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प्रांजल पाटिल बनी देश की पहली नेत्रहीन महिला आईएएस अफ़सर, तिरुवनंतपुरम के सब कलेक्टर का पद संभाला

October 15, 2019

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भारत की पहली नेत्रहीन आईएएस अधिकारी प्रांजल पाटिल ने केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में उप-जिलाधिकारी का पद संभाला। प्रांजल महाराष्ट्र के उल्हासनगर से ताल्लुक रखती हैं। साल 2016 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास की, जिसमें उनकी 773 वीं रैंक थी। 30 साल की प्रांजल ने 2017 में अपनी रैंक में सुधार किया और 124वीं रैंक हासिल की। फिर, ट्रेनिंग के बाद प्रांजल ने 2017 में केरल के एर्नाकुलम के असिस्टेंट कलेक्‍टर के रूप में अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत की।

प्रांजल पाटिल, केरल कैडर की अब तक की पहली नेत्रहीन महिला आईएएस अधिकारी हैं। सोमवार को इरंकुलुम कलेक्ट्रट में सभी अधिकारी प्रांजल से मिलने के लिए उत्साहित थे क्योंकि अपनी किसी भी कमी को प्रांजल ने अपनी मंजिल के बीच नहीं आने दिया।

 

 

बचपन में खेल खेल में गयी आँखों की रौशनी

प्रांजल सिर्फ छह साल की थी जब उनके एक सहपाठी ने उनकी एक आँख में पेंसिल मारकर उन्हें घायल कर दिया था। इसके बाद प्रांजल की उस आँख की दृष्टि खराब हो गयी। उस समय डॉक्टर ने उनके माता-पिता को सूचित किया था कि हो सकता है भविष्य में वे अपनी दूसरी आँख की दृष्टि भी खो दें। कुछ समय बाद प्रांजल की दोनों आँखों की दृष्टि चली गयी।

पर उनके माता-पिता ने कभी भी उनकी नेत्रहीनता को उनकी शिक्षा के बीच नहीं आने दिया। उन्होंने प्रांजल को मुंबई के दादर में नेत्रहीनों के लिए श्रीमती कमला मेहता स्कूल में भेजा। प्रांजल ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा भी बहुत अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की और 12वीं में चाँदीबाई कॉलेज में कला संकाय में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

 

मुंबई के सेंट जेवियर से किया बीए

प्रांजल ने मुबंई के दादर स्थित श्रीमति कमला मेहता स्कूल से पढ़ाई की है। यह स्कूल प्रांजल जैसे खास बच्चों के लिए था। यहां पढ़ाई ब्रेल लिपि में होती थी। प्रांजल ने यहां से 10वीं तक की पढ़ाई की। फिर चंदाबाई कॉलेज से आर्ट्स में 12वीं की, जिसमें प्रांजल के 85 फीसदी अंक आए। बीए की पढ़ाई के लिए उन्होंने मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज का रुख किया।

 

 

ग्रैजुएशन में आईएएस बनने की ठानी

ग्रैजुएशन के दौरान प्रांजल और उनके एक दोस्त ने पहली दफा यूपीएससी के बारे में एक लेख पढ़ा। प्रांजल ने यूपीएससी की परीक्षा से संबंधित जानकारियां जुटानी शुरू कर दीं। उस वक्त प्रांजल ने किसी से जाहिर तो नहीं किया लेकिन मन ही मन आईएएस बनने की ठान ली। बीए करने के बाद वह दिल्ली पहुंचीं और जेएनयू से एमए किया। इस दौरान प्रांजल ने आंखों से अक्षम लोगों के लिए बने एक खास सॉफ्टवेयर जॉब ऐक्सेस विद स्पीच की मदद ली। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल रिलेशंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। उन्होंने कहा, “हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए, क्योंकि हमारे किए गए प्रयास ही हमें कामयाब बनाते हैं।”

ओज़हरखेड़ा के एक केबल ऑपरेटर कोमल सिंह पाटिल से विवाहित प्रांजल अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, दोस्तों व अपने पति को देती हैं।

सोमवार को केरल में अपना कार्यभार संभालने के बाद सभी विभागों के अधिकारियों से मुलाकात की। कार्यालय के स्थापना विभाग के पी.एच रोशिता ने उनका हाथ पकड़ उन्हें प्रशासन हॉल का रास्ता दिखाया। सभी अफसरों ने बहुत ख़ुशी के साथ उनका स्वागत किया। जब प्रांजल ने अपने सभी कार्यों में अपने अधिकारियों का साथ माँगा तो सभी ने प्रोटोकॉल तोड़, उनका हाथ अपने हाथों में लेकर उनका साथ देने का आश्वासन दिया।

हम आईएएस अफसर प्रांजल को उनकी इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए उनके हौंसलों को सलाम करते हैं। यक़ीनन वे बहुत से लोगों के लिए प्रेरणा हैं।

 

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