पर्यावरण

इटली के स्कूलों में अब मिलेगी इस अनूठे विषय की भी शिक्षा, भारत में भी ज़रूरी

तर्कसंगत

Image Credits: Pixabay/Lorenzo Fioramonti/Facebook

November 8, 2019

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जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दे को इटली ने स्कूली बच्चों के पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल कर लिया है और ऐसा करने वाला वह दुनिया का पहला देश बन गया है। वहां के शिक्षा मंत्री लॉरेंजो फिओरामोंटी ने बताया कि अगले साल सितंबर से शुरू होने वाले सत्र में देश के सभी स्कूल जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सप्ताह में कम से कम एक घंटा जरूर देंगे।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया  कि शिक्षा मंत्री लोरेंजो फिओरामोंटी ने कहा है कि छात्रों की नागरिक शिक्षा के हिस्से के रूप में शुरू में जो पाठ शुरू किए गए थे, उन्हें अब विभिन्न विषयों में एकीकृत किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि यह “ट्रोजन हॉर्स” का एक प्रकार है, जो सभी पाठ्यक्रमों में अपनी जगह बनाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे यहां पर्यावरण मंत्रालय देश में स्कूली बच्चों के लिए अगले सत्र से नर्सरी पाठ्यक्रम लागू करेगा, इसमें बच्चे खुद पौधों के बीज लगाएंगे।

फिओरामोंटी ने कहा, मैं इटली की स्कूली शिक्षा प्रणाली को पर्यावरण और समाज में सीखी गई चीजों के मूल में रखने वाली व्यवस्था सबसे पहले लागू करना चाहता हूं, ताकि आने वाली पीढ़ी इस त्रासदी को समझ सकें। हालांकि, अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे इटली के 42 वर्षीय शिक्षा मंत्री लॉरेंजो हालांकि इस फैसले के बाद विपक्षी दलों के निशाने पर आ गए हैं।

डेढ़ माह पहले सितंबर में उन्होंने खुद छात्रों से स्कूल छोड़कर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कदम नहीं उठाने पर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए कहा था। छात्रों को प्रदर्शन में भाग लेने के लिए प्राेत्साहित करने पर देशभर में उनकी जमकर आलोचना हुई थी।

 

भारत में क्या है स्थिति?

वन और पर्यावरण मंत्रालय देशभर में प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए अगले सत्र से ‘स्कूल नर्सरी’ प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है। जिसमें बच्चों को स्कूल नर्सरी से जोड़ा जाएगा, जिसमें बच्चे खुद ही पौधे रोपेंगे और उनमी देखभाल भी करेंगे। साल के अंत में परीक्षा पास करने पर बच्चों को एक ट्रॉफी के साथ उनका उगाया पौधा भी दिया जाएगा।

इसके अलावा भारत के नेशनल एनवॉयरन्मेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) ने दुनिया का पहला वेब रिपॉजिटरी (कोष) शुरू किया है। इसमें इंडियन एयर क्वालिटी इंटरैक्टिव रिपॉजिटरी ने 1950-1999 के दौर के करीब 700 स्कैन किए हुए दस्तावेज, 1215 शोध लेख, 170 मामलों के अध्धयन, 100 अन्य मामले और 2000 से ज्यादा स्टैच्यू को संजोया है।

इधर, भारत में जलवायु परिवर्तन को लेकर स्कूल में अलग से कोई विषय नहीं है। यह इंटीग्रेटेड फॉर्म में पढ़ाया जाता है। विज्ञान, भूगोल जैसे विषयों के साथ ही जरूरत के हिसाब से पर्यावरण शिक्षा को इसमें समाहित किया गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के निदेशक ऋषिकेश सेनापति ने बताया कि साल 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में पर्यावरण शिक्षा को लेकर आदेश दिया था जिस पर काम शुरू हुआ है।

 

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