी बनना चाहती थी। वह आज आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने मात्र 11 रूपये देकर रहमान के यहां पढ़ाई की।

प्राचीन इतिहास और संस्कृति में ट्रिपल एमए और पीएचडी, गुरु रहमान ने अब तक 10,000 से अधिक छात्रों को पढ़ाया है, जिनमें से 3,000 छात्रों को उप निरीक्षकों, 60 को आईपीएस अधिकारी और 5 को आईएएस अधिकारी के रूप में चुना गया है और कई अन्य आधिकारिक पदों पर हैं।

 

 

वर्तमान में, रहमान लगभग 2,000 छात्रों को पढ़ाते हैं। इन छात्रों ने सामाजिक सुधार के लिए टीम भी बनाई है।

रहमान की अगुवाई में छात्रों की टीम ने अंगदान, गंगा घाट की सफाई और दिल्ली से लेह तक ट्राईसाइकिल पर यात्रा कर के दिव्यांग अनुराग चन्द्र के लिए धन जुटाने जैसे कई जागरूकता अभियान शुरू किए हैं।

बिहार के अलावा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और झारखंड के छात्र भी यहां आते हैं और 11 से 100 रुपये के बीच कोई फीस देकर कोचिंग प्राप्त करते हैं। ये छात्र सफल पदों पर पहुंचने के बाद, अकादमी और रहमान द्वारा किये जा रहे समाज सुधार के कार्यों में भी दान करते हैं।

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