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जमशेदपुर के इस इंजीनियर के काम को देख कर इंसानियत पर भरोसा कायम रहता है

तर्कसंगत

October 15, 2019

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एक राष्ट्र के रूप में, हम अभी भी लाखों वंचितों को भोजन प्रदान करने की समस्या से जूझ रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय लिस्टिंग को देखते हुए, वेल्टथुन्गेरिल्फे और कंसर्न वर्ल्डवाइड द्वारा तैयार वैश्विक भूख सूचकांक (जीएचआई) ने भारत को 103 वें स्थान पर रखा। लेकिन ऐसी विकट परिस्थितियों में भी, हमारे बीच कुछ ऐसे लोग हैं जो भोजन की कमी, भूख और भुखमरी के मुद्दे को हल करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

पेशे से एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हरि सिंह, अपने शहर, जमशेदपुर, झारखंड से भूख मिटाने के दृष्टिकोण के साथ काम कर रहे हैं। मानवता की सेवा करने के जज़्बे ने उन्हें ‘वायस ऑफ़ ह्यूमैनिटी’ स्थापित करने के लिए प्रेरित किया जिसका एकमात्र उद्देश्य है कि कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोये।

 

Hari Singh Feeding People

 

वॉइस ऑफ़ ह्यूमैनिटी

2015 में हरि द्वारा कुछ युवा स्वयंसेवकों के साथ शुरू किया गया, यह गैर-लाभकारी संगठन आज विविध पृष्ठभूमि के लोगों को जोड़ता है जो अपनी सेवा के साथ जरूरतमंदों की मदद करना चाहते हैं। वर्तमान में, वे 250 से अधिक सदस्यों की एक टीम के साथ काम कर रहे हैं और गरीबों और वंचितों की मदद के लिए कई अभियान चला रहे हैं।

पार्टियों, क्लब समारोहों, विवाह समारोहों से बचा हुआ भोजन एकत्र करना और रात में इसे बेघर और भूखे लोगों को प्रदान करना केवल उस समर्पण के साथ संभव हो गया है जिसके साथ वे काम करते हैं। समाज को उनकी वास्तविक सेवा के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा मिली है। हरि सिंह का साक्षात्कार गौतम गंभीर ने उनके टॉक शो में हाल ही में किया था और उनके काम के बारे में बताया।

 

हरि सिंह लोगों को खिलाते हुए

 

तर्कसंगत  साथ अपने अनुभवों को साझा करते हुए , हरि कहते हैं, “मुझे हमेशा डस्टबिन में फेंके गए भोजन को निकाल कर खाते लोगों को देखकर दुःख होता था। हर दिन, पार्टी फंक्शन में बहुत सारा भोजन बर्बाद हो जाता है, जबकि दूसरी ओर उन्हीं सड़कों पर ऐसे लोग सोते हैं जो एक दिन में एक वक़्त का खाना भी नहीं खा पाते। इस असमानता  के बारे में सोचकर, मैंने ऐसे लोगों की मदद करने के लिए संगठन शुरू किया। उनकी सेवा करने से, मुझे लगता है कि मैं मानवता में खोए हुए विश्वास को फिर से जागृत करने और लोगों को एक बड़े लक्ष्य की दिशा में काम करने के लिए एक साथ लाने में सक्षम हूं। ”


भूखे को खाना खिलाना

मिशन अन्नपूर्णा उनके प्रमुख अभियानों में से एक रहा है जिसके माध्यम से उन्होंने हजारों जरूरतमंदों या सड़कों पर बेघर लोगों की सेवा की है। ऐसा करने में, वॉयस ऑफ ह्यूमैनिटी बचे हुए अधिक भोजन के उपयोग में सहायक है जो कि व्यर्थ चला जाता है और इसे उन लोगों को दिया जाता है जो भोजन की कमी में जी रहे हैं।

