पर्यावरण

सिंगल यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ जागरूकता के लिए इस व्यक्ति ने निकाला अनूठा उपाय

तर्कसंगत

Image Credits: The News Minute

October 3, 2019

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पलक्कड़ जिले के दीपक वर्मा ने 24 घंटे में 100 किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा की है, उनके हाथ में एक बोर्ड भी थी जिसमें लिखा था, “सार्वजनिक स्थान पर कूड़ा न फेंके”। लेकिन जनता का ध्यान आकर्षित करने के लिए केवल इतना ही नहीं उन्होंने प्लास्टिक के कचरे जैसे चिप्स पैकेट, शैम्पू की बोतलें और प्लास्टिक के कंटेनर, अन्य प्लास्टिक से एक कपड़ानुमा चीज़ तैयार की थी जिससे उन्होनें खुद को ढक रखा था।

2 अक्टूबर को, दीपक, जो एक पर्यावरणविद् हैं और पलक्कड़ जिला सुचितवा मिशन के लिए एक संसाधन व्यक्ति हैं, ने पलक्कड़ से एर्नाकुलम जिले के लिए पैदल यात्रा पूरी की, जिसमें 35 किलोग्राम का प्लास्टिक कचरा उनके शरीर से बंधा हुआ था।

उन्होंने विक्टोरिया कॉलेज पालक्काड से 1 अक्टूबर, सुबह 8 बजे दो स्वयंसेवकों के साथ चलना शुरू किया और 24 घंटे के भीतर एर्नाकुलम दरबार हॉल के मैदान तक पहुँच अपनी यात्रा को समाप्त किया। दीपक ने अपने मिशन को पूरा करने के बाद द न्यूज़ मिनट को बताया, ”इस यात्रा का उद्देश्य जनता के बीच जागरुकता पैदा करना था, जिससे लोग सार्वजनिक स्थानों पर प्लास्टिक कचरा नहीं फेंके।”

उनका उद्देश्य प्लास्टिक कचरे को कम करने, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण के प्रयासों पर जागरूकता फैलाना है। अपने मिशन के दौरान उन्होंने प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के बारे में भी लोगों से बात की।

प्लास्टिक कचरे की अव्यवस्था और बढ़ती संख्या देखकर, उन्होंने  ’24 -ऑवर क्लीन इंडिया’ अभियान शुरू किया। इसके शुरुआत में, वह पलक्कड़ में कोई विशेष सड़क या क्षेत्र का चयन करते और 24 घंटे के भीतर उस जगह को अकेले साफ़ करते।

 24 घंटे में खत्म करने वाली ये उनमकी चौथी यात्रा थी। उन्होंने जागरूकता के लिए के लिए इन सफाई अभियानों से एकत्र प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल किया।

उनका सबसे पहला 24 घंटे का अभियान 2018 फरवरी में था, जहां उन्होंने 4,000 किलोग्राम कचरे का संग्रह किया। इसके बाद 16 किलोमीटर की दूरी को साफ करते हुए, उन्होंने एक लाख से अधिक चॉकलेट और टॉफी रैपर एकत्र किए।

उन्होनें द न्यूज़ मिनट से बात करते हुए बताया “इस सैर के लिए, मैंने शुरुआत में 1,400 प्लास्टिक वस्तुओं का चयन किया, जिनका हम दैनिक आधार पर उपयोग करते हैं, लगभग 700 प्लास्टिक कवर और 700 प्लास्टिक के अलग-अलग बोतल। उनमें से, हमने 600 कम वजन वाली वस्तुओं का चयन किया और इसे मैंने कपड़े के रूप में सिला।”

दीपक इस बात से खुश हैं कि उनके इस कैंपेन को स्थानीय लोगों का भी समर्थन मिल रहा है।

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