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सरकारी बैंकों के विलय के खिलाफ बैंककर्मियों ने किया देशव्यापी हड़ताल

तर्कसंगत

October 23, 2019

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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय के ख़िलाफ़ बैंक कर्मचारियों की हड़ताल का मंगलवार को देश के कई हिस्सों में ख़ासा असर देखा गया। इस दौरान बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रही। हड़ताल की वजह से बैंक काउंटर पर नकदी के जमा और निकासी के साथ-साथ चेक भुगतान की सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।

सरकारी बैंकों का विलय करने और जमा पर दरें घटाने को लेकर दो बैंक संगठनों ऑल इंडिया बैंक एंप्लॉयीज असोसिएशन (AIBEA) तथा बैंक एंप्लॉयीज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) ने हड़ताल का आह्वान किया था।

बेंगलुरु, चेन्नै, पटना, मध्य प्रदेश तथा कोलकाता जैसे शहरों में कैश विदड्रॉल और डिपॉजिट तथा चेक क्लियरें सर्विसेज पर असर पड़ा। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शाखाओं पर इस हड़ताल का कम असर हुआ, क्योंकि उसके बेहद कम कर्मचारी दोनों संगठनों के सदस्य हैं। शहरी क्षेत्रों में सरकारी बैंकों की कई शाखाओं में कामकाज की वजह इन शाखाओं के अधिकारियों का हड़ताल का हिस्सा नहीं होना रहा। अधिकारियों ने इससे पहले अलग से हड़ताल का आह्वान किया था, लेकिन सरकार के हस्तक्षेप के बाद फिर वापस ले लिया था।

 

News - बैंक कर्मचारी यूनियन का कहना है कि इस मर्जर से बैंकिंग सेक्टर में लोगों की नौकरी जाएगी

 

न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार बैंक कर्मचारी यूनियन का कहना है कि इस मर्जर से बैंकिंग सेक्टर में लोगों की नौकरी जाएगी जबकि बैंक यूनियन जमा राशि पर दरों में गिरावट का भी विरोध कर रहे हैं। अपना आक्रोश केन्द्र सरकार के खिलाफ व्यक्त किया और चेतावनी दी कि अगर सरकार ने अपना रवैया नहीं सुधारा तो वे बड़े आंदोलन का फैसला कर सकते हैं। इसी तरह इंदौर, भोपाल, ग्वालियर में भी बैंक कर्मचारियों ने सड़क पर आकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

सरकार की विलय की नीति के खिलाफ दिल्ली में बैंक कर्मियों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल होने आए 59 वर्षीय धर्म प्रकाश जो पिछले 35 वर्षों से सिंडिकेट बैंक में कार्यरत हैं, ने न्यूज़ क्लिक से कहा कि इससे गाँव का किसान, कस्बे का छोटा व्यापारी और लाखों अन्य भारतीय नागरिक प्रभावित होंगे। आपको बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखने वाले, सिंडिकेट बैंक का अब केनरा बैंक के साथ विलय होने जा रहा है, जो देश में चौथा सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है। प्रकाश का मानना है कि यह विलय बैंक शाखाओं को बंद करने का काम ही करेगा, खासकर ग्रामीण क्षेत्र में।

 

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त्योहार के मौके पर बैंक हड़ताल से ग्राहकों के ज्यादा नकद निकासी से दोपहर के बाइ कई एटीएम खाली हो गये। इसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हड़ताल को लेकर बैंक के मुख्यालय के समक्ष बैंक कर्मचारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाये।

इस हड़ताल का मध्यप्रदेश में व्यापक असर देखने को मिला। मध्यप्रदेश बैंक एम्प्लॉयीज एसोसिएशन (एमपीबीईए) के सचिव एमके शुक्ला ने “पीटीआई-भाषा” को बताया, “हड़ताल के दौरान सूबे में सरकारी और निजी क्षेत्र के वाणिज्यिक बैंकों की कुल 7,416 शाखाओं में से लगभग 4,800 शाखाओं में अलग-अलग सेवाएं प्रभावित रहीं।”

उन्होंने बताया कि राज्य में बैंक हड़ताल में करीब 20,000 कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। इससे बैंक शाखाओं में धन जमा करने और निकालने के साथ चेक निपटान, सावधि जमा (एफडी) योजनाओं का नवीनीकरण, सरकारी खजाने से जुड़े काम और अन्य नियमित कार्य प्रभावित हुए।
इस बीच, हड़ताली कर्मचारियों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रस्तावित विलय के खिलाफ यहां रैली निकालकर आक्रोश जताया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की बैंकिंग नीतियां “जनविरोधी” हैं।

