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त्रिपुरा के डॉक्टर को सीएम बिप्लब कुमार देब के खिलाफ ट्वीट्स करने के लिए निलंबित कर दिया गया

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Image Credits: Sentinel Assam/Twitter

October 29, 2019

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अगरतला अथॉरिटीज मेडिकल स्कूल में फार्माकोलॉजी विभाग में एक सहायक प्रोफेसर को नागरिकता विधेयक के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट और मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब की आलोचना के लिए निलंबित कर दिया गया है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डॉ. कौशिक चक्रवर्ती को अगस्त में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। चक्रवर्ती के खिलाफ आरोप है कि एक सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद वो त्रिपुरा के मुख्यमंत्री की आलोचना कर रहे हैं,  नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट कर रहे हैं। चक्रवर्ती को पहले भी माकपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने के लिए दंडित किया गया है।

डॉ. चक्रवर्ती, जो चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में विशेष अधिकारी भी है, उन्होंने 19 अगस्त को नोटिस का जवाब दिया, जिसमें कहा कि “मैं उन आरोपों का तब तक जवाब नहीं दे पाएंगे, जब तक कि मुझे उन टिप्पणियों की कॉपी नहीं मिल जाती”।

31 अगस्त को सरकार ने चक्रवर्ती को मुख्यमंत्री की नाराजगी वाली टिप्पणियों के स्क्रीनशॉट के साथ एक दूसरा नोटिस दिया। डॉक्टर द्वारा किए गए तीन ट्वीट से मुख्यमंत्री काफी नाराज़ थे। तीनो पोस्ट में से एक, 10 फरवरी को पोस्ट किया गया था, जो उन्होनें नागरिकता (संशोधन) विधेयक का विरोध करने के लिए राज्य कांग्रेस के तत्कालीन प्रमुख प्रद्योत माणिक्य देबबर्मन को अपना समर्थन देते हुए लिखा था, दो अन्य इस साल की शुरुआत में बंगाली में थे।

 

 

जब हिंदी में उनका अनुवाद किया गया, तो उनके एक ट्वीट में लिखा था, “प्रिय बिप्लब दा, बकवास बोलने के लिए कोई नोबेल पुरस्कार नहीं है! आप एक सम्मानित स्थिति में हैं और शेष भारत के लिए हंसी का पात्र नहीं बनें। यह सरकार बहुत संघर्ष के बाद आई है और त्रिपुरा के लोगों को इससे बहुत उम्मीद है। हम सभी को निराश न करें।”

सीएम बिप्लब देब द्वारा विचित्र बयान देने के बाद यह ट्वीट आया। अपने एक बयान में, देब ने दावा किया था कि महाभारत के दौरान इंटरनेट मौजूद था जबकि अन्य में उन्होंने सुझाव दिया था कि स्नातक युवाओं को 10 साल में 10 लाख रुपये कमाने के लिए गाय और दूध खरीदना चाहिए।

डॉक्टर ने 11 सितंबर को राज्य के अधिकारियों को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि टिप्पणियां व्यक्तिगत थीं और एक सार्वजनिक कर्मचारी के रूप में नहीं बल्कि “स्वतंत्र देश के स्वतंत्र नागरिक के रूप” में की गई थीं।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन टिप्पणियों के कारण “किसी को कोई नुकसान होता है, तो यह अनजाने में हुआ” और इसके लिए बिना शर्त माफी मांगने को तैयार है। उन्होंने इस मामले को बंद करने की भी मांग कीऔर कहा की अगली बार जब वह सोशल मीडिया पर टिप्पणी करेंगे तो अधिक सावधान रहेंगे।

19 अक्टूबर, 2019 को एक अन्य आदेश में, त्रिपुरा सरकार के अवर सचिव ने चक्रवर्ती से कहा कि सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना अगरतला को न छोड़ें।

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