पर्यावरण

देहरादून में ‘प्रोजेक्ट पानी’ है भविष्य में पानी की कमी से बचने का एकमात्र उपाय

तर्कसंगत

October 18, 2019

SHARES

पानी के कमी की समस्या हम सभी के लिए कोई नयी बात नहीं। इस समस्या को देश के अधिकतर शहरी आबादी के लोगों ने देखा है। मगर हम सभी में से ऐसे कितने लोग हैं जो अपने परिवार के लिए बचा कर रखे रविवार की छुट्टी को पानी की कमी को लेकर लोगों के बाच जागरूकता फैलाने के लिए न्योछावर कर दें? शायद काफी कम, इस परेशानी को देख समझ हम सभी रहे हैं मगर हर कोई इसे अपने नज़रिये देखता है. कुछ को लगता है ये म्युनिसिपेलिटी की ज़िम्मेदारी है, कुछ समझते हैं हमने होनी तरफ से पानी की खपत कम कर दी तो हमारा काम हो गया, कुछ को लगता है एक केवल मेरे या मेरे मोहल्ले में बदलाव लाने से क्या होगा ?

ऐसी ही कई तरह की सोच और नज़रअंदाज़ करने के अड्डों का परिणाम है कि हम आज इस समस्या से जूझ रहे हैं और सबसे ज़्यादा इसका असर चेन्नई शहर में कुछ समय पहले देखने को मिला है.

इन्ही सब परेशानियों को देखकर उत्तराखंड, देहरादून हरीश कुमार ने अपने स्तर से कुछ करने की ठानी. पेशे से मैनेजमेंट के प्रोफेसर हरीश देहरादून के ग्राफ़िक एरा हिल यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं. एक शिक्षक के रूप में उनमें परशानी को समझने और उसके उपाय को खोजने में ज़्यादा परेशानी नहीं हुई.

 

Image may contain: 1 person, smiling, beard

प्रोजेक्ट पानी

अपनी इस सोच को एक मुहीम में बदलने के लिए हरीश ने अकेले ही कदम उठाया. बीते 19 जून को शुरू की गयी इस पहल में धीरे धीरे उनके साथ कई सारे लोग जुड़ते गए. इस मुहीम मे पानी की बढ़ती समस्याएं एवं भविष्य में होने वाले हालातो को मद्देनज़र रखते हुए कुछ युवाओ की एक टोली हर इत्वार निकल पड़ती है लोगो के घर घर जाकर उन्हे सच का आईना दिखाने और उनमें पानी बचाने के लिए जागरुकता बढ़ाने को.
गोविन्द रस्तोगी (व्यवसायी), आयुष रावत( विद्यर्थि), नीतीश भारद्वाज( टाटा फाइनेंस), रोहित ध्यानी (शिक्षक) आदि जैसे लगभग 15 लोगों के साथ इनका मकसद सबकी सामजिक जिम्मेदारी को समझाना और जल संकट जैसी गम्भीर समस्या से लोगो को अवगत करके, लोगों को जागरूक करना है.

“जल है तो कल है” नारे के साथ ये टीम इस काम को समाज सेवा नहीं बल्कि आज की पीढ़ी  का कर्तव्य मानती है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों की कमी न हो. सबसे अच्छी और चौंकाने वाली बात ये है कि प्रोजेक्ट पानी की ये छोटी सी टोली बिना किसी आर्थिक मदद के अपने बुते पर देहरादून के लोगों को पानी की कमी से बचने के उपाय बता रही है.

 

Image may contain: 4 people, people smiling, people standing

छुट्टी का एक दिन पानी के लिए

अपने कॉलेज की नौकरी की मशरूफियत के बावजूद, हरीश प्रोजेक्ट पानी की आवाज़ को लोगों तक पहुंचाने के लिए, हर रविवार सुबह 9.30 बजे से दोपहर 2.00 बजे तक अपने ग्रुप के साथ लोगो के घर घर जा कर, उन्हें पानी बचाने के कई उपाय बताते हैं. उनके ग्रुप के सभी लोग पूरी तन्मयता और लग्न के साथ हर हफ्ते लोगों को यह बात समझाते हैं कि जो स्थिति देश के दूसरे हिस्सों में पानी की कमी की वजह से है उससे कैसे बचा जा सकता है.

अभी तक प्रोजेक्ट पानी ने देहरादून के अलग अलग हिस्सों में 7 कैंपेन किये हैं. क्लेमेंट टाउन, सुभाषनगर, देहरादून पाम सिटी आदि. तर्कसंगत से बात करते हुआ हरीश कुमार बताते हैं कि “हमारी इस मुहीम के कारण से उन्हें काफी बदलाव देखने को मिला है.” उनके काम करने की शैली के बारे में पूछे जाने पर हरीश बताते हैं ” हम हर हफ्ते शहर के अलग अलग हिस्सों का चयन करते हैं, हमारे ग्रुप के लोग उन हिस्सों का चयन करने में काफी मदद करते है, क्यूँकि हफ्ते के बाकी दिन भी वो इस चीज़ का ध्यान रखते हैं कि किस इलाके में पानी की बर्बादी होती है. इसके बाद हम तय दिन और तय समय पर एक साथ जा कर, उस इलाके के ज़्यादा से ज़्यादा घरों में पहुँच कर लोगों को समझने की कोशिश करते हैं.”

