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ये हैं लुधियाना की पहली महिला बाइक टैक्सी ड्राइवर की कहानी

तर्कसंगत

October 17, 2019

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जहां ऑनलाइन राइड एप्लीकेशन के जरिये बाइक टैक्सी का इस्तेमाल करने से महिलाएं हिचकिचाती हैं वहीं लुधियाना की पहली महिला बाइक टैक्सी ड्राइवर बनकर प्रीत दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बनी गई हैं।

वह शहर में रैपिडो बाइक टैक्सी चलाने वाली पहली महिला हैं। यह दावा प्रीत ने ही किया है।

15 दिन पहले जालंधर में बाइक टैक्सी चलाते एक महिला को देखकर प्रीत प्रभावित हुई थीं। उन्हें देखकर प्रीत ने सोचा कि अगर वह महिला बाइक टैक्सी चलाकर अपनी रोजी- रोटी कमा रही है तो वह क्यों नहीं। इसके बाद वह अगले ही दिन एक कैब ऑफिस गईं जहां महिला सोचकर उसके आवेदन को ठुकरा दिया गया। इसके बाद वह हैबोवाल रैपिडो ऑपिस गईं। वहां पर आवेदन तुरंत स्वीकार लिया गया।

उनसे यह पूछने पर कि क्या इस प्रोफेशन में आने से पहले उन्होंने शहर में अजनबियों के बारे में नहीं सोचा तो इस पर निडर प्रीत कहती है, “मैं इस पेशे में शामिल होने से डरती नहीं थी। आखिरकार, हर पेशे में पुरुष हैं। आप या तो घर बैठ सकते हैं या बाहर जा सकते हैं और मौका ले सकते हैं। ”

प्रीत 75 वर्षीय मां रणजीत कौर के साथ फेज 2, दुगरी में किराए के रूम में रहती हैं। उनकी 21 वर्षीय बेटी नीलम बीए की डिग्री ले रही है।

प्रीत ने कहा, “मैं कई सालों से दोपहिया वाहनों की सवारी कर रही हूं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह एक दिन मेरा पेशा बन जाएगा। फिलहाल मैं मॉडल टाउन, पखोवाल रोड और फील्ड गुंज के आसपास की राइड लेती हूं क्योंकि मैं इस क्षेत्र से परिचित हूं। एक बार काम की आदी हो जाने के बाद अन्य क्षेत्रों में राइड लेना शुरू कर दूंगी।”

बाइक सर्विस में शामिल होने से पहले प्रीत एक मेडिकल अटेंडेंट के रूप में काम करती थी और अपने घर में मरीजों की देखभाल करती थी। उन्होंने बताया, “मैंने लगभग दस साल तक मेडिकल अटेंडेंट के रूप में काम किया। हालाँकि इससे पैसे तो लगभग उतने ही मिलते थे जो मैं बाइक-टैक्सी चलाकर कमाती हूं। यह कोई रोजाना का काम नहीं था। इसके अलावा, मुझे मरीजों के घरों में रहना पड़ता था इसलिए यह बहुत सुरक्षित नहीं था।”

प्रीत ने कहा, “मैं इस काम से खुश हूँ और एक दिन में 500 से 800 रु. तक कमाती हूँ। मैंने पुरुष और महिला दोनों को राइड दी है और कभी भी किसी समस्या का सामना नहीं किया है।”

महिलाओं को इस पेशे में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, प्रीत ने कहा, “मैंने हमेशा माना है कि यदि आप अनजान से डरती रहेंगी, तो आप कभी कुछ नहीं कर सकतीं। अगर आपकी सोच सही है तो कोई भी काम बुरा नहीं है। फिलहाल वह शाम छह बजे तक ही यह बाइक चला रही है। अगर जरूरत पड़ी तो देर रात भी इस काम को करने में संकोच नहीं करेगी।”

 

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