जैसे ही उन्हें बचे हुए भोजन के बारे में किसी समारोह या समारोह से कॉल आता है, वॉयस ऑफ ह्यूमैनिटी आधे घंटे में मौके पर पहुंच जाती है। इसके बाद वे देर रात 1 बजे तक भी भोजन वितरित करते हैं। सोशल मीडिया उनके इस काम को आसान बनाता है, और इससे उन्हें कई समान विचारधारा वाले लोगों के साथ जुड़ने में मदद मिलती है।

हरि अपनी टीम के सदस्यों को श्रेय देते हैं, जो दिसंबर की सर्दियों के दौरान भी सहजता से काम करते हैं, बस यह सुनिश्चित करने के लिए कि भोजन भूखे या कुपोषित तक पहुंचे।

 

हरि सिंह लोगों को खिलाते हुए

 

हरि बताते है कि वो खाने की सुविधा के देने के अलावा, लोगों और बच्चों को शिक्षित करने के लिए, मिशन साक्षर जैसे कई अन्य अभियानों पर काम कर रहे हैं ।

“हमारी टीम ने देवनगर बस्ती में लगभग 90 बच्चों को पढ़ाया है जो कुष्ठ रोग से पीड़ित हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता दिन-ब-दिन गिरती जा रही है। ऐसे पृष्ठभूमि में रहनेवाले बच्चे सबसे ज्यादा पीड़ित होते हैं और वे इस तरह के गंभीर परिस्थितियों में अपनी शिक्षा जारीनहीं रख पाते इसलइए हमें इन्हें अक्सर प्रेरित करने की आवश्यकता है,” हरि ने तर्कसंगत को बताता।

 

हरि सिंह लोगों को खिलाते हुए

 

प्रमुख अभियान

‘वाल ऑफ ह्यूमैनिटी’ की उनकी कैंपेन को कई लोगों ने सराहा और उसे उम्मीद से भी अच्छी प्रतिक्रिया मिली। वॉयस ऑफ ह्यूमैनिटी ने लोगों के अतिरिक्त कपड़े जो वे इस्तेमाल में नहीं लाते हैं उन्हें पास के एक स्कूल की दीवार पर टांग दिए, ताकि उन कपड़ों को अपने जरूरत के हिसाब से लोग ले सकें।

उनके एक और अभियान ने कई बीमार रोगियों की मदद की है, उनका नाम ‘मिशन जीवन रक्षक अभियान ‘ है। इसके माध्यम से, वॉयस ऑफ ह्यूमैनिटी  ने 1200 से अधिक रोगियों को आपातकालीन स्थितियों में रक्त की इकाइयां प्रदान करके मदद की,  ताकि इसकी कमी के कारण गरीबों की मृत्यु न हो।

उन्होंने इस पहल को फैलाने और लोगों को इससे जुड़ने के लिए सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को चैनल से जोड़ा है, वो सभी जिन्हें मदद की जरूरत है और जो दूसरों की मदद करना चाहते हैं वो एक इस पहल के साथ जुड़ सकते हैं।

 

हरि सिंह लोगों को खिलाते हुए

 

कई बार, ऐसी बड़ी टीम का प्रबंधन करना जो विभिन्न मुद्दों पर काम कर रही है, हरि के लिए एक समस्या बन जाती है। वह अपनी नौकरी और अपने जुनून के बीच हर दिन सामंजस्य स्थापित करने की कोशिश करते हैं, इस काम के माध्यम से वह समाज में बदलाव लाने का लक्ष्य रखते है और युवाओं को उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है।

समाज में जरूरतमंदों की मदद करने में उन्हें जो खुशी मिलती है, वह उसे जारी रखने का साहस देती है। तर्कसंगत उन्हें और उनकी टीम को उनकी समाज सेवा के लिए सलाम करता है जिसने संकट में कई लोगों की मदद की है। ऐसे युवा नायक मानवता में हमारे खोए हुए विश्वास को वापस ला रहे हैं।

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