 

Image may contain: 8 people, people sitting, crowd and outdoor

 

“हमें हमारे इस कार्यप्रणाली से काफी सकरात्मक परिणाम मिले हैं, साथ ही साथ उनमें कुछ लोग हमारे काम से प्रभावित होकर हमारे साथ जुड़े भी हैं, भले ही वो नियमित नहीं रह पाते हैं, मगर मुझे विश्वास है कि वो जहाँ कहीं भी होते हैं अपने स्तर पर वो हमारी इस सोच को दूसरे लोगों तक पहुंचा रहे हैं, ये मिशन पानी के लिए के बहुत बड़ी जीत है.”

मिशन पानी के सन्देश की सफलता इस बात से आंकी जा सकती है कि जिन जिन जगहों पर लोगों को इसके बारे में बताया गया है, वहां लोग अब व्यर्थ में पानी बर्बाद नहीं करते, गाड़ियों को ड्राई वाश करते हैं, बागवानी में पाइप के बजाये बाल्टी और मग से पानी डालते हैं, घर के आगे के हिस्से को हरदिन पानी से न धोकर बल्कि हफ्ते में एक बार पानी से सफाई करते हैं.

 

Image may contain: 10 people, people smiling, people standing and outdoor

विभिन्न माध्यमों से समझाने की कोशिश

मिशन पानी की पहल को बनाने के लिए हरीश ने विभिन्न माध्यमों का सहारा लिया है. देहरादून की लोकल रेडियो चैनल 90.8 FM, अमर उजाला अखबार, APN न्यूज़ चैनल के मध्यम से लोगों को पानी बचने के लिए जागरूक किया है. इसके साथ ही साथ हरीश और उनकी टीम ने पोस्टर और पैम्पलेट के ज़रिये भी लोगों को उपाय बताये हैं जिससे वो अपने घर और आस पास में पानी की बचत कर सकते हैं.

 

Image may contain: 6 people, people smiling, people standing and beard

देहरादून निगम की अनदेखी

अपनी इस मिशन में हरीश कुमार ने पाया कि जिन जिन जगहों पर वो गए वहां लोगों के घर में सबमर्सिबल पंप लगे हैं, मगर निगम की तरफ से वाटर मीटर नहीं लगाया गया है. तर्कसंगत से बात करते हुए वो कहते हैं ” जब तक निगम ज़मीन के नीचे से खींचे कर बर्बाद हो रहे पानी का हर्ज़ाना वाटर बिल के रूप में लोगों से नहीं लेगी लोगों को उसकी कीमत समझ में यहीं आएगी.” भविष्य में देहरादून को पानी की संकट से बचाने के लिए कठोर और मुस्तैद कदम की ज़रूरत है जो अभी वहां के निगम की तरफ से नहीं ली गयी है. हरीश अपना ये नेक काम अपनी टीम के साथ कर रहे हैं मगर निगम को इसको खबर भी नहीं और उनकी तरफ से कोई मदद भी नहीं. “अपनी सिमित स्थिति में जितना बन पड़ रहा है मैं देहरादून के लोगों के लिए कर रहा हूँ, प्रशासन और लोगन का साथ मिलने से मेरा काम दुगनी तेज़ी से बढ़ेगा भी और इससे सभी को फायदा भी होगा.” हरीश ने तर्कसंगत से कहा.

उन्हें उम्मीद है कि निगम अगर वाटर मीटर लगाना अनिवार्य कर दे तो काफी हद तक लोगों द्वारा पानी की बर्बादी को कम किया जा सकेगा, साथ ही साथ भविष्य में बोरिंग करने के दिशानिर्देश भी तय किये जाएँ ताकि हम ग्राउंड वाटर का ज़्यादा अपव्यय न करें.

 

Image may contain: 14 people, people smiling, people standing and outdoor

प्रोजेक्ट पानी को भी चाहिए सब का साथ

मिशन पानी की इस छोटी मगर ने पहल को देहरादून और उसके आस पास के लोगों के साथ प्रशासन की भी मदद चाहिए, जो हरीश के काम और सोच को तेज़ी दे सके. बिना किसी आर्थिक और प्रयाप्त लोगन के मदद के वो अपनी बहुत सारी योजनाओं को कार्यान्वित नहीं कर पा रहे हैं. वो चाहते हैं कि उनके इस पहल में लोग अपनी भागीदारी बढ़ाएं ताकि वो ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को जागरूक कर पानी की कमी से देहरादून को भविष्य में लिए बचा सकें. तर्कसंगत अपने पाठकों से उम्मीद करता है कि प्रोजेक्ट पानी के इस मिशन को पूरा करने के लिए उनका साथ दें और इसके लिए आप उनके फेसबुक पेज  प्रोजेक्ट पानी से जुड़ कर उनसे संपर्क कर सकते हैं.

 

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...