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एफएसएसएआई सर्वे : देश में पैकेज्ड दूध के 37.7 फीसदी नमूने गुणवत्ता जांच में फेल

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Image Credits: Food Safety

October 21, 2019

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देश में पहली बार फूड रेगुलेटर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने दूध की गुणवत्ता परखने के लिए एक सर्वे किया है। एफएसएसएआई ने सर्वे में 41 प्रतिशत दूध के नूमनों में किसी न किसी प्रकार की कमी पाई जबकि 7 प्रतिशत दूध के नमूनों में स्वास्थ्य के लिए हानीकारक तत्व मौजूद थे।

 

एक साल का सर्वे

दूध की गुणवत्ता जांचने के लिए सर्वेक्षण मई 2018 से 2019 के बीच किया गया। इस सर्वे में सभी राज्यों और केंद्र प्रशासित राज्यों को भी शामिल किया गया था। खाद्य नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक, गुणवत्ता मानकों पर प्रोसेस्ड दूध के 2607 नमूनों में से 37.7 फीसदी फेल हो गए। वहीं, कच्चे दूध के 3,825 नमूनों में से 47 फीसदी मानकों के मुताबिक नहीं थे।

इस सर्वे में मुख्य रूप से जो बात सामने आई वो दूध के नमूनों में एफ्लाटॉक्सिन एम 1 की मौजूदगी थी। 6, 432 नमूनों में से 368 में इसकी मात्रा तय मात्रा 5.7 से ज्यादा थी। यह पहली बार है कि देश में दूध में एफ्लाटॉक्सिन एम 1 की उपस्थिति का इतना विस्तृत सर्वेक्षण किया गया है। एफ्लाटॉक्सिन एम 1, एक प्रकार का कवक है जो चारे के माध्यम से मिलाया जाता है। भारत में इसकी इजाजत नहीं है।

सुरक्षा मानकों की बात करें तो प्रोसेस्ड दूध के 10.4 फीसदी नमूने फेल रहे, जो कच्चे दूध (4.8 फीसदी) की तुलना में काफी अधिक है। हालांकि कुल नमूनों में केवल 12 में ही मिलावट पाई गई, जिनमें से ज्यादातर तेलंगाना के थे।

 

दूध में एंटीबायोटिक की मात्रा चिंताजनक

सर्वेक्षण के अनुसार, 1.2 प्रतिशत दूध के नमूनों में एंटीबायोटिक दवाओं के संकेत मिले हैं। कुल मिलाकर, दूध के नमूनों में से सात प्रतिशत असुरक्षित पाए गए, जिनमें गंभीर स्वास्थ्य खतरा था। सर्वे में पाया गया कि 41 प्रतिशत दूध में किसी न किसी प्रकार की दिक्कत थी। प्रोसेस्ड दूध के 2607 नमूनों में से 37.7 फीसदी नमूनों में फैट, एसएनएफ, माल्टोडेक्सट्रिन और शुगर की मात्रा तय सीमा से ज्यादा मिली। सुरक्षा मानकों पर प्रोसेस्ड दूध के 10.4 फीसदी फेल पाए गए।

एफएसएसएआई के सीईओ पवन अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा, लोग समझते हैं कि दूध में मिलावट ज्यादा गंभीर समस्या है, लेकिन इससे बड़ी समस्या दूध का दूषित होना है।

सीईओ अग्रवाल का कहना है कि 6,432 नमूनों में से लगभग 77 नमूनों में अनुमानित सीमा से ऊपर एंटीबायोटिक दवाओं के अवशेष थे। यूपी, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्य इसमें सबसे आगे हैं। 6432 में से 368 सैंपल एफ्लाटॉक्सिन एम-1 रसायन युक्त मिले हैं। इनमें सबसे ज्यादा 227 पैकेट वाले दूध के सैंपल हैं।

 

खराब गुणवत्ता वाले स्थान

तमिलनाडु, दिल्ली, केरल, पंजाब, यूपी, महाराष्ट्र और ओडिशा से लिए सैंपल में ये घातक रसायन मिला है। एंटीबॉयोटिक्स दवाओं की बात करें तो मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, आंध्रप्रदेश और गुजरात के सैंपल में इनकी मौजूदगी मिली।

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