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उत्तर प्रदेश सरकार ने इस दिवाली दिए जलाने में 1 करोड़ 33 लाख़ रूपये खर्च किये

तर्कसंगत

Image Credits: Indian Express/Financial Express

October 30, 2019

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उत्तर प्रदेश सरकार ने 27 अक्टूबर, रविवार को राज्य सरकार के दीवाली समारोह में सरयू नदी के तट पर अयोध्या में छह लाख दीया जलाने के लिए 1 करोड़ 33 लाख़ रुपये खर्च कर दिए। सरकार ने दीयों की रोशनी के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तो बनाया, लेकिन इस साल का जश्न ऐसे समय में आया है जब स्वास्थ्य से लेकर अर्ध-सैन्य तक के राज्य सरकार के विभाग नकदी संकट से जूझ रहे हैं।

कैबिनेट बैठक जिसमें दीपोत्सव के लिए राशि स्वीकृत की गई थी, उस फैसले के बाद सरकार ने कर्मचारी कल्याण निगम के कर्मचारियों की उम्मीद पर भी पानी फेर दिया। न्यूज़ 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार संगठन को बंद कर सकती है और कर्मचारियों को या तो वीआरएस चुनने या अन्य सरकारी विभागों में जाने का विकल्प दे सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों को पिछले 11 महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है।

न्यूज़ क्लिक की रिपोर्ट के अनुसार पिछले महीने एम्बुलेंस ड्राइवरों ने तीन महीने से अधिक समय तक अवैतनिक वेतन का विरोध किया था, साथ ही साथ कुछ पहले निष्काषित ड्राइवरों को बहाल करने का विरोध किया था, और आठ घंटे की ड्यूटी की मांग की थी। राज्य सरकार ने बाद में आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (Essential Services Maintenance Act) पेश किया, जो उन्हें हड़ताल पर जाने से रोकता है। इस अधिनियम ने ड्राइवरों को और भी गुस्सा दिलाया और लखनऊ में आपातकालीन सेवाओं पर असर पड़ा।

योगी सरकार विवादों में तब आई जब सरकारी स्कूल में मध्याह्न भोजन के रूप में नमक और रोटी परोसे जाने का एक वीडियो सामने आया। छात्रों को बिना किसी करी या दाल के नमक के साथ रोटी खाते देखा गया। वीडियो ने सरकार की वेबसाइट पर उल्लिखित फलों, दालों और अन्य पोषण की सेवा के सरकार के दावों का भंडाफोड़ किया, बल्कि राज्य के सरकारी स्कूलों की स्थिति भी बताई।

इन सबसे उलट जहाँ ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक ने अनाथ बच्चों के साथ दिवाली मनाई, तथा साथ ही अपने अधिकारियों को भी विभिन्न चाइल्डकैअर संस्थानों में त्योहार मनाने का निर्देश दिया। लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार ने भव्य समारोहों ने समाचार पर सुर्खियां बटोरी।

2017 में सत्ता में आने के बाद से मुख्यमंत्री दीपोत्सव या दीपोत्सव का आयोजन कर रहे हैं। लेकिन यह उत्सव अब तक यूपी पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित किया जाता था, जो कि अब राज्य सरकार द्वारा आयोजित होगा।

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