 

मुख्य मांग

2013 से कॉर्पोरेशन बैंक में क्लर्क 28 वर्षीय शेखर के अनुसार, बैंक विलय बढ़ती गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (Non-Performing Assets:NPA) का समाधान नहीं है। शेखर ने बताया, “पहले बैंक कर्ज़ देते हैं और फिर अपनी बैलेंस शीट के खर्च को कम करने के लिए उन्हें माफ़ करते हैं, और सरकार बैंकों को शाखाओं और एटीएम को बंद करने के लिए विलय कर देती है।”

 

 

हड़ताल में मुख्य मांगें थी कि बैंकों के विलय पर प्रतिबंध, जन विरोधी तथाकथित बैंकिंग सुधार फैसले की वापसी, सर्विस चार्ज में कटौती, जमा राशि पर पर्याप्त ब्याज तथा बेहतर ग्राहक सेवा के लिए सभी बैंकों में अपेक्षित नयी बहाली, बैंकों में वेतन समझौता अविलंब कराना आदि।

हड़ताल का समर्थन कर रहे यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया इंप्लाइज असोसिएशन के डेप्युटी जनरल सेक्रटरी रतन श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार की मनमानी के खिलाफ यह कदम उठाया गया है।

बीते दिनों केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 10 बैंकों के विलय का ऐलान किया था जिसके बाद 4 नए बैंक अस्तित्व में आएंगे। वहीं आंध्रा बैंक, इलाहाबाद बैंक, सिंडिकेट बैंक, कॉर्पोरेशन बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का अस्तित्व नहीं रहेगा।

 

बैंक हड़ताल का जिले में रहा मिलाजुला असर

 

10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने दिया समर्थन

इंटक, एटक, सीटू, एक्टू और एचएमएस के साथ देश के आठ शीर्ष संगठनों ने संयुक्त रूप से 22 अक्तूबर के बैंक हड़ताल का समर्थन किया। पिछले महीने बैंक अधिकारियों की यूनियनों ने 26-27 सितंबर को हड़ताल की घोषणा की थी. लेकिन बाद टल गयी थी। दिल्ली में हड़ताली बैंक कर्मचारियों को संबोधित करते हुए, अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC : एआईटीयूसी) के महासचिव अमरजीत कौर ने कहा, “बैंक विलय राष्ट्र के विकास के लिए लागू मोदी सरकार के ‘बैक गियर्स’ में से एक है।”

 

तर्कसंगत का तर्क

हालिया PMC बैंक के घोटाले से एक बात साफ़ है कि बैंकों का NPA बढ़ने के बाद अगर उस पर ध्यान न दिया जाए तो साधारण खाताधारकों की क्या हाल होती है। सरकारी बैंकों का विलय निश्चित तौर पर कर्मचारियों की नौकरी पर आंच की आशंका खड़ी करता है, सरकार का ये फैसला कि दो घाटे वाले बैंकों को एक कर देने से वो एक फायदे वाला बैंक होगा कहना थोड़ी जल्दबाज़ी होगी। उपाय इस चीज़ के निकाले जानें चाहिए कि बैंकों का वास्तविक NPA कैसे कम किया जाये, न कि दो बैंकों का विलय कर उनके NPA को आधा दिखा दिया जाए।

इसके बाद बैंक कर्मचारियों के वर्कप्रेशर को आपके घर का या बैंक का कर्मचारी भली भातिं अवगत करा सकता है. इस मुद्दे को लेकर पहले भी कुछ मीडिया में पहल हुई मगर इसका असर सरकार तक नहीं पहुंचा उल्टा नोटबंदी के समय इनके काम करने की प्रतिबद्धता और स्थिति को हम और आप नहीं आंक सकते। जब हम और आप सप्ताह के किसी भी दिन छुट्टी मना रहे होते हैं तब कई बार दूसरे और चौथे शनिवार को बैंककर्मी  शटर गिरा कर काम कर रहे होते हैं. प्राइवेट सेक्टर वाले कई छोटे मोठे बैंक के कर्मचारी तो महीने के 4 शनिवार और रविवार जानते भी नहीं।

तर्कसंगत ये उम्मीद करता है कि सरकार के विलय के फैसले से मौजूदा कर्मचारियों की नौकरी न जाए और साथ ही इनके काम करने की स्थिति और रूटीन में सुधार हो।

 

 

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