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गुल्ल्क के पैसे से शौचालय बनवा रही है 9वीं में पढ़ने वाली जमशेदपुर की ये बेटी

तर्कसंगत

Image Credits: Punjab Kesari/NDTV

October 24, 2019

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गुल्लक के पैसे से शौचालय बनानेवाली नौवीं की छात्रा मोंद्रिता चटर्जी ने मुख्य सचिव डॉ डीके तिवारी से मुलाकात की.

इस पर डॉ तिवारी ने उसकी प्रशंसा की. साथ ही कहा कि वह इस कार्य को अभियान बनाये. स्कूल के दूसरे विद्यार्थियों को भी स्वच्छता के इस कार्य में जोड़ें. मुख्य सचिव ने कहा कि इस कार्य से अन्य स्कूल के विद्यार्थियों को जोड़ने के लिए शिक्षा विभाग को पत्र लिखेंगे. उन्होंने मोंद्रिता को पेयजल स्वच्छता सचिव से मिलने को कहा, ताकि उन्हें विभाग की योजनाओं से जोड़ा जा सके. मौके पर मोंद्रिता ने बापू की 150वीं जयंती पर समर्पित अपने  कार्यों से जुड़ी पुस्तिका माई लिटल स्टेप्स टूवार्ड्स क्लीन इंडिया भी सीएस को भेंट की.

 

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मोंद्रिता अपने माता-पिता के साथ झारखंड मंत्रालय में मुख्य सचिव से मिलने आई थी. इस दौरान उसने मुख्य सचिव को बापू की 150वीं जयंती पर समर्पित अपने कामों से जुड़ी पुस्तिका ‘माई लिटल स्टेप टुवर्ड्स क्लीन इंडिया’ भेंट की. मुख्य सचिव ने मोंद्रिता के कामों से प्रभावित होकर उसे प्रशस्ति पत्र देने का ऐलान किया.

 

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जमशेदपुर के हिलटॉप स्कूल की छात्रा है मोंद्रिता

14 वर्षीय मोंद्रिता चटर्जी हिलटॉप स्कूल, जमशेदपुर की छात्रा है. 2014 से गुल्लक में पैसा जमा कर सबसे पहले उसने 2016 में जमशेदपुर से सटे केंद्राडीह में शौचालय का निर्माण कराया था. इस सफलता के बाद उनकी शिक्षिका मां स्वीटी चटर्जी और मेहरबाई कैंसर अस्पताल, जमशेदपुर में कार्यरत पिता अमिताभ चटर्जी भी स्वच्छता के इस नेक कार्य में अपने वेतन का 15 फीसदी हिस्सा देने लगे. इसके बाद कारवां बढ़ता गया. उसके प्रयास से अभी तक 10 शौचालय अस्तित्व में आ गए हैं.

 

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राज्यपाल से मिलीं मोंद्रिता चटर्जी

जमशेदपुर की छात्रा मोंद्रिता चटर्जी ने बुधवार को राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से राजभवन आकर मुलाकात की. मोंद्रिता चटर्जी को मुख्यमंत्री रघुवर दास, स्वास्थ्य मंत्री एवं केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव द्वारा सम्मानित किया जा चुका है. राज्यपाल ने मोंद्रिता के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि समाज में उनकी इस पहल से स्वच्छता के प्रति सकारात्मक सोच आयेगी.

 

समाचार पत्रों से मिली प्रेरणा

मोंद्रिता कहती है कि उसे समाचार पत्रों और अन्य लोगों से सुनकर शौचालय बनाने की प्रेरणा मिली. अब वह इस अभियान से अन्य विद्यार्थियों को जोड़ने के साथ-साथ विभिन्न स्कूलों और गांवों में स्वच्छता का संदेश प्रचारित करना चाहती है. बतौर मोंद्रिता अब उसके गुल्लक में परिचितों और रिश्तेदारों के अलावा कोलकाता और असम के अपरिचित लोग भी योगदान कर रहे हैं.

 

 

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