मेरी कहानी

मेरी कहानी : मैं लोगों के झूठे बर्तन उठाता था आज अंतररष्ट्रीय स्तर पर इवेंट्स करवाता हूँ

तर्कसंगत

Image Credits: Instagram

October 23, 2019

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जब मैं 10वीं क्लास में था तब मेरे पिता को व्यापार में एक बहुत बड़ा नुक़सान हुआ था. हमारे पास हमारा कुछ भी नहीं रह गया था. हम एक छोटे से घर में शिफ्ट हो गए थे और अपने सारे ख़र्चे बंद कर दिए थे. हमें कोई उम्मीद नहीं दिख रही थी. जब एक बार मेरे दोस्त ने एक इवेंट के लिए वेटर की नौकरी के बारे में बताया जो कि 250 रुपये वेतन की थी, तो मैंने बिना दोबारा सोचे वो नौकरी ले ली. मुझे पता था की मेरे माता-पिता नहीं मानेंगे इसलिए मैं उनको ये बोल कर निकल गया था कि अपने दोस्त के यहां सोने जा रहा हूं. जब मैं उस जगह पहुंचा तो उन्होंने मुझे बाहर सोने को कहा और खुले में शौच करने को भी. मैं उस वक़्त 15 साल का था. अगली सुबह जब इवेंट शुरू हुआ तो लोगों को खाना देने के बजाय मुझे लोगों का झूठा खाना, गंदे प्लेट्स और कूड़ा उठाने को कहा गया. मुझे बहुत बुरा लगा पर फिर भी मैं उस इवेंट की चकाचौंध से मोहित हो गया था. इवेंट मैनेजर ने बहुत ही बड़ा इवेंट किया था और सभी मेहमान बहुत ख़ुश लग रहे थे. मैं तभी समझ गया था कि मुझे यही बनना है.

इसके बाद भी मैं इवेंट्स पर इसी तरह के काम करता रहा. अंत में मेरे माता-पिता को पता चल ही गया था कि मैं क्या कर रहा हूं लेकिन उन्होंने मेरा साथ दिया, हमें रुपये की ज़रूरत थी. मैंने अपनी पढ़ाई के लिए भी काफ़ी रुपये बचा लिए था. मैंने पढ़ाई और काम दोनों को समय दिया. मुझे अभी भी इस 5 स्टार होटल में अपनी पहली शादियों के इवेंट में से एक याद है- मेरा एकमात्र सपना किसी दिन एक अतिथि के रूप में कदम रखना था. आख़िरकार, मेरे पिता को नौकरी मिल गई तो मैंने काम करना बंद कर दिया. मैंने अपने ग्रेजुएशन पर ध्यान दिया और एक फाइनेंस कंपनी में नौकरी पा ली. मगर मुझे उस काम में मज़ा नहीं आ रहा था. मेरे दिमाग में अपने 15 साल के रूप की तस्वीर बार-बार चल रही थी, जिसको इवेंट्स की दुनिया का हिस्सा बनना था. तो मैंने अपनी नौकरी छोड़ी और दोबारा इवेंट्स ज्वाइन कर लिए. कुछ ही सालों के अंदर मैं प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस की शादी के लिए काम कर रहा था. मैंने अम्बानी की शादी में भी काम किया है.

एक लड़का जो कभी वेटर का काम करता था और लोगों के झूठे बर्तन उठाता था आज अंतररष्ट्रीय स्तर पर इवेंट्स पर काम करता है और हज़ार से भी ज़्यादा लोगों को संभालता है. अगर आज भी आप मुझसे पूछेंगे तो मैं अपने अतीत को लेकर बिलकुल भी शर्मिंदा नहीं हूं. मैंने हमेशा इस बात पर यकीन किया है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है, जब तक अंत में ये आपको शीर्ष पर ले जाता है – जहां आपके सपने सच होते हैं.

 

स्रोत : ह्यूमन्स ऑफ़ बॉम्बे

 

“When I was in the 10th grade, my dad suffered major losses in his business. We had nothing left to our name, we’d to…

Posted by Humans of Bombay on Monday, 16 September 2019

 

 

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