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बेरोजगारी दर अक्टूबर में 8.9% तक बढ़ी, 2016 के बाद से सबसे ज़्यादा

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Image Credits: Hindustan Times/Financial Express

November 4, 2019

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सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) ने शुक्रवार को भारत की बेरोजगारी दर के आंकड़ों का एक नया सेट जारी किया, जो सितम्बर 2019 के 7.2 प्रतिशत से बढ़कर अक्टूबर 2019 में 8.5 प्रतिशत पर पहुंच गया। पिछली बार भारत ने ऐसे भारी बेरोजगारी अगस्त 2016 में 9.59 प्रतिशत के रूप में देखि थी।

भले ही सरकार ने अधिक मांग बनाने और अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए कई उपायों की घोषणा की है, लेकिन स्थिति सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार बदलती नहीं दिख रही है।

राज्यों में, त्रिपुरा और हरियाणा में बेरोजगारी का स्तर 20 प्रतिशत से अधिक (उच्चतम) देखा गया, जबकि बेरोजगारी तमिलनाडु में सबसे कम 1.1 प्रतिशत थी। राजस्थान में सितंबर और अक्टूबर 2019 के बीच बेरोजगारी की दर दोगुनी देखी गई, द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार।

अगर हम आठ प्रमुख उद्योगों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो सितंबर के लिए भारत का बुनियादी ढांचा उत्पादन सालाना आधार पर घटकर 5.2 प्रतिशत रह गया जो कि आठ क्षेत्रों में सबसे खराब है। इसके अलावा, आठ कोर सेक्टरों में से सात ने सितंबर महीने के लिए अपनी ग्रोथ में कमी देखि है।

यदि हमारे मज़दूर बढ़ती बेरोजगारी दर और खराब रोजगार की स्थिति में और ज़्यादा दिन रहे, तो सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार बाजार से मजदूरों की संख्या घट जाएगी।

द सेंटर ऑफ सस्टेनेबल एम्प्लॉयमेंट द्वारा जारी एक अन्य शोध पत्र ने निष्कर्ष निकाला कि 2011-12 और 2017-18 के बीच भारत में कुल रोजगार में उल्लेखनीय गिरावट आई है।

संतोष मेहरोत्रा ​​और जाजति के परिदा द्वारा किए गए शोध पत्र में दिखाया गया है कि उपरोक्त अवधि में कुल रोजगार में नौ मिलियन की कमी आई है, जो कि भारतीय इतिहास में पहली बार हुआ है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में बेरोजगारी की लहर ने असंगठित क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचाया है, जिसमें बड़ी मात्रा में ऐसे मजदूर भी शामिल है जो कुछ मौसमों में ही मजदूरी करते है। मांग में कमी के कारण दैनिक मजदूरी करने वाले भी बड़े पैमाने पर प्रभावित हुए हैं।

पिछले कुछ महीनों में मांग में इस गिरावट को देखते हुए कई निर्माताओं ने घाटे को सीमित करने के लिए अपनी उत्पादन क्षमताओं में कटौती की है, जिसके परिणामस्वरूप दैनिक मजदूरी या संविदा कर्मियों के रूप में काम करने वाले व्यक्तियों में उच्च बेरोजगारी हुई है।

हालांकि, पिछले महीने जारी रोजगार पर सीएमआईई के आंकड़ों से पता चला है कि भारत में मई और सितंबर 2019 के बीच रोजगार में 25 लाख की वृद्धि हुई है। भारत में मई-अगस्त 2019 के दौरान अनुमानित 40.49 करोड़ लोग कार्यरत थे, जबकि इसी अवधि के दौरान 40.24 करोड़ लोगों को रोजगार मिला था। 2018 में, “मई-अगस्त 2018 के दौरान रोजगार मई-अगस्त 2017 की तुलना में 55 लाख कम था, जो बदले में, मई-अगस्त 2016 में 6 लाख कम था,” सीएमआईई की रिपोर्ट ने उजागर किया।

रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़े भारत में जनसंख्या वृद्धि के विपरीत हैं। सरकार ने 2011 की जनगणना के आधार पर जनसंख्या अनुमान जारी नहीं किए हैं। उन्हें 2016 में पिछले मानदंडों के अनुसार जारी किया जाना चाहिए था। इंडियन एक्सप्रेस की  रिपोर्ट के अनुसार कुल आबादी की संख्या के कारण रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़े अलग-अलग इसलिए हैं क्यूंकि अर्थशास्त्री तक सही आंकड़े पहुंचे ही नहीं है। 

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